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BSF: 19 दिन से पाकिस्तान की हिरासत में है बीएसएफ जवान, क्या सीजफायर के बाद खुलेगा जवान की रिहाई का रास्ता?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 12 May 2025 03:27 PM IST
सार

बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार साहू 19 दिनों से पाकिस्तान की हिरासत में है। भारत पाकिस्तान के बीच पहगाम हमले के बाद उपजे तनाव के बाद उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। कई दिन तक चले तनाव के बाद अब दोनों मुल्कों के बीच में सीजफायर हो गया है। ऐसे में बीएसएफ जवान की रिहाई के प्रयास तेज हो सकते हैं।

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BSF jawan is in Pakistan's custody for 19 days, will way for release of jawan open after ceasefire
बीएसएफ के जवान(फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

पिछले 19 दिन से बीएसएफ जवान, पूर्णम कुमार साहू पाकिस्तान की हिरासत में है। हालांकि बीएसएफ द्वारा अपने जवान की रिहाई के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी पाकिस्तान की तरफ से ऐसा कोई सिग्नल नहीं आया है कि जिससे साहू की रिहाई की उम्मीद नजर आए। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंपों पर भारत की स्ट्राइक 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कई दिन तक चले तनाव के बाद अब दोनों मुल्कों के बीच में सीजफायर हो गया है। ऐसे में बीएसएफ जवान की रिहाई के प्रयास तेज हो सकते हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' से पहले पाकिस्तानी रेंजर्स की तरफ से कहा गया था कि जवान की रिहाई को लेकर तभी मीटिंग होगी, जब पाकिस्तानी रेंजर्स के शीर्ष मुख्यालय से कोई आदेश आएगा। इसके बावजूद बीएसएफ द्वारा तय प्रोटोकॉल के तहत रोजाना, पाकिस्तानी रेंजर्स से बातचीत करने का प्रयास किया जाता है।   
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बीएसएफ जवान की रिहाई के लिए अब कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखी एक पोस्ट में पूछा, हमारे बीएसएफ जवान पूर्णम साहू को पाकिस्तानी कैद से कब रिहा किया जाएगा। इससे पहले अलॉइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने भी पीएम मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा था, बीएसएफ जवान की सकुशल रिहाई के लिए पाकिस्तान को विंग कमांडर अभिनंदन जैसा सख्त संदेश देने की जरुरत है। फरवरी 2019 में, बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन ने बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया था, लेकिन उस वक्त उनका विमान भी क्षतिग्रस्त हो गया था। नतीजा, पाकिस्तान ने अभिनंदन को हिरासत में ले लिया था। तब भारत के सख्त लहजे के चलते 60 घंटे में ही पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के पायलट को वापस लौटा दिया था।  
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बीएसएफ जवान पीके साहू का परिवार पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिसड़ा में रहता है। साहू की पत्नी रजनी ने कहा, वह इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात करना चाहती हैं। इसके बाद टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, इस बाबत शनिवार शाम को बीएसएफ डीजी से बात की गई है। सीजफायर के बाद अब स्थिति सुधर रही है। ऐसे में उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाने का यह सही समय है। दूसरी ओर बीएसएफ द्वारा रोजाना ही अपने जवान की रिहाई का प्रयास किया जाता है। ये अलग बात है कि अब पाकिस्तानी रेंजर्स कोई जवाब ही नहीं दे रहे। साहू को हिरासत में लेने के बाद पहले सप्ताह में करीब आधा दर्जन मीटिंग हुई थी। उसके बाद से जब भी फ्लैग मीटिंग के लिए बीएसएफ, जिस प्वाइंट पर सीटी बजाती है या झंडा दिखाती है तो पाकिस्तानी रेंजर्स वहां नहीं पहुंचते। रेंजर्स की तरफ से कहा गया है कि अब यह मीटिंग केवल तभी होगी, जब पाकिस्तानी रेंजर्स के शीर्ष मुख्यालय से कोई आदेश आएगा।   
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बीएसएफ द्वारा रोजाना ही बॉर्डर पर सीटी बजाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाने की कोशिश होती है। एक ही दिन में कई बार सीटी बजाने की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। इतना ही नहीं, फ्लैग मीटिंग के लिए सीटी बजाने के अलावा झंडा भी दिखाया जाता है। बीएसएफ का मकसद है कि किसी भी तरह से पाकिस्तानी रेंजर्स, बातचीत के लिए सामने आएं। जब एक बार सीटी की आवाज का पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता तो कुछ समय बाद दोबारा से जवान वहां पर पहुंचते हैं। बीएसएफ जवान की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल की भी मदद लेने की प्रक्रिया शुरु हो सकती है। बीएसएफ के पूर्व अफसरों का कहना है कि गलती से एक दूसरे देश की सीमा में चले जाना कोई बड़ा अपराध नहीं है। पहले भी दोनों पक्षों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। कई बार तो कुछ घंटे बाद ही और वो भी एक ही फ्लैग मीटिंग में मामला निपटा लिया जाता रहा है। इस बार पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति जो सख्त रवैया अपनाया है, उसके चलते बीएसएफ जवान की वापसी में देरी हो रही है। 


यह घटना 23 अप्रैल को तब हुई, जब बीएसएफ जवान पीके साहू 182वीं बटालियन, बॉर्डर के गेट संख्या 208/1 पर तैनात थे। वे फसल कटाई के दौरान भारतीय किसानों पर नजर रख रहे थे। बीएसएफ, किसानों की सुरक्षा भी करती है। लिहाजा तेज गर्मी के मौसम में जवान ने जब पेड़ की छांव में खड़े होने का प्रयास किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे हिरासत में ले लिया। उनकी सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई। बताया जाता है कि वह कुछ समय पहले ही इस क्षेत्र में तैनात हुआ था। ऐसे मामलों में जब सभी रास्ते बंद हो जाते हैं तो कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं। बीएसएफ के पूर्व अफसरों का कहना है कि पाकिस्तान को बीएसएफ जवान लौटाना ही होगा। वह उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। वजह, उसने जवान को लेकर खुद यह बात स्वीकार की है कि जवान उनकी हिरासत में है। 

इतना ही नहीं, इसके बाद पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि जवान को पूरी तरह से सुरक्षित रखना। अब वह कोई ऐसी चाल भी नहीं चल सकता है, जिसमें यह कह दिया जाता है कि जवान ने भागने का प्रयास किया, इसलिए उसे नुकसान हुआ है। उसे जवान पर हर पल नजर रखनी होगी। अगर जवान खुद को कोई नुकसान पहुंचाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी पाकिस्तान की होगी। दूसरी तरफ गत सप्ताह बीएसएफ के राजस्थान सेक्टर में एक पाकिस्तानी रेंजर्स को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार करने की बात सामने आई थी। हालांकि बीएसएफ ने इस मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की। 
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