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Hindi News ›   India News ›   bsf investiture ceremony 2022: MOS Home Nityanand Rai said, Migration in the border areas is becoming a matter of concern for the central government

बॉर्डर एरिया से पलायन: सीमावर्ती इलाकों से दूर जा रहे भारतीय लोग तो ‘पड़ोसी मुल्क’ वहां बढ़ा रहा जनसंख्या

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 03 Jun 2022 05:23 PM IST
सार

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, सीमावर्ती इलाकों में पलायन, केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। पलायन के कारणों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा, कहीं पर कठोर मौसम से लोग परेशान हैं तो कहीं बर्फबारी उनकी दिक्कतों का कारण है...

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bsf investiture ceremony 2022: MOS Home Nityanand Rai said, Migration in the border areas is becoming a matter of concern for the central government
बीएसएफ के अलंकरण समारोह में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय - फोटो : Agency

विस्तार

भारत से लगती पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर लोगों के पलायन की स्थिति गंभीर है। एक तरफ भारत के सीमावर्ती इलाकों से लोग पलायन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर पड़ोसी मुल्क अपने सीमा क्षेत्र में जनसंख्या बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय ने इस पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, सरकार अपने स्तर पर पलायन को रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है। पलायन, कुछ कम भी हो रहा है। बॉर्डर एरिया से पलायन का क्या कारण है, इस बाबत स्थानीय लोग ही बेहतर जानते हैं। विभिन्न इलाकों में पलायन के कारण भी अलग अलग हैं।  

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शुक्रवार को नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा, कश्मीर की बर्फीली चोटियों, झुलसा देने वाले थार, कच्छ का रण और घने वर्षा वनों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, सीमा सुरक्षा बल के अभेद्य सुरक्षा घेरे में सुरक्षित हैं। सीमावर्ती इलाकों में पलायन, केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। पलायन के कारणों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा, कहीं पर कठोर मौसम से लोग परेशान हैं तो कहीं बर्फबारी उनकी दिक्कतों का कारण है। बॉर्डर के किसी हिस्से में पशु चारे की किल्लत है तो कहीं पर बच्चों की पढ़ाई की ठीक व्यवस्था नहीं है। इस वजह से लोग शहरों की तरफ आ रहे हैं।

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बुनियादी सुविधाओं का अभाव

नित्यानंद राय ने कहा, दिक्कत ये है कि कई जगहों पर कुछ दिन के लिए लोग सीमावर्ती क्षेत्रों से दूर चले जाते हैं और उसके बाद अनेक व्यक्ति वापस नहीं लौटते। वे उस इलाके में रहने लगते हैं, जहां पर बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं। पड़ोसी मुल्क, अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा आबादी बढ़ा रहा है। ऐसा नहीं है कि भारत सरकार ने बॉर्डर एरिया के लिए कुछ नहीं किया। वहां पर लोगों का जीवन स्तर उच्च करने के लिए विकास की अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने नवम्बर, 2020 में गुजरात के धोरडो (कच्छ) में आयोजित सीमांत क्षेत्र विकासोत्सव को संबोधित करते हुए कहा था कि सीमावर्ती गांव में रहने वाले नागरिकों को उतनी सुविधा मिलनी चाहिए, जितनी हमारे शहरों में रहने वाले नागरिकों को मिलती हैं।

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बॉर्डर एरिया के कई इलाके तो कठिन परिस्थितियों वाले हैं। किन्हीं कारणों से वहां पर बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही। ऐसे में लोगों के पलायन को रोकने में सरकार नाकामयाब रही है। जो लोग बॉर्डर एरिया में रह रहे हैं, वे बहादुर हैं। वे देशभक्त हैं। अब सरकार उन्हें हर संभव सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। इसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की बड़ी भूमिका है। ये बल इन इलाकों में सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाते हैं। सरकार वहां के लोगों की जरूरत और स्वभाव को समझ रही है। वहां के लोग कई कार्यों के हुनरमंद हैं। इसका लाभ उठाकर उनका जीवन संवारा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सीमा सुरक्षा की अवधारणा को पुनः परिभाषित किया जा रहा है। स्थानीय जनसंख्या को इसके केंद्र में रखा जा रहा है।

शुरू करेंगे वाइव्रेंट विलेजेज कार्यक्रम

नित्यानंद राय के मुताबिक, ऐसे सीमावर्ती गांव, जहां जनसंख्या बहुत ही कम है और सीमित कनेक्टिविटी तथा बुनियादी सुविधाओं की वजह से वे विकास के लाभ से वंचित रह गए हैं। उत्तरीय सीमा के ऐसे ही गावों को नए 'वाइव्रेंट विलेजेज कार्यक्रम' के अंतर्गत लाया जाएगा। यहां के क्रियाकलापों में गांव की बुनियादी सुविधाओं, आवास, पर्यटन केंद्रों के निर्माण, सड़क संपर्क, विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा की व्यवस्था है, दूरदर्शन और शिक्षण चैनलों के लिए 'डाइरेक्ट टू होम एक्सेस' की व्यवस्था एवं आजीविका सृजन के लिए सहायता जैसे कार्य किए जाएंगे। इन क्रियाकलापों के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराया जाएगा। उनकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी कई स्थानों पर सरकार के एकमात्र प्रतिनिधि हैं, जिनका सीमावर्ती जनसंख्या के साथ सीधा संबंध है। सीमा सुरक्षा बल के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह स्थानीय लोगों के योगदान को पहचानते हुए उनके हितों का भी ध्यान रखे और उनके जीवन को बेहतर करने का प्रयास करें।

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