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बीएसएफ ने दी विदेशी उपकरणों को मात: स्वदेशी तकनीक से कम पैसे में हो रही सीमा की चौकसी!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 01 Dec 2021 04:39 PM IST
सार

तीन-चार वर्ष पहले बीएसएफ में 'व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली' (सीआईबीएमएस) का ट्रायल शुरू हुआ था। इस तकनीकी सिस्टम को पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर लगाया जा रहा है। इसका बड़ा फायदा यह है कि इसकी मदद से खराब मौसम, धुंध व बर्फबारी के दौरान व्यक्ति, पशु-पक्षी और अन्य किसी उपकरण की तस्वीर बिल्कुल साफ नजर आती है...

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BSF indigenous technology has outperformed expensive foreign equipment for surveillance along the India-Pakistan and India-Bangladesh borders
बीएसएफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सर्विलांस के लिए बीएसएफ की देशी तकनीक ने महंगे विदेशी उपकरणों को मात दे दी है। देशी तकनीक, बीएसएफ के लिए खासी मददगार साबित हो रही है। इस तकनीक में एंटी टनल सोल्यूशन, आईईडी का पता लगाना व घनी धुंध में बॉर्डर की चौकसी के लिए उपकरण, आदि शामिल हैं। बीएसएफ के डीजी पंकज सिंह बताते हैं, सीमा से सटे इलाकों में पहले से हाई टेक्नोलॉजी वाले जो उपकरण लगाए जा रहे हैं, उन पर काम जारी रहेगा। बीएसएफ ने अपने स्तर पर और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से 'सर्विलांस' शुरु किया है। अगर विदेशी उपकरण खराब हो जाता है तो उसे ठीक कराने में लंबा वक्त लगता है। कई बार एक ही पुर्जा आने में महीनों लग जाते हैं। अब बीएसएफ ने देश में मौजूद सर्विलांस उपकरणों की मदद ली है। इसका बड़ा फायदा हुआ है। व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली, जिसे लगाने के काम में बहुराष्ट्रीय कंपनियां लगी हैं, वह महंगा भी है। बॉर्डर सर्विलांस के लिए अब कम खर्चीले एवं स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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सीआईबीएमएस तकनीक की मदद

तीन-चार वर्ष पहले बीएसएफ में 'व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली' (सीआईबीएमएस) का ट्रायल शुरू हुआ था। इस तकनीकी सिस्टम को पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर लगाया जा रहा है। इसका बड़ा फायदा यह है कि इसकी मदद से खराब मौसम, धुंध व बर्फबारी के दौरान व्यक्ति, पशु-पक्षी और अन्य किसी उपकरण की तस्वीर बिल्कुल साफ नजर आती है। ये सिस्टम अमूमन वहां पर लगता है, जहां नदी, नाले और पहाड़ हैं। ऐसे क्षेत्रों में फेंसिंग भी ज्यादा कारगर साबित नहीं होती। सीआईबीएमएस, इस्राइली तकनीक पर आधारित सिस्टम है। तीन साल पहले असम के धुबरी जिले में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इस तकनीक में इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी के जरिए बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। धुबरी जिले का 61 किलोमीटर लंबा सीमा क्षेत्र, जहां से ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में प्रवेश करना आरंभ करती है, वहां सीमा की सुरक्षा बहुत मुश्किल कार्य है। घुसपैठिये और तस्कर, इसी का लाभ उठाते हैं। तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस तकनीक का जायजा लिया था।

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सीआईबीएमएस में सेंसर और कैमरों का इस्तेमाल

ब्रह्मपुत्र एवं उसकी कई सहायक नदियों का विषम परिक्षेत्र सीमा निगरानी को एक जटिल एवं चुनौती भरा कार्य बना देता है। बरसात के मौसम में तो यह काम जोखिम से भरा रहता है। घुसपैठ और तस्करी करने वाले लोग बरसात का इंतजार करते रहते हैं। सीआईबीएमएस प्रणाली में सेंसर और कैमरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बीएसएफ ने ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलीय क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश की बिना बाड़ वाली सीमाओं की प्रभावी निगरानी के लिए इसी सिस्टम की मदद ली है। इसके तहत कैमरे व सेंसर सिस्टम हर मौसम में 24 घंटे काम करते हैं। बॉर्डर के जिस क्षेत्र में यह सिस्टम लगाया जाता है, वहां पर पूरे क्षेत्र को डाटा नेटवर्क पर आधारित संचार प्रणाली यानी ओएफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन और रात निगरानी करने वाले कैमरों और घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली द्वारा कवर किया गया है।

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बॉर्डर पर लगे ये तकनीकी उपकरण बीएसएफ को हर तरह का फीडबैक प्रदान करते हैं। क्रॉस बॉर्डर और सीमा क्षेत्रों में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु दिखती है तो बीएसएफ के पास अलर्ट चला जाता है। इससे बीएसएफ की क्विक रिएक्शन टीमों को कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

सुरंग का पता लगा लेता है ड्रोन

डीजी पंकज सिंह कहते हैं कि सीआईबीएमएस प्रणाली पर काम चल रहा है। स्लोवीनिया और टाटा द्वारा यह सिस्टम लगाया जा रहा है। चूंकि ये पूरी तरह विदेशी तकनीक वाले उपकरण हैं, इसलिए जब कभी इनमें कोई खराबी आती है तो उसे ठीक कराना आसान नहीं होता। उसकी एक लंबी प्रक्रिया होती है। चूंकि सीआईबीएमएस प्रणाली का मकसद बेहतर सर्विलांस है, इसलिए बीएसएफ ने अपेक्षाकृत सस्ते एवं स्वदेशी तकनीक वाले उपकरणों की मदद लेनी शुरू कर दी है। सीआईबीएमएस में जो उपकरण, एक साथ काम करते हैं, बीएसएफ ने उन उपकरणों को अलग-अलग कर उनसे वही काम ले लिया। यूएवी का लो कॉस्ट सोल्यूशन तलाश लिया गया है। केवल नाम ही अलग है, बाकी वही काम लोकल उपकरण भी कर रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे खरीदे गए हैं। कैमरे भी कई तरह के हैं। इसी तरह से एंटी टनल सोल्यूशन तलाशा गया है। बॉर्डर पर आजकल जमीन से 30 फुट नीचे तक सुरंग खोदी जा रही है। इसका पता बाहर पड़ी खुदाई की मिट्टी से लग जाता है। उसके लिए खास किस्म का ड्रोन तैयार किया गया है। वह मिट्टी का रंग देखकर बता देता है कि वह मिट्टी सुरंग के भीतर से निकली है।



स्थापना दिवस की बधाई दी
इस बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बीएसएफ के स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बीएसएफ के सभी जवानों और उनके परिवारों को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई। देश के लिए उत्कृष्ट और समर्पित सेवा के लिए पूरे देश को बीएसएफ पर गर्व है।

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