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BSF: कमांडेंट ने इंस्पेक्टर को लात-घूसों से पीटा, मामला दबाने के चक्कर में बिगड़ी हालत, 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' के आदेश

Thu, 02 Jun 2022 02:14 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 02 Jun 2022 02:14 PM IST
सार

पीड़ित की पत्नी ने बीएसएफ डीजी को जो शिकायत दी है, उसमें लिखा है कि कमांडेंट ने वहां मौजूद जवानों एवं दूसरे कर्मियों को नशे की हालत में गालियां दी। कुछ देर बाद कमांडेंट ने हेतराम गुर्जर को लात मारनी शुरू कर दी। उनकी रीढ़ की हड्डी में चार-पांच ठोकर मारी गईं। कमांडेंट के जाने के बाद जब हेतराम ने उठने का प्रयास किया, तो उनसे नहीं उठा गया...

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BSF Commandant beats Inspector, victim's wife pleads for justice from BSF DG and Union Home Minister
अस्पताल में भर्ती हेतराम गुर्जर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बीएसएफ की गुवाहाटी स्थित 129 बटालियन के कमांडेंट द्वारा अपने ही इंस्पेक्टर को लात-घूसों से मारा गया। इस वजह से इंस्पेक्टर हेतराम गुर्जर के शरीर में गंभीर चोट लगी। मामले को दबाने के चक्कर में कमांडेंट ने पीड़ित हेतराम को गुवाहाटी के निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां पर मरीज की तबीयत और ज्यादा बिगड़ती चली गई। नतीजा, घायल इंस्पेक्टर को दिल्ली एम्स ट्रॉमा सेंटर में रेफर करना पड़ा। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह व कोषाध्यक्ष वीएस कदम द्वारा घायल इंस्पेक्टर की पत्नी कमलेश से मुलाकात करने के बाद बुधवार को उक्त बयान जारी किया है। कमलेश, इस वक्त सदमे में है। उसका आरोप है कि हेतरात को सही इलाज नहीं मिल रहा। उन्होंने इस मामले में बीएसएफ डीजी व केंद्रीय गृहमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। इस मामले की 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' के आदेश हो गए हैं। बीएसएफ के उपमहानिरीक्षक रैंक के एक अफसर को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है।

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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह व कोषाध्यक्ष वीएस कदम के अनुसार, यह घटना नौ मई की है। रात डेढ़ बजे जब हेतराम अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद खुले आसमान तले जमीन पर सो रहे थे, तो कमांडेंट सुरेश कुमार वहां पहुंचे। कमलेश ने बीएसएफ डीजी को जो शिकायत दी है, उसमें भी यही बात कही गई है। शिकायत में लिखा है कि कमांडेंट ने वहां मौजूद जवानों एवं दूसरे कर्मियों को नशे की हालत में गालियां दीं। कुछ देर बाद कमांडेंट ने हेतराम गुर्जर को लात मारनी शुरू कर दी। उनकी रीढ़ की हड्डी में चार-पांच ठोकर मारी गई। कमांडेंट के जाने के बाद जब हेतराम ने उठने का प्रयास कियां तो उनसे नहीं उठा गया। इंस्पेक्टर के सहयोगियों ने जब कमांडेंट से उसे अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी मुहैया कराने का आग्रह किया, तो वे दोबारा से जवानों को गालियां देने लगे।

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बतौर रणबीर सिंह, घायल इंस्पेक्टर की पत्नी ने बताया कि कमांडेंट द्वारा गाड़ी देने से मना करने के बाद जवानों ने हेतराम को बेहोशी की हालत में एक ट्रक में लेटा दिया। वे उसे सरकारी अस्पताल में ले गए। वहां से उन्हें निजी अस्पताल में भेज दिया गया। आईसीयू में दो दिन बाद जब इंस्पेक्टर को होश आया तो उन्होंने अपनी पत्नी को फोन कर सारी घटना बताई। कुछ देर बाद कमांडेंट सुरेश कुमार ने भी कमलेश से मोबाइल फोन पर बातचीत की। रणबीर सिंह ने कमांडेंट और कमलेश के बीच हुई बातचीत का आडियो भी जारी किया है। इसमें कमांडेंट सुरेश कुमार कह रहे हैं कि मुझसे गलती हो गई है। मैं बहुत शर्मिंदा हूं, श्रमा प्रार्थी हूं। मैं इंस्पेक्टर का इलाज गुवाहाटी के सबसे अच्छे अस्पताल में करा रहा हूं।

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कमलेश ने एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से कहा, कुछ दिन पहले तक इंस्पेक्टर की कमर से नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा था। उन्हें यूरिन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रणबीर सिंह ने कहा, हेतराम के इलाज में कोताही बरती गई है। कमांडेंट द्वारा किए गए जघन्य कृत्य को दबाया गया। कमलेश ने सदमे की हालत में कहा, उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। बीएसएफ अस्पताल में कोई खास देखरेख नहीं की जा रही है। मेरे छोटे-छोटे बच्चों का भरण पोषण कैसे होगा। इंस्पेक्टर हेतराम गुर्जर, जीवन-मृत्यु की बीच संघर्ष कर रहे हैं। कमलेश का कहना है कि हेतराम को बेहतर मेडिकल सुविधाओं वाले अस्पताल में भर्ती कराया जाए। कमांडेंट को बर्खास्त कर कर जेल भेजा जाए।

 

वीएस कदम के मुताबिक, सीनियर रैंक वाला अफसर जब ऐसा जानलेवा हमला करता है, तो वह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उस पर क्रिमिनल केस बनता है। एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने स्वीडन से बीएसएफ कमांडेंट द्वारा किए गए जघन्य कृत्य की घोर निंदा की है। बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह मामला शीर्ष अफसरों के संज्ञान में है। ऐसे मामले की निष्पक्ष जांच होती है। फोर्स में किसी के साथ गलत नहीं होता। जांच में अनेक बातें और परिस्थितियां देखी जाती हैं। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' के आदेश जारी किए गए हैं।

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