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दुनिया के भगोड़ों को लाने की जद्दोजहद: भारत कुछ को लाया, अमेरिका को आज भी... इंतजार

Thu, 20 Dec 2018 10:03 AM IST
पूजा मेहरोत्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पूजा मेहरोत्रा Updated Thu, 20 Dec 2018 10:03 AM IST
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bringing back the runaways history of extradition of fugitives to and from india
भगोड़े - फोटो : अमर उजाला

भारत में लंबे चौड़े घोटाले कर विदेश भागने वालों पर भारत सरकार सख्त है। इन भगोड़े अपराधियों की वापसी के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, कई मामलो में वह सफल भी रही है। चाहें बात डी-कंपनी से मशहूर अबू सालेम को भारत लाने की हो या फिर इनदिनों अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी घोटाले में फंसे क्रिश्चन मिशेल और कई बैंकों को चूना लगाकर किंग्स ऑफ गुड टाइम्स का झांसा देने वाले किंगफिशर किंग विजय माल्या की।



फिलहाल भारत सरकार ने विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, नितिन और चेतन संदेसरा, ललित मोदी और यूरोपियन बिचौलिए गुईडो राल्फ हाश्चके और कार्लो गेरोसा सहित उन 58 आर्थिक भगोड़ों को वापस लाने की कोशिश में जुटी है जो विदेश में रह रहे हैं। सरकार ने इन भगोड़ों को देश वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण की मांग, इंटरपोल से रेड कार्नर नोटिस और और लुक आउट नोटिस जारी करने का भी अनुरोध किया है। इन 58 में से सरकार और जांच एजेंसियां जैसे कि प्रवर्तन निदेशायलय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने वर्तमान में यूएई, ब्रिटेन, बेल्जियम, मिस्र, अमेरिका और एंटीगुआ को प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध भी भेजे हुए हैं। 

प्रत्यर्पण के मामले में भारत को कई तरह के पापड़ बेलने पड़े है पहले कुछ मामलों में सफलता भी मिल चुकी है। भगोड़ों को वापस लाने की जद्दोजहद सिर्फ भारत में खत्म नहीं होती ऐसे कई मामले विदेशों में भी मौजूद हैं।
आइए जानते हैं क्या हैं वो मामले:



 

प्रत्यर्पण के मामले में भारत की 43 देशों से संधि है

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ग्राफ से जाने कितने आए कितने आने हैं
प्रत्यर्पण के मामले में भारत की 43 देशों से संधि है जिसमें से 10 देशों के साथ समझौता हो चुका है। जबकि भारत सरकार 100 से अधिक मामलों में विदेशी सरकारों से मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया है। भारत सरकार से विदेशी सरकार ने 67 आरोपियों को प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया। 

 

भगोड़ों को भारत ने वापस भेजा

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विजय माल्या जल्द लाया जाएगा भारत

विश्व के टॉप प्रत्यर्पण राष्ट्र में कनाडा, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, यूएई और थाइलैंड जैसे देश शामिल हैं जहां के भगोड़ों को भारत ने वापस भेजा है और उनपर केस चल रहा है। इनमें कनाडा से 4, जर्मनी से 3, दक्षिण अफ्रीका से 3, दुबई से 19 और थाइलैंड से चार लोगों को वापस भेजा गया है। 

इन भगोड़ों में सबसे अधिक आरोप हत्या के हैं। हत्या के मामले में 19, आपराधिक जालसाजी के 12, आतंक के सात, मुंबई बम ब्लास्ट के तीन, शारीरिक उत्पीड़न मामले में तीन लोग शामिल हैं। इसमें 2002 से अक्तूबर 2018 तक के मामले में विजय माल्या और क्रिश्चन मिशेल को वापस लाया गया है।

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मेहुल चोकसी, नीरव मोदी भी हैं भगोड़े

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नीरव मोदी
भारत सरकार ने विदेशी सरकार से 51 भगोड़ों को मांगा। भगोड़ों को वापस भेजने वालों में 27 अमेरिका के, कनाडा के छह, संयुक्त राष्ट्र के तीन और अस्ट्रेलिया के चार लोग शामिल हैं। इन भगोड़ो में हत्या के 16, धोखा-धड़ी के 11, ड्रग अपराध के मामले में 10 और बलात्कार के मामले में 4 लोग शामिल हैं। इनमें पीएनबी बैंक घोटाला करने वाले मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और ललित मोदी का नाम अव्वल है।
 

 
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भारत के भगोड़े जिनमें से कुछ आए और कुछ आने हैं

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abu salem

अबू सालेम

प्रत्यर्पण संधि के बाद कुछ साल पहले डी कंपनी के अबू सालेम को वापस भारत लाया गया।  अबू सलेम डी कंपनी यानि दाऊद इब्राहिम के साथ मिलकर 50 से अधिक संगीन अपराधों में शामिल रहा है। यहां तक की 1993 में हुए मुंबई ब्लास्ट मामले में भी अबू सलेम का नाम शामिल था। यहां तक की सालेम का नाम टी-सीरीज के फाउंडर  गुलशन कुमार की हत्या के मामले में भी रहा है। अबू का प्रत्यर्पण उसकी फ्रेंड और अभिनेत्री रही मोनिका बेदी के साथ पुर्तगाल से कराया गया था।

दोनों को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। फिलहाल अबू सलेम 25 साल की सजा का काट रहा है और वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में है। उसने लिसबन सरकार को उसे भारत से वापस बुलाने के लिए आवेदन भी किया है। जबकि भारतीय सरकार और अथॉरिटी ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत सरकार का कहना है कि जब तक अबू अपनी जेल की सजा काट नहीं लेते उन्हें वापस नहीं भेजा जाएगा।



 
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