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ब्रिक्स 2026 में बड़े संदेश की तैयारी: जिनपिंग से भेंट के बाद पीएम मोदी से मिलेंगे पुतिन, दुनिया की रहेगी नजर

Mon, 31 Aug 2026 12:54 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 31 Aug 2026 12:54 PM IST
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BRICS Summit 2026 PM Modi Xi Jinping Vladimir Putin Bharat Mandapam US Donald Trump
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ से भारत को कई उम्मीदें हैं। सूत्रों का दावा है कि नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मलेन को शानदार बनाने की नींव यहीं पड़ेगी। एससीओ और ब्रिक्स की हलचल के चलते 31 अगस्त से सितंबर के दूसरे सप्ताह तक अमेरिकी रणनीतिकारों की निगाह भी इसी क्षेत्र में रहेगी। अमेरिका इन दोनों संगठनों के मजबूती से असहज होता है।
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विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार के मुताबिक एससीओ के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 होना है। रूस की निगाह ब्रिक्स और एससीओ दोनों को मजबूत करने की है। भारत भी अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थितियों को लेकर संवेदनशील है। पाकिस्तान भी एससीओ का सदस्य देश है। वहां एक स्थान पर, एक छत के नीचे उसके भी शिखर नेता होंगे। ऐसे में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री की वैश्विक नेताओं से भेंट नए आयाम स्थापित कर सकती है।  
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लक्ष्य तय कर भारत बढ़ा रहा है कदम 
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बिश्केक में पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। शी के साथ दि्वपक्षीय चर्चा के बाद उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चर्चा प्रस्तावित है। भारत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पहले ही रूस भेजा था। एनएसए डोभाल चीन की यात्रा पर थे। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय स्तर पर राष्ट्रपति पुतिन अमेरिकी नीतियों से सावधान होकर शांति, स्थायित्व और मित्र देशों में आपसी सहयोग चाहते हैं।

पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि पुतिन की मंशा फिलहाल भारत और चीन के बीच में दूरी कम करने की है। एनएसए डोभाल और उनके चीन के समकक्ष वांग यी ने बीजिंग में इसका संदेश दे दिया है। ऐसे में पुतिन अपने समकक्ष शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अच्छे तालमेल का संदेश दे सकते हैं। क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर भारत भी चाहता है कि पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद को समर्थन देने से बाज आए। अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाए। 2027 में एससीओ शिखर सम्मेलन भी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ही होना है। इसलिए उसके अनुकूल वातावरण भी आवश्यक है। इसलिए माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कजाकिस्तान यात्रा के दौरान कई लक्ष्यों को साधने का होमवर्क करके लौटेंगे। दिलचस्प यह है कि इन तीनों शीर्ष नेताओं की 11 दिन बाद फिर दिल्ली में भेंट होनी है।

चीन-अमेरिका के बीच में बन रहे समीकरण पर भी निगाह 
चीन और अमेरिका में रिश्तों को तेजी से पटरी पर लाने की शुरुआत हो रही है। 13 मई 2026 को राष्ट्रपित ट्रंप चीन के दौरे पर आए थे और 24 सितंबर को शी जिनपिंग को व्हाइट हाऊस आने का न्यौता दिया था। शी ने इसे स्वीकार कर लिया था। करीब नौ वर्ष बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन दौरे पर आया था। इसी तरह से सितंबर के चौथे सप्ताह में शी जिनपिंग भी 10 वर्ष बाद अमेरिका के दौरे पर जाकर राष्ट्रपति मिलेंगे।

अभी तक यह तय नहीं है कि इस दौरान शी जिनपिंग संयुक्त राष्ट्र महासम्मेलन में भी भाग लेंगे अथवा नहीं। इसे अमेरिका और चीन के बीच में संबंध को पटरी पर लाने, आपसी तनाव और प्रतिद्वंदिता कम करने के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि इस तरह की प्रगति भारत और चीन के आपसी तथा कारोबारी रिश्ते को थोड़ा अलग मुकाम देगी। रूस भारत और चीन के बीच में आपसी तालमेल में समय-समय पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस तरह की स्थितयां भारत को भी अमेरिका के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भू-राजनैतिक परिस्थितियों में अच्छा अवसर देती हैं।
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