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ब्रिक्स 2026: पहलगाम हमले की निंदा से लेकर टैरिफ नीति तक, किन मुद्दों पर सहमति; साझा घोषणापत्र में क्या-क्या?
Sat, 12 Sep 2026 05:42 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 12 Sep 2026 05:42 PM IST
सार
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का ऐतिहासिक साझा घोषणापत्र जारी हो चुका है। इसमें आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की पुरजोर मांग की गई है। क्या वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ दोहरा रवैया वास्तव में खत्म हो पाएगा? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मनमानी टैरिफ नीतियों और संरक्षणवाद के सामने विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूती से टिक पाएंगी? आइए, विस्तार से जानते हैं ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में क्या-क्या बताया गया है...
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कई ऐतिहासिक और बड़े फैसलों के साथ संपन्न हुआ। इसके समापन पर जारी किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में विश्व राजनीति और व्यापार से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया। घोषणापत्र में साफ कहा गया है कि किसी भी रूप में हिंसा, सीमा पार आतंकवाद और युद्ध को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।
इसके साथ ही, मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा व्यापार नीतियों, टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों पर गहरा ऐतराज जताया गया है। ब्रिक्स समूह ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी पुरानी वैश्विक संस्थाओं का स्वरूप अब बदलना चाहिए, ताकि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को उनका वाजिब हक और उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
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इसके साथ ही, मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा व्यापार नीतियों, टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों पर गहरा ऐतराज जताया गया है। ब्रिक्स समूह ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी पुरानी वैश्विक संस्थाओं का स्वरूप अब बदलना चाहिए, ताकि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को उनका वाजिब हक और उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
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पहलगाम आतंकी हमले पर ब्रिक्स ने क्या कड़ा संदेश दिया?
- साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- ब्रिक्स देशों ने पूरी दुनिया से अपील की है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए और इसे लेकर अपनाए जाने वाले किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को तुरंत खारिज किया जाए।
- सदस्य देशों ने साफ कहा कि आतंकवाद का किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से संबंध नहीं है, और सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवाद को मिलने वाले वित्तपोषण तथा उनके सुरक्षित पनाहगाहों को हर हाल में नष्ट किया जाना चाहिए।
- घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) को बिना किसी देरी के अंतिम रूप देने और लागू करने का पुरजोर आह्वान किया गया।
ट्रंप की संरक्षणवादी टैरिफ नीतियों पर ब्रिक्स की क्या आपत्ति है?
ब्रिक्स नेताओं ने किसी देश का नाम लिए बिना लेकिन मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की ओर इशारा करते हुए मनमाने टैरिफ और गैर-टैरिफ रुकावटों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समूह ने कहा कि पर्यावरण या राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने संरक्षणवादी नीतियां अपनाना और विश्व व्यापार संगठन के नियमों को दरकिनार कर टैरिफ थोपना अंतरराष्ट्रीय व्यापार को तबाह कर रहा है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो रही है और गरीब तथा विकासशील देशों की आर्थिक तरक्की पर गहरा संकट मंडरा रहा है।एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ ब्रिक्स ने क्या रुख अपनाया?
ब्रिक्स देशों ने घोषणापत्र में दो टूक कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्पष्ट मंजूरी के बिना लगाए जाने वाले सभी एकतरफा आर्थिक प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन हैं। ऐसे दंडात्मक कदमों और सेकेंडरी प्रतिबंधों का सबसे बुरा असर आम नागरिकों के मानवाधिकारों, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा और विकास के अधिकार पर पड़ता है। इस तरह के मनमाने प्रतिबंधों से कमजोर और गरीब तबके को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए इन्हें तुरंत खत्म किया जाना चाहिए।पश्चिम एशिया संकट और परमाणु सुरक्षा पर क्या फैसला हुआ?
ब्रिक्स नेताओं ने पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा मानकों के तहत आने वाले शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले जानबूझकर हमलों की कड़ी निंदा की गई। नेताओं ने दोहराया कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और सुरक्षा मानकों का हर हाल में पूरी तरह पालन होना चाहिए ताकि मानव जीवन और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।
गाजा मानवीय संकट और फलस्तीन पर क्या रहा नजरिया?
ब्रिक्स देशों ने युद्ध में भुखमरी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने और नागरिक बस्तियों व अस्पतालों पर हमलों की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने फलस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन का कड़ा विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु और स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के निर्माण का समर्थन किया, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलम हो। इसके अलावा, इस्राइल से लेबनान के सभी कब्जे वाले इलाकों से अपनी सेना वापस बुलाने और संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया गया।सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी पर क्या सहमति बनी?
ब्रिक्स नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रभावी और प्रतिनिधित्व वाला बनाने पर बल दिया। सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य देशों चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका और स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं का एक बार फिर खुलकर समर्थन दोहराया। घोषणापत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के उच्च पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।आईएमएफ और विश्व बैंक में किन सुधारों की मांग उठी?
ब्रिक्स देशों ने मांग की कि ब्रेटन वुड्स संस्थानों आईएमएफ और विश्व बैंक का पुनर्गठन किया जाए ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी उनकी वास्तविक आर्थिक हैसियत के अनुरूप तय हो सके। आईएमएफ के 16वें और 17वें जनरल रिव्यू ऑफ कोटा के तहत विकासशील देशों की वोटिंग पावर बढ़ाने पर जोर दिया गया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी सुधार में सबसे गरीब देशों के अधिकारों का नुकसान नहीं होना चाहिए और स्वैच्छिक योगदान के आधार पर वोटिंग अधिकारों में भेदभाव नहीं होना चाहिए।