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वाहन उद्योग में मंदी सिर्फ भारत की समस्या नहींः एनडीबी अध्यक्ष केवी कामथ

Mon, 19 Aug 2019 01:26 PM IST
Gaurav Pandey शंघाई से लौटकर विनोद अग्निहोत्री
शंघाई से लौटकर विनोद अग्निहोत्री Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 19 Aug 2019 01:26 PM IST
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Economic slowdown in automobile section is global problem, its not India centric
ब्रिक्स बैंक के अध्यक्ष केवी कामथ - फोटो : ट्विटर

पूरी दुनिया में फिर आर्थिक मंदी की आहट सुनाई पड़ रही है। मोटर वाहन उद्योग, भवन निर्माण क्षेत्र समेत तमाम परंपरागत उद्योग मंदी का संकट झेल रहे हैं। भारत में भी आर्थिक सुस्ती को लेकर तमाम चिंताएं जताई जा रही हैं। आर्थिक मंदी की इस आहट के बीच भारत में निजी क्षेत्र बैंकिंग के पितामह माने जाने वाले और इन दिनों ब्रिक्स देशों के संयुक्त उद्यम न्यू डेवलपमैंट बैंक (ब्रिक्स बैंक) भी कहा जाता है, के अध्यक्ष केवी कामथ का कहना है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और तकनीक ने बदलाव की इस गति को काफी तेज कर दिया है। 

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कामथ ने यह बात भारत चीन उच्चस्तरीय मीडिया फोरम के प्रतिनिधि मंडल में अमर उजाला समेत शामिल सभी पत्रकारों से चीन दौरे के दौरान एनडीबी मुख्यालय शंघाई में बातचीत करते हुए कही।उन्होंने कहा कि बदलाव के इस दौर में अब अर्थव्यवस्था को भी अपने पुराने ढर्रे को बदलना होगा और उसे नई पीढ़ी की आकांक्षाओं, सोच और व्यवहार के मुताबिक खुद में बदलाव करने होंगे। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की सोच और 18 से 40 साल के बीच के युवाओं की सोच में जमीन-आसमान का अंतर है और यह अंतर बढ़ता जा रहा है। उनका नजरिया और व्यवहार अलग है।

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सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा पसंद कर रही है नई पीढ़ी

कामथ ने कहा कि अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत को यह बात समझनी होगी। भारत में मोटर वाहन उद्योग में छाई मंदी को कामथ ने सिर्फ भारत की बल्कि पूरी दुनिया की समस्या बताया। उन्होंने कहा कि अकेले चीन में ही मोटर वाहनों की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट आई है। शंघाई जैसे शहर में जहां सबसे ज्यादा मोटर वाहन खरीदे जाते हैं, वहां भी गिरावट दर्ज की गई है। कामथ के मुताबिक इसकी वजह है कि नई पीढ़ी में निजी वाहनों के प्रति रुचि घटती जा रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सार्वजनिक परिवहन से चलना ज्यादा पसंद करने लगी है। 

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उन्हें मेट्रो या बस या टैक्सी में चलते हुए मोबाइल पर अपने मनपसंद का संगीत सुनने, चैट करने या ईमेल भेजने में ज्यादा दिलचस्पी है और इसलिए वह लंबी दूरी के लिए खुद ड्राइविंग का कष्ट नहीं उठाना चाहते हैं। शहरों में सड़कों पर जबर्दस्त जाम, घर से कार्यक्षेत्र की लंबी दूरी और पार्किंग की बढ़ती समस्या भी लोगों को खुद के वाहन रखने और उन्हें चलाने से विमुख कर रही है। बढ़ते वाहन प्रदूषण की वजह से सरकारों और स्थानीय प्रशासनों ने निजी वाहनों के परिचालन में कई पाबंदियां लगाई हैं, इसलिए भी लोग सार्वजनिक परिवहन ज्यादा पसंद कर रहे हैं। 

चीन में छोटी दूरियों के लिए बढ़ रहा साइकिल का चलन

कामथ ने बताया कि चीन में फिर से छोटी दूरी के लिए साइकिल का चलन बढ़ रहा है। एक तरह से साइकिल क्रांति हो रही है और देश में चार से पांच करोड़ तक साइकिलों की बिक्री पहुंच गई है। इसी तरह पर्यावरण को देखते हुए इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। साथ ही बिना चालक वाली ऑटोनॉमस कारों का उपयोग भी जल्दी ही चलन में आने वाला है। इसलिए अब वाहन उद्योग को लोगों की इस बदलती आदत के मुताबिक खुद में बदलाव करने होंगे। कामथ के मुताबिक यही बात दूसरे परंपरागत उद्योगों पर भी लागू होती है।

'ब्रिक्स बैंक में सभी फैसले मिलजुल कर लिए जाते हैं'

ब्रिक्स देशों यानी ब्राजील, भारत, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के सहयोग संगठन की पहल पर 15 जुलाई 2014 को न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना संबंधी समझौते पर सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किए और इस बैंक ने सात जुलाई 2015 में काम करना शुरू कर दिया। भारत में निजी बैंकिंग उद्योग के दिग्गज रहे केवी कामथ को इसका पहला अध्यक्ष बनाया गया। कामथ के मुताबिक यह पहला बैंक है जो विकासशील देशों ने विकासशील देशों में आर्थिक प्रगति के लिए गठित किया है। इस बैंक में सारे फैसले मिलजुल कर आम सहमति से लिए जाते हैं। 

कामथ ने कहा कि पहले विकासशील देशों को अपने तमाम विकास कार्यक्रमों और आधारभूत ढांचे की परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक, आईएमएफ, एशिया विकास बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाओं का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। इनमें विकसित देशों का वर्चस्व है। ब्रिक्स बैंक पूरी तरह से उसके पांच सदस्य देशों के साझे वित्तीय अंशदान और साझे नियंत्रण से संचालित है। जिन फैसलों में जरा भी मतभेद होते हैं, उन्हें तब तक छोड़ दिया जाता है जब तक आम सहमति नहीं बनती। 90 से 95 फीसदी फैसलों पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों में सहमति हो जाती है।

उन्होंने बताया कि एनडीबी द्वारा जितनी परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है, उनमें करीब 70 फीसदी सरकारी और 30 फीसदी निजी क्षेत्र में हैं। एनडीबी अध्यक्ष के मुताबिक ब्राजील में बैंक को नगरपालिका स्तर पर जाकर वहां की समस्याओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट बनाकर सरकार को देने और प्रोजेक्ट की मंजूरी लेकर वित्तीय सहायता देनी होती है, वहीं भारत में सरकार खुद प्रोजेक्ट बनाकर बैंक को देती है, जिसके आधार पर बैंक वित्तीय सहायता देता है। भारत में इंदौर, मुंबई और चेन्नई की मेट्रो रेल परियोजनाएं एनडीबी द्वारा वित्तपोषित हैं।

भारत की प्रणाली ब्राजील से बेहतर : कामथ

यह पूछने पर कि ब्राजील और भारत की प्रणालियों में कौन ज्यादा बेहतर है, कामथ ने कहा कि भारत की प्रणाली ज्यादा बेहतर है क्योंकि जब सरकार खुद किसी परियोजना को लेकर आती है तो उसमें बहुत ज्यादा जटिलता नहीं होती। कामथ ने कहा कि सभी देशों की प्राथमिकताएं अलग हैं। जहां भारत में जल, सड़क, मेट्रो जैसी आधारभूत ढांचे की परियोजनाओं पर ज्यादा जोर है, वहीं चीन में जल मार्गों को फिर से उनके पुराने स्वरूप में लौटाने की परियोजनाओं पर ज्यादा काम हो रहा है। इसी तरह ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका की अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं। 

विश्व बैंक और आईएमएफ को जवाब नहीं है ब्रिक्स बैंक

यह पूछने पर कि क्या ब्रिक्स देशों का न्यू डेवलपमेंट बैंक विश्व बैंक और आईएमएफ को जवाब है, कामथ ने कहा नहीं ये एक-दूसरे के पूरक हैं और एनडीबी दूसरे विकास बैंकों के साथ सहयोग से काम करता है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों का यह एक अद्वितीय मॉडल है और जिस तरह से एनडीबी को सफलता मिली है, उससे सदस्य देशों में यह विश्वास पैदा हुआ कि किसी भी तरह के आर्थिक संकट में वह अपनी बैंक से जरूरी वित्तीय सहायता ले सकते हैं। 

बैंक का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन

इसका दायरा बढ़ाने और नए देशों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। कामथ ने कहा कि इस पर अंतिम निर्णय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को लेना है जिसका निर्णय सदस्य देशों की सरकारें मिलकर लेंगी। एनडीबी का संपर्क सदस्य देशों के वित्त मंत्रालय से ही होता है और उसके जरिए ही परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने किसी भी देश की तरफ से बैंक के कामकाज में किसी भी तरह के हस्तक्षेप या दबाव से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अभी बैंक का मुख्यालय शंघाई में किराए पर है, लेकिन जल्दी ही उसका अपना मुख्यालय तैयार हो जाएगा।

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