{"_id":"6ad9dfcf3872b2f4370a063b","slug":"brahmos-indias-military-exports-jaiteerth-joshi-highlights-war-proven-missile-capabilities-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रह्मोस से बढ़ेगी भारत की सैन्य ताकत: 2028 तक आएगी नई पीढ़ी की मिसाइल; क्या होंगे फीचर, कैसे बढ़ेगा निर्यात?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ब्रह्मोस से बढ़ेगी भारत की सैन्य ताकत: 2028 तक आएगी नई पीढ़ी की मिसाइल; क्या होंगे फीचर, कैसे बढ़ेगा निर्यात?
Thu, 22 Oct 2026 03:35 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 22 Oct 2026 03:35 PM IST
सार
ऑपरेशन सिंदूर में अपनी ताकत दिखाने के बाद ब्रह्मोस की दुनिया में मांग बढ़ी है। भारत का रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, वहीं ब्रह्मोस-एनजी और 1,500 किमी तक मार करने वाली मिसाइल पर भी काम जारी है। ऐसे में ब्रह्मोस की ताकत और वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत का अगला कदम क्या होगा?
विज्ञापन
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जयतीर्थ जोशी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं है। यह आत्मविश्वास से भरे और आत्मनिर्भर नए भारत की ताकत, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और गर्व का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पहली बार असली जंग में इस हथियार प्रणाली का इस्तेमाल किया। इसने कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें पाकिस्तान के नूर खान जैसे प्रमुख एयरबेस भी शामिल थे। इसके जरिये भारतीय सशस्त्र बलों ने इस हथियार प्रणाली की ताकत दिखाई।
ब्रह्मोस प्रणाली भारत के रक्षा निर्यात की भी एक प्रमुख आधारशिला है। भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सालाना 62.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
विज्ञापन
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ ने क्या कहा?
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ब्रह्मोस की सफलता पर बात की। उन्होंने कहा कि निर्यात के क्षेत्र में ब्रह्मोस की सफलता की कहानी 2025 में युद्ध में इस्तेमाल होने से पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2022 में कंपनी को पहला ऐतिहासिक निर्यात ऑर्डर मिला था। कई मिलियन डॉलर के इस सौदे ने वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा निर्यात से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाया।
आज ब्रह्मोस भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे है। यह एक प्रमुख उत्पाद है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने धीरे-धीरे अपने निर्यात का दायरा बढ़ाया है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी बेहतरीन क्षमताएं साबित करने और युद्ध में परखी हुई प्रणाली बनने के बाद इसका निर्यात दायरा खास तौर पर बढ़ा है।
डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा कि फिलीपींस के साथ पहले निर्यात सौदे के बाद इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ समझौते किए गए हैं। आज ब्रह्मोस अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति में है। कंपनी भविष्य में अपने निर्यात की पहुंच को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
ये भी पढ़ें: 'बेटे पर गर्व है': रेहान की प्रदर्शनी से 70 फोटो हटाए जाने से नाराज हुए पिता रॉबर्ट वाड्रा, कहा- और जगह भी है
उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को पूरा करने और जरूरत पड़ने पर उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए ब्रह्मोस अपनी आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत कर रही है। जोशी ने कहा, निकट भविष्य और लंबी अवधि की हमारी प्राथमिकता अब तक सशस्त्र बलों से मिले सभी ऑर्डर पूरे करना है। हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और सबसे नई लखनऊ इकाई में हमारी सभी उत्पादन इकाइयां इस दिशा में पूरी गति से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, हम अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस के विकास और परीक्षण के लिए जरूरी विशेष तकनीकों पर काम करने के वास्ते 'टेक-ब्रिक्स' स्थापित करके अपने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) कार्य में भी तेजी लाना चाहते हैं।
बढ़ती मांग पूरी करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे?
उन्होंने कहा, बढ़ती मांग को पूरा करने और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है। पहले प्रत्येक प्रणाली या उसके उप-तंत्र के लिए हमारे पास एक या दो औद्योगिक भागीदार होते थे। अब हम ऐसे 45 स्रोत विकसित करना चाहते हैं। इससे गुणवत्ता और कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कितना निर्यात होने की उम्मीद?
ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात अभियान का एक प्रमुख उत्पाद है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को ऑर्डर और आपूर्ति के साथ इसका निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।
ऑपरेशन सिंदूर में साबित हुई ताकत
डॉ. जोशी ने कहा, दुनिया हमेशा से ब्रह्मोस को आश्चर्य और कौतूहल के साथ देखती रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस बेहद बहुउपयोगी मिसाइल ने साबित कर दिया है कि यह वास्तव में एक अद्भुत प्रणाली है। यह आज के जटिल, कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाने वाले और अत्यधिक तीव्र युद्ध के लिए विकसित की गई एक शक्तिशाली प्रणाली है, जिसमें विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल होता है।
उन्होंने कहा, भारत के बेजोड़ 'पहले हमला करने वाले' हथियार के रूप में ब्रह्मोस ने अपनी ताकत और श्रेष्ठता साबित की है। यह अपनी श्रेणी और क्षमता में सबसे घातक हथियार है। यह दुश्मन के ठिकानों को बेहद सटीकता से नष्ट कर सकती है। साथ ही, अपनी मौजूदगी छिपाने, तेजी से आगे बढ़ने और फुर्ती बनाए रखने की क्षमता भी रखती है।
विज्ञापन
ब्रह्मोस प्रणाली भारत के रक्षा निर्यात की भी एक प्रमुख आधारशिला है। भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सालाना 62.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ ने क्या कहा?
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ब्रह्मोस की सफलता पर बात की। उन्होंने कहा कि निर्यात के क्षेत्र में ब्रह्मोस की सफलता की कहानी 2025 में युद्ध में इस्तेमाल होने से पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2022 में कंपनी को पहला ऐतिहासिक निर्यात ऑर्डर मिला था। कई मिलियन डॉलर के इस सौदे ने वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा निर्यात से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाया।
आज ब्रह्मोस भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे है। यह एक प्रमुख उत्पाद है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने धीरे-धीरे अपने निर्यात का दायरा बढ़ाया है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी बेहतरीन क्षमताएं साबित करने और युद्ध में परखी हुई प्रणाली बनने के बाद इसका निर्यात दायरा खास तौर पर बढ़ा है।
डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा कि फिलीपींस के साथ पहले निर्यात सौदे के बाद इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ समझौते किए गए हैं। आज ब्रह्मोस अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति में है। कंपनी भविष्य में अपने निर्यात की पहुंच को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
ये भी पढ़ें: 'बेटे पर गर्व है': रेहान की प्रदर्शनी से 70 फोटो हटाए जाने से नाराज हुए पिता रॉबर्ट वाड्रा, कहा- और जगह भी है
उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को पूरा करने और जरूरत पड़ने पर उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए ब्रह्मोस अपनी आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत कर रही है। जोशी ने कहा, निकट भविष्य और लंबी अवधि की हमारी प्राथमिकता अब तक सशस्त्र बलों से मिले सभी ऑर्डर पूरे करना है। हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और सबसे नई लखनऊ इकाई में हमारी सभी उत्पादन इकाइयां इस दिशा में पूरी गति से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, हम अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस के विकास और परीक्षण के लिए जरूरी विशेष तकनीकों पर काम करने के वास्ते 'टेक-ब्रिक्स' स्थापित करके अपने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) कार्य में भी तेजी लाना चाहते हैं।
बढ़ती मांग पूरी करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे?
उन्होंने कहा, बढ़ती मांग को पूरा करने और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है। पहले प्रत्येक प्रणाली या उसके उप-तंत्र के लिए हमारे पास एक या दो औद्योगिक भागीदार होते थे। अब हम ऐसे 45 स्रोत विकसित करना चाहते हैं। इससे गुणवत्ता और कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कितना निर्यात होने की उम्मीद?
ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात अभियान का एक प्रमुख उत्पाद है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को ऑर्डर और आपूर्ति के साथ इसका निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।
ऑपरेशन सिंदूर में साबित हुई ताकत
डॉ. जोशी ने कहा, दुनिया हमेशा से ब्रह्मोस को आश्चर्य और कौतूहल के साथ देखती रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस बेहद बहुउपयोगी मिसाइल ने साबित कर दिया है कि यह वास्तव में एक अद्भुत प्रणाली है। यह आज के जटिल, कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाने वाले और अत्यधिक तीव्र युद्ध के लिए विकसित की गई एक शक्तिशाली प्रणाली है, जिसमें विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल होता है।
उन्होंने कहा, भारत के बेजोड़ 'पहले हमला करने वाले' हथियार के रूप में ब्रह्मोस ने अपनी ताकत और श्रेष्ठता साबित की है। यह अपनी श्रेणी और क्षमता में सबसे घातक हथियार है। यह दुश्मन के ठिकानों को बेहद सटीकता से नष्ट कर सकती है। साथ ही, अपनी मौजूदगी छिपाने, तेजी से आगे बढ़ने और फुर्ती बनाए रखने की क्षमता भी रखती है।