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ब्रह्मोस डाटा लीक: नेहा और पूजा की आईडी से फंसा निशांत, इस्लामाबाद से चलाए जा रहे थे दोनों अकाउंट

Wed, 10 Oct 2018 03:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Oct 2018 03:21 AM IST
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BrahMos Data leak: Neha and Pooja FB account was trapped by Nishant

स्वदेशी सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस का डाटा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को लीक करने के आरोपी एयरोस्पेस इंजीनियर निशांत अग्रवाल को दो फेसबुक अकाउंट के जरिए हनी ट्रैप में फंसाया गया था। इनमें एक अकाउंट नेहा शर्मा और दूसरा पूजा रंजन के नाम से चलाया जा रहा था। ये जानकारी यूपी पुलिस की एटीएस ने मंगलवार को अदालत में दी। अब निशांत से पूछताछ कर यूपी पुलिस इन अकाउंट से जुड़ी जानकारी जुटाएगी। इसके लिए जुटाने के लिए यूपी उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंक निरोधी दस्ते ने मंगलवार को जूनियर जज प्रथम श्रेणी एसएम जोशी की अदालत में निशांत का ट्रांजिट रिमांड मांगा।

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महाराष्ट्र एटीएस के अतिरिक्त अभियोजक एसजे बागदे ने बताया कि अदालत ने तीन दिन का रिमांड मंजूर कर लिया है। देर शाम यूपी पुलिस निशांत को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई। लखनऊ में निशांत से पूछताछ किए जाने के अलावा उसे विशेष एटीएस अदालत के सामने भी पेश किया जाएगा। बता दें कि निशांत अग्रवाल को यूपी और महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस के संयुक्त ऑपरेशन में सोमवार को यहां वर्द्धा रोड स्थित ब्रह्मोस सेंटर से गिरफ्तार किया गया था। 
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ब्रह्मोस डाटा लीक- इस्लामाबाद से चल रहे थे दोनों एफबी अकाउंट

ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का डाटा लीक करने के आरोप में दबोचे गए एयरोस्पेस इंजीनियर निशांत अग्रवाल को फंसाने वाले दोनों अकाउंट पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से चल रहे थे।  इन फर्जी अकाउंट के जरिए भारत में कई अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी फेसबुक पर जुड़ने का प्रयास किया गया था। यूपी एटीस के जांच अधिकारी ने नागपुर में ट्रांजिट रिमांड के लिए दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत को ये जानकारी दी। 
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इस अधिकारी ने बताया कि एजेंसी का मानना है, नेहा शर्मा और पूजा रंजन नाम के इन दोनों फेसबुक अकाउंट को आईएसआई संचालित कर रही थी। जांच अधिकारी ने बताया कि एक उच्चस्तरीय संवेदनशीलता वाले प्रोजेक्ट से जुड़े होने के बावजूद निशांत अग्रवाल इंटरनेट का उपयोग करने के मामले में बेहद लापरवाह था और इसी कारण वह आईएसआई का आसानी से शिकार बन गया। जांच अधिकारी ने निशांत अग्रवाल के लिंक्डइन अकाउंट की जांच करने की जानकारी भी अदालत को दी।

क्लासिफाइड वर्ग की फाइलें थीं निजी लैपटॉप में

निशांत के निजी लैपटॉप में एटीएस को क्लासिफाइड वर्ग की जानकारियां सुरक्षित मिली हैं। पीडीएफ फॉर्मेट में सुरक्षित रखी गई इन फाइलों में विभिन्न विशेषज्ञों की तरफ से की गई रेड मार्किंग भी दर्ज थी। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि ये जानकारी इतनी संवेदनशील थी कि इनका किसी अन्य से शेयर करना देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। नियम के तहत ऐसी जानकारियां निजी कंप्यूटर या लैपटॉप में रखना अपराध की श्रेणी में आता है। 


ये लगाई गई हैं निशांत पर धाराएं

निशांत को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3, 4, 5 व 9 समेत आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 120 (बी) व 121 (ए) और आईटी एक्ट की धारा 66 (बी) के तहत आरोपी बनाया गया है। 

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