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नहीं रहे बोरा: असमिया साहित्यकार पद्मश्री लक्ष्मीनंदन का निधन, सरस्वती सम्मान समेत कई पुरस्कार मिले थे
Thu, 03 Jun 2021 04:34 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 03 Jun 2021 04:34 PM IST
सार
लक्ष्मीनंदन बोरा कोविड से तो उबर गए थे, लेकिन इसके बाद उन्हें अन्य शारीरिक तकलीफें होने लगीं। उन्होंने 60 से ज्यादा किताबें लिखीं।
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साहित्यकार लक्ष्मीनंदन बोरा
- फोटो : social media
विस्तार
असम के जानेमाने साहित्यकार लक्ष्मीनंदन बोरा का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। कोविड के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते वे गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बोरा के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार की अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी। बोरा 89 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। पद्मश्री से सम्मानित बोरा के संक्रमित होने की पुष्टि 20 मई को हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वह कोविड-19 से उबर गए थे, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं से पीड़ित थे तथा उनका उपचार चल रहा था।
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'गंगा सिलोनिर पाखी' का 11 भाषाओं में अनुवाद
उन्होंने 60 से अधिक किताबें लिखी जिनमें अधिकांश उपन्यास और लघु कहानियों के संकलन हैं। उनका पहला उपन्यास ‘गंगा सिलोनिर पाखी’ का 11 भाषाओं में अनुवाद हुआ तथा 1976 में इस पर फिल्म भी बनी।साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता बोरा असम साहित्य सभा के अध्यक्ष रह चुके थे। उन्हें सरस्वती सम्मान और असम वैली लिटरेरी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।