फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court warns district magistrate of Dadra and Nagar Haveli for issuing Detention orders

Bombay HC: जिला जज को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- जितनी शक्ति मिलती है, उसके साथ उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी आती है

Thu, 15 Jun 2023 05:21 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 15 Jun 2023 05:21 PM IST
सार

उच्च न्यायालय की पीठ ने 18 अप्रैल को आदेश जारी किए थे। आदेश की प्रतियां गुरुवार को जारी की गई। आदेश में न्यायालय ने जिला जज के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तीन व्यक्तियों को हिरासत में रखने के आदेश दिए थे।

विज्ञापन
Bombay High Court warns district magistrate of Dadra and Nagar Haveli for issuing Detention orders
bombay high court

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक हिरासत आदेश के लिए दादरा और नगर हवेली के जिला जज को फटकार लगाते हुए टिप्पणी की कि जितनी बड़ी शक्ति मिलती है, उसके साथ उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। हाईकोर्ट ने नवंबर 2022 में दिए इस आदेश को 'चलताऊ व मशीनी' और 'बिना दिमाग का इस्तेमाल किए' दिया आदेश बताया। इसे रद्द करते हुए हिरासत में रखे तीन लोगों को छोड़ने को भी कहा है।

विज्ञापन


18 अप्रैल को जारी किए गए थे आदेश
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस शर्मिला देशमुख की डिवीजन बेंच ने यह आदेश 18 अप्रैल को दिया था, इसकी प्रति बृहस्पतिवार को जारी हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि यह जिम्मेदार अधिकारियों का बाध्यकारी कर्तव्य है कि वे जवाबदेही के साथ और सावधानी से कानून के तहत काम करें। हिरासत के कानूनों में व्यक्ति को उसकी निजी स्वतंत्रता से महरूम किया जाता है, जो सबसे बड़ी स्वतंत्रता मानी गई है। फिर भी संबंधित लोगों को कई महीनों से हिरासत में रखा गया, जो न्याय का अपमान है। 
विज्ञापन


कार्यशाला आयोजित की जाए
हाईकोर्ट ने इन हिरासत में रखे लोगों को 20 हजार रुपये मुआवजा चार हफ्ते में देने के केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव को आदेश दिए। संबंधित अधिकारियों को हिरासत से जुड़े कानून सिखाने के लिए एक वर्कशॉप करने का भी आदेश दिया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले जिला जज के आदेश को चुनौती देते हुए हिरासत में रखे गए लोगों में शामिल वकील विशाल श्रीमाली और संगीता राठौड़ नामक महिला ने अपने पति व बेटे की ओर से दो याचिकाएं दायर की थीं। गुजरात असामाजिक गतिविधि निवारण अधिनियम (पासा)  के तहत उन्हें हिरासत में रखा गया था। याचीगण के अनुसार वे गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते थे, इसलिए उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा कर हिरासत में भेजा गया था। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि गैर जिम्मेदार तरीके से हिरासत के आदेश जारी किए गए थे। यह कानून का दुरुपयोग है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed