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महाराष्ट्र: नवाब मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई पूरी, 15 मार्च को फैसला सुनाएगा बॉम्बे हाकोर्ट

Fri, 11 Mar 2022 05:00 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 11 Mar 2022 05:00 PM IST
सार

62 वर्षीय मलिक को ईडी ने 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। ईडी ने कहा है कि मलिक जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे पहले एक विशेष पीएमएलए अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया गवाहों के बयान मनी लॉन्ड्रिंग में आरोपी की संलिप्तता को दर्शाते हैं।

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Bombay High Court to pronounce order on habeas corpus plea of Maharashtra minister Nawab Malik on 15 March challenging arrest by ED
Bombay High Court - फोटो : PTI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सभी दलीलें बंद कर दीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता मलिक ने यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दाखिल की थी। हाईकोर्ट इस याचिका पर 15 मार्च को फैसला सुनाएगी। 

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महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्री और एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक को ईडी ने 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। उन्हेंन भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पहले ईडी की हिरासत में और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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न्यायाधीश पीबी वराले और एसएम मोदक की पीठ ने दोनों पक्षों की तीन दिनों तक चली व्यापक बहस के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। पीठ ने कहा कि पैसला 15 मार्च को सुनाया जाएगा। नवाब मलिक के अधिवक्ता अमित देसाई ने पहले हाईकोर्ट से कहा था कि उनकी गिरफ्तारी और रिमांड अवैध थी और उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाना चाहिए।
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ईडी ने मलिक की याचिका का विरोध किया
ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और अधिवक्ता हितेन वेनेगावकर ने अदालत को बताया कि मलिक की गिरफ्तारी उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई थी। एक विशेस पीएमएलए अदालत ने रिमांड आदेश जारी किया था। उन्होंने कोर्ट को ईडी की हिरासत में और फिर न्यायिक हिरासत में भेजने के वैध कारण भी बताए।


मलिक को उचित प्रक्रिया के बाद गिरफ्तार किया गया था और एक विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा जारी उनके रिमांड आदेश ने उन्हें ईडी की हिरासत में और फिर न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए वैध कारण बताए। उन्होंने कहा कि मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका विचार योग्य नहीं है। उन्हें इसकी जगह सामान्य जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए।

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