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Bombay HC: हाईकोर्ट ने पुराने कबूतरखानों को ढहाने पर लगाई रोक, दाना डालने को लेकर दिया ये आदेश

Wed, 16 Jul 2025 01:02 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 16 Jul 2025 01:02 AM IST
सार

कुछ नागरिकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि शहर में कई विरासती कबूतरखाने हैं। उन्होंने आशंका जताई कि नगर निगम के अधिकारी उन्हें ध्वस्त कर सकते हैं। इस मामले को लेकर अदालत ने बीएमसी को कबूतरखानों को ध्वस्त करने से रोक दिया है। हालांकि, कोर्ट ने कबूतरों को दिन में दो बार दाना डालने की अनुमति नहीं दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। 

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Bombay High Court stops BMC from demolishing old pigeon houses doesn't allow feeding twice day
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अंतरिम आदेश में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को महानगर में किसी भी पुराने कबूतरखानों को ढहाने से रोक दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई के लिए निर्धारित की है। साथ ही कहा, 'हम आदेश देते हैं कि सुनवाई की स्थगित तिथि तक, पुराने विरासती कबूतरखानों को ध्वस्त न किया जाए।'

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कुछ नागरिकों ने बीएमसी के कबूतरखानों पर अंकुश लगाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। साथ ही मांग की थी कि उन्हें कबूतरों को दिन में दो बार दाना डालने की अनुमति दी जाए। इस मामले की मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि, न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह दिन में दो बार कबूतरों को दाना डालने की अनुमति नहीं दे सकते। 
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कबूतरों की वजह से लोगों की सेहत को खतरे का सबूत कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करें

पीठ ने बीएमसी और महाराष्ट्र सरकार से कहा कि अगर उनके पास कोई ऐसा मेडिकल सबूत है, जिससे साबित होता है कि कबूतरों की वजह से लोगों की सेहत को खतरा है, तो वे उसे कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करें। पीठ ने कहा, 'मानव स्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए नगर निगम द्वारा लागू की जाने वाली नीति को देखते हुए, हम इस समय कोई अंतरिम आदेश देने के पक्ष में नहीं हैं।'


याचिकाकर्ताओं ने बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया
याचिकाकर्ताओं ने कबूतरों के दाना डालने वाले स्थानों पर नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसमें उनके कचरे से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों का हवाला दिया गया था। अदालत ने इस मुद्दे पर बीएमसी और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। पीठ ने कहा, 'यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि इन स्थानों (कबूतरखानों) को बंद करने की नीति से संबंधित मानव स्वास्थ्य से संबंधित जो भी चिकित्सा सामग्री/साक्ष्य उपलब्ध हैं, उन्हें ऐसे हलफनामों के माध्यम से रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए।'

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अदालत ने केईएम अस्पताल के डीन को प्रतिवादी बनाने का दिया आदेश
हाईकोर्ट ने नगर निगम द्वारा संचालित केईएम अस्पताल के डीन को इस मामले में प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया, ताकि उसके फुफ्फुसीय विभाग के प्रमुख कबूतरों की बीट से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर एक हलफनामा दायर कर सकें। याचिका के अनुसार, शहर में कई विरासती कबूतरखाने हैं और आशंका जताई गई है कि नगर निगम अधिकारी उन्हें ध्वस्त कर सकते हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 23 जुलाई तय की है और कहा है कि तब तक कोई भी पुराना कबूतरखाना नहीं तोड़ा जाए।

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