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कानून व्यवस्था के नाम पर रैलियों व सार्वजनिक सभाओं को मना नहीं कर सकती पुलिस : हाईकोर्ट
Fri, 21 Feb 2020 05:36 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 21 Feb 2020 05:36 AM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कहा है कि रैलियां और सार्वजनिक सभाएं सेफ्टी वाल्व के तौर पर काम करती हैं। पुलिस सार्वजनिक सभा करने की इजाजत देने से मात्र इस आधार पर इनकार नहीं कर सकती है कि इससे कानून और व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को अपने एक फैसले में कहा कि रैलियां और सार्वजनिक सभाएं सेफ्टी वाल्व के तौर पर काम करती हैं। पुलिस सार्वजनिक सभा करने की इजाजत देने से मात्र इस आधार पर इनकार नहीं कर सकती है कि इससे कानून और व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी।
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पीठ ने उक्त टिप्पणी भीम आर्मी के एक नेता की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसमें उन्होंने 22 फरवरी को रेशिमबाग मैदान में रैली को अनुमति नहीं देने के पुलिस के फैसले को चुनौती दी है। पीठ ने कहा कि मौलिक अधिकारों में कटौती नहीं की जानी चाहिए। रेशिमबाग मैदान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय के करीब है।
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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर इस रैली को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि कोटवाली पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर रैली को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि ऐसी रैलियां और सभाएं सेफ्टी वाल्व की तरह काम करती हैं। दमन बहुत खतरनाक है।
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