Bombay High Court: 'तो क्या मुंबई की सड़कें बंद कर देनी चाहिए?' BMC के बहाने पर भड़के सीजे देवेंद्र उपाध्याय
अधिवक्ता रूजू ठक्कर द्वारा दायर याचिका में पर हाई कोर्ट सुनवाई कर रही थी। इसमें मुंबई और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में सभी मुख्य सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत को लेकर हाईकोर्ट के पूर्व के आदेशों को लागू करने में फेल होने के लिए बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर में गड्ढों से संबंधित मौतों की संख्या में वृद्धि के संबंध में एक मामले में सुनवाई करते हुए मंगलवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने शहर में गड्ढों से संबंधित मौतों की संख्या में वृद्धि को लेकर अधिवक्ता रूजू ठक्कर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सुनवाई के दौरान हलफनामा दाखिल नहीं करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा दिए गए बहाने की निंदा की। साथ ही हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए बीएमसी का पक्ष रख रहे वकील से पूछा कि क्या मुंबई में सड़कें बंद कर दी जानी चाहिए?
अधिवक्ता रूजू ठक्कर द्वारा दायर याचिका में मुंबई और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में सभी मुख्य सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत के निर्देश देने वाले 2018 के हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने में फेल होने के लिए नागरिक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी। इस मामले में जब मंगलवार को सुनवाई हो रही थी तब बीएमसी की ओर से पेश वकील ने हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय मांगा। समय मांगते हुए बीएमसी के वकील ने पीठ को बताया कि बीएमसी के कानूनी विभाग सहित ज्यादातर नागरिक कर्मचारी या तो चुनाव ड्यूटी पर हैं या मराठा आरक्षण के लिए घर-घर सर्वेक्षण कर रहे थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय नाराज हो गए। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा, 'क्या यह कोई बहाना है? अगर ऐसा है तो मुंबई में सड़कें बंद कर देनी चाहिए? कोई चुनाव ड्यूटी पर है, कोई मराठा आरक्षण के लिए सर्वे कर रहा है। क्या हो रहा है?'
हालांकि बाद में अदालत ने बीएमसी को 15 फरवरी तक अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही मामले को आगे के लिए सूचीबद्ध कर दिया। पीठ ने यह भी कहा कि हलफनामे में यह भी बताया जाना चाहिए कि बीएमसी शहर में कंक्रीटीकरण का काम पूरा करने की किस तारीख को योजना बना रही है। गौरतलब है कि बीते साल दिसंबर में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और सभी नगर निकायों को याचिका के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।