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Elgar Parishad Case: विशेष अदालत के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द, नवलखा की जमानत याचिका से जुड़ा है मामला
Thu, 02 Mar 2023 07:53 PM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 02 Mar 2023 07:53 PM IST
सार
उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानत याचिका पर विशेष अदालत द्वारा नए सिरे से सुनवाई की आवश्यकता है। आगे कोर्ट ने कहा कि विशेष न्यायाधीश से अनुरोध है कि 5 सितंबर के आदेश और आज के इस आदेश से प्रभावित हुए बिना चार हफ्तों के भीतर निष्कर्ष निकाला जाए।
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गौतम नवलखा
- फोटो : social media
विस्तार
एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आरोपी गौतम नवलखा की जमानत खारिज करने वाली एक विशेष अदालत के गुप्त आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को रद्द कर दिया। 70 वर्षीय गौतम नवलखा ने पांच सितंबर, 2022 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम के तहत योग्यता के आधार पर जमानत देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
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जस्टिस ए एस गडकरी और पी डी नाइक की खंडपीठ ने कहा कि विशेष अदालत के आदेश में अभियोजन पक्ष द्वारा भरोसा किए गए सबूतों का विश्लेषण शामिल नहीं था, क्योंकि इसने विशेष न्यायाधीश को चार हफ्तों के भीतर नई सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।
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उच्च न्यायालय ने इस हफ्ते नवलखा के वकील युग चौधरी द्वारा दी गई दलीलों को संक्षेप में सुना, लेकिन कहा कि विशेष अदालत के आदेश में तर्क शामिल नहीं था और कहा कि उसे तर्कपूर्ण आदेश का लाभ नहीं मिला। साथ ही पीठ ने गुरुवार को कहा कि किसी भी प्रकृति का कोई कारण नहीं दिया गया है। निचली अदालत ने जमानत खारिज करते समय गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43डी(5) के तहत आवश्यक तर्क नहीं दिया है।
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उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानत याचिका पर विशेष अदालत द्वारा नए सिरे से सुनवाई की आवश्यकता है और इसे बाद में वापस भेज दिया। आगे कोर्ट ने कहा कि विशेष न्यायाधीश से अनुरोध है कि 5 सितंबर के आदेश और आज के इस आदेश से प्रभावित हुए बिना चार हफ्तों के भीतर निष्कर्ष निकाला जाए। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अदालत ने योग्यता पर कोई राय नहीं दी है।
आईएसआई जनरल से की थी मुलाकात
एजेंसी ने आगे दावा किया था आईएसआई के निर्देश पर गुलाम नबी फई के जरिए गौतम नवलखा ने एक पाकिस्तानी आईएसआई जनरल से भी मुलाकात की थी। यह गुलाम नबी फई और पाकिस्तानी आईएसआई के साथ उनकी सांठगांठ और मिलीभगत को दर्शाता है।
क्या है एल्गार मामला
बता दें कि एल्गार मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा हुआ है। पुलिस का दावा है कि इन भड़काऊ भाषणों के कारण ही पुणे जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।