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भीमा कोरेगांव केस : वरवरा राव को मेडिकल आधार पर छह महीने के लिए मिली जमानत

Mon, 22 Feb 2021 12:53 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 22 Feb 2021 12:53 PM IST
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Bombay high court grants bail to varavara rao for six months on medical grounds on bhima koregaon case
वारा वारा राव

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी 81 वर्षीय वरवरा राव को बॉम्बे हाई कोर्ट ने छह महीने के लिए जमानत दे दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिकित्सा आधार पर वरवरा राव को जमानत देने का फैसला लिया है। बता दें कि 28 अगस्त, 2018 से वरवरा राव मामले की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। 

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न्यायमूर्ति एसएस शिंडे और मनीष पिटाले की बेंच ने कहा कि छह महीने बाद वरवरा राव या तो सरेंडर कर सकते हैं या फिर अपनी जमानत की अवधि को बढ़वा सकते हैं। हालांकि वरवरा राव को सशर्त जमानत दी गई है। कोर्ट ने कहा कि वरवरा राव कोर्ट की प्रक्रिया से संबंधित कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं दे सकते और सह-आरोपी के साथ संपर्क भी नहीं साध सकते।
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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी वरवरा राव को जिस तलोजा जेल में रखा गया था, वहां की हालत अच्छी नहीं थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर वह राव को चिकित्सा के आधार पर जमानत नहीं देता तो यह मानवाधिकार के सिद्धांत की रक्षा करने के उसके कर्तव्य एवं नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से विमुख होने जैसे होगा।
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अदालत ने कहा कि राव को अपना पासपोर्ट एनआईए की अदालत में जमा कराना होगा और वह मामले के सह अभियुक्तों से किसी तरह का संपर्क स्थापित करने की कोशिश नहीं करेंगे। अदालत ने कहा कि राव को 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड जमा करने के साथ-साथ ही इतनी ही राशि के दो मुचलके देने होंगे।



उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय में एक फरवरी को वरवरा राव को चिकित्सा आधार पर जमानत देने की याचिका पर बहस पूरी हो गई थी और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह रिट याचिका उनकी पत्नी हेमलता ने दाखिल की थी, उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि उचित चिकित्सा सुविधा न देकर एवं कैद में रख वरवरा राव के मौलिक अधिकारों की अवहेलना हो रही है।

गौरतलब है कि यह मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा फैली। पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों का माओवादियों से संबंध है।

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