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Bombay High Court: 'अनाथ' शब्द की जगह नहीं होगा 'स्वनाथ' का प्रयोग, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कही ये बड़ी बात
Thu, 15 Sep 2022 07:37 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 15 Sep 2022 07:37 PM IST
सार
एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) स्वनाथ फाउंडेशन ने एक जनहित याचिका दाखिल कर ‘अनाथ’ शब्द को बदलकर ‘स्वनाथ’ करने की मांग की गयी थी। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अनाथ' शब्द को बदलकर 'स्वनाथ' करने की मांग की गई थी। याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने कहा कि 'अनाथ' शब्द के साथ कोई सामाजिक कलंक नहीं जुड़ा है और इसलिए इसे बदले जाने की कोई जरूरत नहीं है।
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दरअसल, एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) स्वनाथ फाउंडेशन ने एक जनहित याचिका दाखिल कर ‘अनाथ’ शब्द को बदलकर ‘स्वनाथ’ करने की मांग की गयी थी। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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स्वनाथ फाउंडेशन ने अपनी याचिका में दावा किया था कि अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चे पहले ही असुरक्षित स्थिति का सामना करते हैं ऐेसे में जब उन्हें ‘अनाथ’ कहना जरूरतमंद, मजबूर और वंचित बच्चे को प्रतिबिम्बित करता है। याचिका में कहा गया था कि ‘स्वनाथ’ शब्द का अर्थ आत्मनिर्भर और निश्चयी होगा।
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स्वनाथ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने कहा कि यह मामला इस तरह का नहीं है जहां अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। पीठ ने आगे कहा कि कभी-कभी हमें भी लक्ष्मण रेखा खींच कर हर मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि 'अनाथ' शब्द का प्रयोग आज से नहीं बल्कि युगों-युगों से हो रहा है।
इस दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि ‘अनाथ’ में क्या सामाजिक कलंक जैसा क्या है? इसका अंग्रेजी शब्द ऑर्फन है और हिन्दी, मराठी और बंगाली भाषाओं में इसका समानार्थी शब्द ‘अनाथ’ है। याचिकाकर्ता इस शब्द को बदलने के लिए कहने वाला कौन होता है? वह भाषा के बारे में क्या जानता है?
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील उदय वारुंजिकार ने कहा कि ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता का देहांत हो गया हो, का संदर्भ देते समय अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस पर पीठ ने 'अनाथ' शब्द को बदलने से इनकार करते हुए कहा कि हमें नहीं लगता कि इस शब्द का किसी सामाजिक कलंक से संबंध है।