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Bombay High Court: मुंबई में वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- जब इसके लिए नियम तो हम यह क्यों झेल रहे?
Mon, 18 Mar 2024 11:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 18 Mar 2024 11:03 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कानून और नियम हैं, लेकिन अब उनके कार्यान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कहा कि इन्हें अपनाने से शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक हो सकता है, लेकिन कुछ महीनों में यह दोबारा खराब या बदतर श्रेणी में पहुंच जाएगा।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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विस्तार
मुंबई में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के स्तर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा कि शहर की स्थिति आपातकालीन है। यहां प्रदूषण से निपटने के लिए ऐसे हालात नहीं बचे हैं जब हम उपराचारात्मक तरीके अपनाएं। अब यहां नियमों और कानूनों को कार्यान्वित करना होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने वायु प्रदूषण से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की।
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हाईकोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कानून और नियम हैं, लेकिन अब उनके कार्यान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कहा कि इन्हें अपनाने से शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक हो सकता है, लेकिन कुछ महीनों में यह दोबारा खराब या बदतर श्रेणी में पहुंच जाएगा। इन नियमों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी और मजबूत तंत्र होना चाहिए।
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अदालत ने इस संबंध में निर्देश देते हुए आगे कहा कि वायु प्रदूषण मानदंडों और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों और सार्वजनिक परियोजनाओं की लगातार निगरानी और निरीक्षण किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अब हमें दृष्टिकोण बदलना होगा। यह उपचारात्मक नहीं हो सकता, इसे निवारक बनाना होगा। हमारा दृष्टिकोण अब यह नहीं हो सकता कि आप प्यासे हैं इसलिए कुआं खोदें। अब ये आकस्मिक स्थितियां हैं। अदालत ने सवाल करते हुए कहा कि आखिर जब वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सब कुछ कागज पर मौजूद है। दिशानिर्देश-अधिनियम सबकुछ मौजूद हैं... फिर भी, हम यह सब क्यों झेल रहे हैं?
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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता बीरेंद्र सर्राफ ने पीठ को सूचित किया कि पहले के आदेशों के अनुसार सात सार्वजनिक परियोजना स्थलों पर निरीक्षण किया गया था। इसमें कुछ कमियां पाई गईं। हालांकि अब सब कुछ ठीक हो गया है। इन परियोजनाओं में उपनगरीय बांद्रा और खार में सड़क कंक्रीटीकरण, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बुलेट ट्रेन साइट, वर्सोवा-बांद्रा सीलिंक, मुंबई मेट्रो- III, मुंबई कोस्टल रोड और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक शामिल हैं।
इसके बाद पीठ ने एमपीसीबी को राज्य में उद्योगों का ऑडिट तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया। फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जून को तय की है।