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Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court asked How movie stars and politicians are buying and distributing Remedisvir

बॉम्बे हाईकोर्ट: फिल्म स्टार और राजनेता कैसे खरीदकर बांट रहे रेमडेसिविर

Fri, 14 May 2021 03:29 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 14 May 2021 03:29 AM IST
सार

  • उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

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Bombay High Court asked How movie stars and politicians are buying and distributing Remedisvir
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने दोनों सरकारों से इसका स्पष्टीकरण मांगा कि यदि रेमडेसिविर की सप्लाई में कमी है तो फिल्म स्टार और राजनेता इस एंटी वायरल दवा को कैसे खरीदकर जरूरतमंदों में बांट रहे हैं।

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रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल कोरोना वायरस महामारी के गंभीर मरीजों के इलाज में हो रहा है। कोरोना वायरस से जुड़े हालात को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को दोनों सरकारों से 19 मई तक जवाब देने के लिए कहा था, लेकिन अदालत की वेबसाइट पर इससे जुड़ा आदेश बृहस्पतिवार शाम को अपलोड किया गया।
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चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ से याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील राजेश ईनामदार ने अस्पतालों में रेमडेसिविर और टॉलीजुमाब जैसी अहम दवाओं की किल्लत की शिकायत की। उन्होंने कहा कि जब अस्पतालों में इनकी कमी है, तब कुछ सेलीब्रेटी और राजनेता सोशल मीडिया पर की जा रही अपीलों के जवाब में ये दवाएं आसानी से खरीदकर बांट रहे हैं।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि वह कोविड-19 मरीजों की मदद करने वालों की राह में नहीं आना चाहती, लेकिन कानून के अनुसार अपना निर्णय देगी। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट के आदेशों के हिसाब से राज्यों को रेमडेसिविर का आवंटन केवल केंद्र सरकार के जरिये हो सकता है। फिर यह निजी तौर पर किसी राजनेता या फिल्मी हस्ती के हाथों बंटने के लिए उपलब्ध हो सकता है।


पीठ ने कहा, हमारे हिसाब से यह इस दवा की एक निश्चित खेप की जमाखोरी का मामला है। हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना रोधक दवा के वितरण का ऐसा समानांतर तंत्र अत्यंत आवश्यकता वाले मरीजों के लिएगंभीर हानि का कारण बन सकता है। महाराष्ट्र और केंद्र सरकार को इस पर स्पष्टीकरण दाखिल करना चाहिए।

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