{"_id":"642c74babfc2bb2c69056184","slug":"bombay-hc-said-sexual-harassment-can-not-be-alleged-only-because-relationship-did-not-lead-to-marriage-2023-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bombay HC: महज इसलिए दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि संबंध शादी तक नहीं पहुंचा, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bombay HC: महज इसलिए दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि संबंध शादी तक नहीं पहुंचा, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
Wed, 05 Apr 2023 12:34 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 05 Apr 2023 12:34 AM IST
सार
अदालत ने कहा, जब दो वयस्क एक साथ आते हैं और उनमें रिश्ते बनते हैं, ऐसी स्थिति में किसी को महज इसलिए कृत्य (दुष्कर्म) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि किसी समय दोनों के संबंध ठीक नहीं चले या किसी कारण से यह शादी में परिणत नहीं हो सका।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट।
- फोटो : ANI
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि दो वयस्कों के बीच संबंध में खटास पैदा हो जाने या शादी में परिणत न होने मात्र से से उनमें से एक बाद में दुष्कर्म का आरोप नहीं लगा सकता।न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने 2016 में उपनगरीय वर्सोवा पुलिस स्टेशन में एक महिला द्वारा उसके खिलाफ दर्ज कराए गए दुष्कर्म के एक मामले से एक व्यक्ति को बरी करते हुए 29 मार्च को फैसला सुनाया था। इस मामले में फैसले की प्रति इस सप्ताह उपलब्ध हो पाई है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, जब दो वयस्क एक साथ आते हैं और उनमें रिश्ते बनते हैं, ऐसी स्थिति में किसी को महज इसलिए कृत्य (दुष्कर्म) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि किसी समय दोनों के संबंध ठीक नहीं चले या किसी कारण से यह शादी में परिणत नहीं हो सका। महिला (26) ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि वह सोशल मीडिया के जरिये उस व्यक्ति से मिली थी और उसने शादी का झूठा वादा करके उससे शारीरिक संबंध बनाए।
विज्ञापन
बाद में उस व्यक्ति ने बेगुनाही की दलील देते हुए मामले में आरोपमुक्त किए जाने के लिए अदालत का रुख किया। न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की अर्जी स्वीकार करते हुए इस बात का संज्ञान लिया कि दोनों आठ साल से संबंध में थे और रिश्ते की शुरुआत के वक्त महिला बालिग थी। वह भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से परिपक्व थी। इसलिए दोनों का रिश्ता सोच समझकर कायम हुआ।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि केवल इसलिए कि रिश्तों में खटास आ गयी थी, यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि हर मौके पर शारीरिक संबंध उनकी इच्छा के विरुद्ध बनाया गया था। फैसले में कहा गया कि शिकायतकर्ता के खुद के बयान के अनुसार, उसने न केवल शादी के लिए शारीरिक संबंध बनाने की सहमति दी, बल्कि इसलिए भी सहमति दी, क्योंकि वह (शिकायतकर्ता) उस व्यक्ति से प्यार करती थी।