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मुंबई: ‘गर्भ गिराने की इजाजत मांगने वाली किशोरी की पहचान उजागर करने के लिए मजबूर न करे पुलिस’, HC के निर्देश

Tue, 07 May 2024 06:34 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 07 May 2024 06:34 PM IST
सार

स्त्री रोग विशेषज्ञ ने अदालत में याचिका दायर करते हुए मांग की कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वे उन्हें16 साल की किशोरी की पहचान उजागर करने के लिए मजबूर न करे।

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Bombay HC asks police to disclose identity of minor seeking to terminate pregnancy
Court Room - फोटो : ANI

विस्तार

पालघर पुलिस स्त्री रोग विशेषज्ञ को उस नाबालिग की पहचान उजागर के लिए मजबूर न करे, जो 14 हफ्ते का गर्भ गिराने की इजाजत मांग रही है। यह निर्देश हैं बॉम्बे उच्च न्यायालय के। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने लड़की को गर्भपात प्रक्रिया से गुजरने की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई 26 जून को होगी। 

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याचिका में डॉक्टर ने कही यह बात
स्त्री रोग विशेषज्ञ ने अदालत में याचिका दायर करते हुए मांग की कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वे उन्हें16 साल की किशोरी की पहचान उजागर करने के लिए मजबूर न करे। किशोरी और उसकी मां ने गर्भावस्था समाप्त करने की मांग की थी। किशोरी ने कहा कि वह सहमति से रिश्ते में थी। नाबालिग होने के कारण डॉक्टर ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि वे अपना नाम या कोई अन्य पहचान उजागर नहीं करना चाहते। बावजूद इसके पुलिस पहचान जानने के लिए क्लिनिक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि डॉक्टर को लड़की और उसकी मां को शिकायत के लिए पुलिस थाने भेजना चाहिए था।

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20 हफ्ते के बाद गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी
बता दें, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून के तहत अगर गर्भावस्था को 20 हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया है तो गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी होती है। बच्चे और मां की जान के खतरे को देखते हुए कोर्ट मंजूरी देती है। 
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17 साल की नाबालिग को गर्भपात की इजाजत देने से कोर्ट का इनकार
पिछले साल, बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने 17 साल की नाबालिग लड़की को गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, किशोरी 24 सप्ताह की गर्भवती थी। कोर्ट ने कहा सुनवाई के दौरान कहा था कि दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने और लड़की को इसके बारे में पूरी जानकारी थी। 


डिविजन बेंच के जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस वाईजी खोबरागडे की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि लड़की इस महीने ही 18 साल की हो जाएगी और वह लड़के के साथ दिसंबर 2022 से ही रिश्ते में थी। पीठ ने कहा था कि पीड़ित लड़की और आरोपी लड़के ने कई बार शारीरिक संबंध बनाए। लड़की खुद प्रेग्नेंसी किट खरीदकर लाई और फरवरी में ही उसे गर्भधारण होने का पता चल गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता व्यस्क है और उसे पूरी जानकारी है। अगर याचिकाकर्ता को बच्चे को जन्म नहीं देना था तो वह पहले भी गर्भपात की इजाजत मांग सकती थी।

 

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