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Deadbodies in Ganga River: गंगा में बहते शव के मामले में एनजीटी ने यूपी-बिहार की सरकारों से जानकारी मांगी
Mon, 16 May 2022 10:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 16 May 2022 10:30 PM IST
सार
जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) को इस विषय पर तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट जमा करने को कहा।
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एनजीटी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों को निर्देश दिया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने से पहले से लेकर इस साल 31 मार्च तक दोनों राज्यों में गंगा नदी में बहते दिखे मानव शवों और नदी किनारे दफनाए शवों की संख्या के बारे में जानकारी दी जाए।
जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) को इस विषय पर तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट जमा करने को कहा। पीठ ने कहा, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में साल 2018 और 2019 में कोविड-19 की शुरुआत से पहले और 2020, 2021 में कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद तथा इस साल 31 मार्च तक गंगा नदी में कितने शव बहते देखे गए और कितने नदी किनारे दफनाए गए।
अधिकरण ने कहा, कितने मामलों में उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों ने शवों के दाह संस्कार या दफनाने के लिए वित्तीय सहायता दी? गंगा नदी में शवों को प्रवाहित करने या नदी के किनारे शवों को दफनाने से रोकने के लिए जन जागरूकता लाने व जन भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? एनजीटी पत्रकार संजय शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने कोरोना वायरस से प्रभावित मानव शवों के निस्तारण के लिए उचित प्रोटोकॉल के पालन का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
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जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) को इस विषय पर तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट जमा करने को कहा। पीठ ने कहा, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में साल 2018 और 2019 में कोविड-19 की शुरुआत से पहले और 2020, 2021 में कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद तथा इस साल 31 मार्च तक गंगा नदी में कितने शव बहते देखे गए और कितने नदी किनारे दफनाए गए।
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अधिकरण ने कहा, कितने मामलों में उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों ने शवों के दाह संस्कार या दफनाने के लिए वित्तीय सहायता दी? गंगा नदी में शवों को प्रवाहित करने या नदी के किनारे शवों को दफनाने से रोकने के लिए जन जागरूकता लाने व जन भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? एनजीटी पत्रकार संजय शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने कोरोना वायरस से प्रभावित मानव शवों के निस्तारण के लिए उचित प्रोटोकॉल के पालन का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
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