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श्रम सुधारों के खिलाफ पीएम के संसदीय क्षेत्र में BMS बनाएगा रणनीति
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 18 Apr 2016 07:55 AM IST
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संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) श्रम सुधारों को गति दे रहे भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ कड़े विरोध की रणनीति बना रहा है। अपने ही सरकारों के खिलाफ विरोध की व्यापक कार्ययोजना बनाने के लिए बीएमएस ने आगामी दो-तीन मई को पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अपने सभी प्रदेश महामंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई है।
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इसमें श्रम सुधारों के विरोध को लेकर केंद्र और भाजपा शासित उन राज्य सरकारों के खिलाफ विरोध की व्यापक कार्ययोजना बनेगी जो श्रम सुधारों को रफ्तार दे रहे हैं।
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दरअसल बीएमएस को यह कदम इसलिए उठाना पड़ रहा है कि सियासी विरोध को देखते हुए श्रम सुधारों पर केंद्र सरकार ने अपनी रफ्तार तो धीमी कर दी है। मगर पिछले दरवाजे से वह इसकी भरपाई में जुट गई है ताकि उद्योग जगत की नाराजगी दूर हो सके।
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बताया जा रहा है कि केंद्र के इशारे पर भाजपा शासित राज्यों ने अपने यहां श्रम सुधारों की रफ्तार बढ़ा दी है। राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश, हरियाणा और अब महाराष्ट्र ने अपने यहां श्रम कानूनों में भारी बदलाव किया है जो श्रमिकों के हित के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
भाजपा शासित सरकारों का यह प्रयास उसके अपने ही संगठन को रास नहीं आ रहा है। धड़ल्ले से एक के बाद एक पार्टी शासित राज्यों में हो रहे श्रम सुधार के कदम पर रोक लगाने के लिए बीएमएस ताल ठोक कर मैदान में उतर गया है। उसने पार्टी शासित राज्यों को अंतिम चेतावनी दी है। पीएमओ तक को बीएमएस ने अपनी मंशा जता दी है कि श्रम सुधार के कदम तुरंत रुकनेे चाहिए।
भाजपा शासित राज्यों के जरिए किए जा रहे श्रम सुधारों के कदम का कड़ा विरोध करते हुए बीएमएस के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश उपाध्याय ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे श्रम विरोधी कदमों को तुरंत बंद करें। नहीं तो उसे पार्टी शासित राज्यों के मंत्रियों का देश भर में बहिष्कार करने को मजबूर होना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव से मिले बीएमएस के अधिकारी
बीएमएस के शीर्ष अधिकारियों ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र से मुलाकात कर उन्हें अपनी मंशा से अवगत करा दिया है। मिश्र से मिले बीएमएस के अधिकारियों ने उनसे कहा है कि सरकार श्रम सुधारों को तुरंत बंद करे और वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में बनी मंत्री समूह की दस सूत्रीय रिपोर्ट को लागू करे।
बीते वर्ष 27 अगस्त को जेटली ने मजदूर संगठनों के सामने कहा था कि उनके दस सूत्रीय मांगों को प्रधानमंत्री जल्द मान लेंगे। लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद फिर से मजदूर संगठनों का सब्र टूटता दिख रहा है।