विधानसभा चुनावों में भाजपा बजाएगी राष्ट्रवाद की धुन
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भाजपा असम, केरल और पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवाद के मुद्दे को सर्वाधिक अहमियत देगी।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अध्यक्ष अमित शाह के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली भी राष्ट्रवाद पर कड़े तेवर अपनाते दिखे। बैठक में पेश राजनीतिक प्रस्ताव में भी राष्ट्रवाद पर जारी बहस को और आगे ले जाने का आह्वान किया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि हम अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश तोड़ने की बात मंजूर नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि बैठक के पहले दिन शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की आलोचना सहन नहीं की जाएगी। जबकि पार्टी अध्यक्ष शाह ने भी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की आलोचना करने वालों को सीधी चेतावनी दी थी।
तत्काल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आजमाएगी ये मुद्दा
बैठक में पार्टी के रुख से साफ हो गया है कि वह राष्ट्रवाद के मुद्दे को तत्काल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आजमाएगी। अगर प्रयोग सफल रहा तो इसका विस्तार अगले साल उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी होगा।
जेटली ने कहा कि भाजपा अभिव्यक्ति की आजादी की पक्षधर है। मगर इसके नाम पर देश तोड़ने की बात करना संविधान के खिलाफ है। पार्टी किसी भी सूरत में राष्ट्रवाद से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि संविधान असहमति की पूरी आजादी तो देता है, मगर इसके साथ देश के विनाश की आजादी नहीं देता। उन्होंने इस दौरान भारत माता की जय को बहस का मुद्दा मानने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे किसी को कोई कठिनाई नहीं है।
शनिवार को ईडन गार्डंन्स में लोगों ने खुद ही वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे लगाए। बैठक के अंतिम दिन पेश राजनीतिक प्रस्ताव में भी जेएनयू प्रकरण में सरकार और पार्टी की भूमिका का समर्थन किया गया है। प्रस्ताव में राष्ट्रवाद पर जारी बहस को और आगे ले जाने का आह्वान किया गया है।