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BJP: सूफी संवाद के जरिये मुसलमानों की नब्ज टटोलेगी भाजपा, यूपी में इस साल 20 जगहों पर होगा सम्मेलन

Thu, 23 Feb 2023 04:07 AM IST
वीरेंद्र शर्मा हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Thu, 23 Feb 2023 04:07 AM IST
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सार
पार्टी की नजर सूबे की 80 में से कम से कम 75 सीटें जीतने पर है। लोकसभा व विधानसभा के बीते दो-दो चुनाव में गैरजाटव दलितों को साधने में काफी हद तक कामयाब रही पार्टी इस बार पूरे दलित वर्ग को साधने की योजना बनाएगी। मुसलमानों को साधने के लिए पार्टी की योजना बहुस्तरीय है।
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BJP will feel the pulse of Muslims through Sufi dialogue conference will be held at 20 places in UP this year
सूफी सिंगर (फाइल) - फोटो : File Photo

विस्तार

उत्तर प्रदेश में साल 2014 का इतिहास दोहराने के लिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव में ‘मिशन 50 पर्सेंट प्लस’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। हरेक सीट पर 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल करने के लिए पार्टी की निगाहें मुसलमानों के एक वर्ग और बसपा के दलित वोट बैंक पर हैं। मुसलमानों की नब्ज टटोलने के लिए पार्टी ने पूरे सूबे में व्यापक स्तर पर सूफी संवाद महाभियान चलाने की योजना बनाई है।


पार्टी की नजर सूबे की 80 में से कम से कम 75 सीटें जीतने पर है। लोकसभा व विधानसभा के बीते दो-दो चुनाव में गैरजाटव दलितों को साधने में काफी हद तक कामयाब रही पार्टी इस बार पूरे दलित वर्ग को साधने की योजना बनाएगी। मुसलमानों को साधने के लिए पार्टी की योजना बहुस्तरीय है। उसकी निगाहें उन पसमांदा मुसलमानों पर हैं, जिन्हें मोदी-योगी सरकारों की योजनाओं का लाभ मिला है। पार्टी की निगाहें बोहरा, पसमांदा, मतुआ और सूफी मत वाले वर्ग पर हैं। खुद पीएम कई बार इन वर्गों के सम्मेलनों में शिरकत कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान उन्होंने बांग्लादेश से मतुआ समुदाय को संकेत दिया था। हाल ही में बोहरा मुसलमानों के मुंबई के कार्यक्रम में उन्होेंने शिरकत की थी। सूफी कार्यक्रमों में भी वह जाते रहते हैं। इसके अलावा उसकी योजना सूबे में कम से कम 20 सूफी संवाद सम्मेलन कराने की है। पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा देशभर के मुसलमानों से संपर्क साधने के लिए 10 मार्च से अभियान चलाने की घोषणा पहले ही कर चुका है।


कर्नाटक में होगा लिटमस टेस्ट 
सलमानों के एक वर्ग को साधने के लिए पार्टी पहला प्रयोग कर्नाटक में कर रही है। यहां अप्रैल में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। पार्टी यहां एक दर्जन सूफी संवाद सम्मेलन आयोजित करेगी। चुनाव नतीजे बताएंगे कि वह सम्मेलनों के जरिये मुसलमान बिरादरी की नब्ज सही अर्थों में टटोल पाई या नहीं।

लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश पर ही खास निगाह क्यों?
आगामी लोकसभा चुनाव को पार्टी 'होम ग्राउंड बैटल' मान रही है। इस बार उसके लिए विस्तार की संभावना वाला इकलौता राज्य तेलंगाना है। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के सियासी समीकरण बेहद उलझे हुए हैं। इसके अलावा प्रभाव वाले अन्य राज्यों में पार्टी के पास पहले से 80 से सौ फीसदी लोकसभा सीटें हैं। विपक्ष के बंटा होने और बसपा के बेहद कमजोर पड़ने से पार्टी को उत्तर प्रदेश में सीटों की संख्या बढ़ाने का अवसर दिख रहा है। रणनीतिकारों का मानना है कि बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लगे और मुसलमानों के एक वर्ग का साथ मिले तो पार्टी 55 फीसदी वोट हासिल करने का करिश्मा कर सकती है। पार्टी ने 2014 (42.63 फीसदी) के मुकाबले साल 2019 (49.98 प्रतिशत) के चुनाव में वोटों में सात फीसदी से अधिक बढ़ोत्तरी की थी।
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