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बदलेगी भाजपा और बदलेगा मोदी सरकार का रवैया
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Thu, 13 Dec 2018 08:25 PM IST
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को अर्जुन की तरह चिड़िया की एक आंख दिखाई पड़ती है। यह आंख 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में फिलहाल सफलता पर टिकी है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद दोनों शीर्ष नेता पार्टी को सत्ता में लाने के लिए आमूल-चूल तैयारियों में जुट गए हैं।
खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का मानना है कि सत्ता में होने पर ही मोह गार्ड भी सलाम करता है। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष की पहली कोशिश सभी नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, संगठनों में मतदाता सूची के पन्ने, बूथ, गांव, ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की एकता पर होगी।
इसी तरह से केंद्र में भी भाजपा तथा संघ के नेताओं, कार्यकर्ताओं की अहमियत बढ़ेगी। मोदी सरकार के एक पूर्व मंत्री का कहना है कि जो हवा के रुख को भांपकर नहीं बदलता, वह किनारे खड़ा रह जाता है। इसलिए यह अच्छी बात है कि पार्टी मंथन कर रही है। बदलाव के लिए तैयार है। सूत्र का कहना है कि बदलाव समय की मांग है और बदलना पड़ेगा। वहीं भाजपा के उम्रदराज वरिष्ठ नेता को बहुत कुछ बदल जाने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। फिर भी उनका कहना है कि जो भी नये बदलाव आएं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
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भाजपा ने बनाई योजना
बृहस्पतिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तीन बजे पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में सभी प्रदेशों के अध्यक्ष, संगठन मंत्री भी थे। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। हालांकि पार्टी के महासचिव भूपेन्द्र यादव ने इस बैठक में पांच राज्यों और खासकर तीन राज्यों में मिली पराजय पर चर्चा की बात से इनकार किया, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर भी चर्चा हुई है।
पार्टी को छत्तीसगढ़ में मिली बड़े पैमाने पर निराशा भाजपा को काफी परेशान कर रही है। भाजपा अपनी हार के कारणों में सबसे मुद्दा किसानों की नाराजगी और कांग्रेस के बिजली बिल हाफ, किसान का कर्जा माफ के वादे को मानकर चल रही है। ऐसे में समझा जा रहा है कि आने वाले समय में पार्टी किसान, युवा, युवाओं को रोजगार जैसे अवसर समेत अन्य मुद्दों पर सरकार की तस्वीर निखारने पर फोकस करेगी।
तैयारियों में जुटी भाजपा
2019 के लिए चुनावी तैयारियों में भाजपा ने अभी से जुटने के लिए रणनीति बना ली है। पार्टी 11-12 जनवरी को दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय इंडोर स्टेडियम में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करने जा रही है। इसमें देश के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, संगठनों को 2019 के चुनाव में सफलता पाने का बीज मंत्र दिया जाएगा।
15-16 दिसंबर को ही दिल्ली में युवा मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित है। 21-22 दिसंबर को अहमदाबाद में महिला मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। 19-20 जनवरी को पार्टी ने अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन होना है और 31 जनवीर से 1 फरवरी को पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा राष्ट्रीय सम्मेलन करके एजेंड़े को अंतिम रूप देगी। 2-3 फरवरी को भुवनेश्वर (उड़ीसा) में अनुसूचित जनजाति का राष्ट्रीय सम्मेलन होना है।
जबकि पिछड़ी जाति के लिए पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान चुना गया है। 15-16 फरवरी को होने वाले इस सम्मेलन में पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह खुद रहेंगे। 21-22 फरवरी 2019 को उत्तर प्रदेश में भाजपा किसान मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगी। इसका मकसद किसानों तक पार्टी की बात को जन-जन तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी की बैठक
संसद के शीतकालीन सत्र के क्रम में और पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में पार्टी के करीब-करीब सभी वरिष्ठ मंत्री और सांसद मौजूद थे। इसमें संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में पांच राज्यों के नतीजे का असर साफ तौर पर देखा गया। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार के स्तर चेक एंड बैलेंस को और प्रभावी बनाया सकता है।
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खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का मानना है कि सत्ता में होने पर ही मोह गार्ड भी सलाम करता है। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष की पहली कोशिश सभी नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, संगठनों में मतदाता सूची के पन्ने, बूथ, गांव, ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की एकता पर होगी।
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इसी तरह से केंद्र में भी भाजपा तथा संघ के नेताओं, कार्यकर्ताओं की अहमियत बढ़ेगी। मोदी सरकार के एक पूर्व मंत्री का कहना है कि जो हवा के रुख को भांपकर नहीं बदलता, वह किनारे खड़ा रह जाता है। इसलिए यह अच्छी बात है कि पार्टी मंथन कर रही है। बदलाव के लिए तैयार है। सूत्र का कहना है कि बदलाव समय की मांग है और बदलना पड़ेगा। वहीं भाजपा के उम्रदराज वरिष्ठ नेता को बहुत कुछ बदल जाने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। फिर भी उनका कहना है कि जो भी नये बदलाव आएं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
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भाजपा ने बनाई योजना
बृहस्पतिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तीन बजे पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में सभी प्रदेशों के अध्यक्ष, संगठन मंत्री भी थे। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। हालांकि पार्टी के महासचिव भूपेन्द्र यादव ने इस बैठक में पांच राज्यों और खासकर तीन राज्यों में मिली पराजय पर चर्चा की बात से इनकार किया, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर भी चर्चा हुई है।
पार्टी को छत्तीसगढ़ में मिली बड़े पैमाने पर निराशा भाजपा को काफी परेशान कर रही है। भाजपा अपनी हार के कारणों में सबसे मुद्दा किसानों की नाराजगी और कांग्रेस के बिजली बिल हाफ, किसान का कर्जा माफ के वादे को मानकर चल रही है। ऐसे में समझा जा रहा है कि आने वाले समय में पार्टी किसान, युवा, युवाओं को रोजगार जैसे अवसर समेत अन्य मुद्दों पर सरकार की तस्वीर निखारने पर फोकस करेगी।
तैयारियों में जुटी भाजपा
2019 के लिए चुनावी तैयारियों में भाजपा ने अभी से जुटने के लिए रणनीति बना ली है। पार्टी 11-12 जनवरी को दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय इंडोर स्टेडियम में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करने जा रही है। इसमें देश के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, संगठनों को 2019 के चुनाव में सफलता पाने का बीज मंत्र दिया जाएगा।
15-16 दिसंबर को ही दिल्ली में युवा मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित है। 21-22 दिसंबर को अहमदाबाद में महिला मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। 19-20 जनवरी को पार्टी ने अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन होना है और 31 जनवीर से 1 फरवरी को पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा राष्ट्रीय सम्मेलन करके एजेंड़े को अंतिम रूप देगी। 2-3 फरवरी को भुवनेश्वर (उड़ीसा) में अनुसूचित जनजाति का राष्ट्रीय सम्मेलन होना है।
जबकि पिछड़ी जाति के लिए पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान चुना गया है। 15-16 फरवरी को होने वाले इस सम्मेलन में पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह खुद रहेंगे। 21-22 फरवरी 2019 को उत्तर प्रदेश में भाजपा किसान मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगी। इसका मकसद किसानों तक पार्टी की बात को जन-जन तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी की बैठक
संसद के शीतकालीन सत्र के क्रम में और पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में पार्टी के करीब-करीब सभी वरिष्ठ मंत्री और सांसद मौजूद थे। इसमें संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में पांच राज्यों के नतीजे का असर साफ तौर पर देखा गया। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार के स्तर चेक एंड बैलेंस को और प्रभावी बनाया सकता है।