फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BJP vs Congress: Tears remained silent on change of leadership in Gujarat, there was uproar in Punjab know 5 basic difference in Bjp and congress

भाजपा बनाम कांग्रेस : गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन पर आंसू भी मौन रहे, पंजाब में हंगामा मच गया, पांच बिंदुओं में जानिए दोनों पार्टी के बीच का फर्क

Sat, 18 Sep 2021 04:48 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 18 Sep 2021 04:48 PM IST
विज्ञापन
सार
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद नए सियासी घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी बन गई है जो आत्मघाती कदम उठा रही है। एक मजबूत नेतृत्व नहीं होने के कारण कांग्रेस अपने घर से उठने वाले शोर को शांत नहीं करा पाती। जबकि भाजपा नेतृत्व पूरे ‘घर’ के बदल डालती है और नाराजगी बाहर नहीं आ पाती। क्या है भाजपा और कांग्रेस संगठन के बीच का बुनियादी फर्क....
loader
BJP vs Congress: Tears remained silent on change of leadership in Gujarat, there was uproar in Punjab know 5 basic difference in Bjp and congress
अमरिंदर सिंह - फोटो : social media

विस्तार

पंजाब में कांग्रेस की अच्छी-भली सरकार चल रही थी लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने एक बड़ा जोखिम लिया। इसका नतीजा इस रूप में सामने आया कि जिस राज्य में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव जीतने का प्रबल दावेदार मानी जा रही थी वहीं एक नेता के अड़िअल रवैए तो एक के बागी तेवर ने जीती हुई बाजी पलट दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस्तीफा देने से पहले पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपनी नाराजगी भी जता दी और वह खबर मीडिया में लीक भी हो गई। इस्तीफे के बाद अमरिंदर ने मीडिया से कहा मुझ पर सरकार नहीं चलाने का संदेह किया गया। मेरा अपमान हुआ है।


जबकि भारतीय जनता पार्टी ने पिछले कुछ महीनों में कई उत्तराखंड, असम, कर्नाटक और गुजरात में मुख्यमंत्रियों को बदल दिया। गुजरात में पूरी कैबिनेट बदल दी लेकिन किसी तरह का अंसतोष बाहर नहीं आया। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री इस्तीफा देकर बाहर आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अधयक्ष जे पी नड्डा का आभार जताया। अपनी कुर्सी गंवाने के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल की आंखों से आंसू भी निकल आए, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा।


वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह जब इस्तीफा देकर निकले तो खुलेआम सोनिया गांधी से नाराजगी दिखाई और पार्टी नेतृत्व को कोसा।  वहीं छत्तीसगढ़, राजस्थान और कांग्रेस में कुर्सी की मार मची हुई है और इन झगड़ों को लेकर पार्टी की किरकिरी होती रही है। इससे साफ है कि भाजपा में हर राज्य के मामले में केंद्रीय आलाकमान की भूमिका महत्वपूर्ण है और राज्य नेतृत्व पर भी उनकी पूरी धमक है। 

यही वजह है कि मध्यप्रदेश में अपनी सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस अब महज तीन राज्यों में सिमट चुकी है जबकि भाजपा 17 राज्यों में अपने दम पर या सहयोगी दलों (एनडीए) के साथ सरकारों में हैं। आखिर ऐसी कौन सी बात है जिससे भाजपा राज्यों और केंद्र में मजबूत होती जा रही है और कांग्रेस का कुनबा बिखरता जा रहा है।

इन पांच बिंदुओं में जानिए भाजपा और कांग्रेस संगठन के बीच का बुनियादी फर्क

1.भाजपा नेतृत्व का पार्टी पर पूरा कंट्रोल
भाजपा और कांग्रेस में बुनियादी फर्क में यही है कि भाजपा नेतृत्व का पूरा कंट्रोल अपनी पार्टी में है और नेतृत्व मजबूत है। जबकि कांग्रेस का कोई कंट्रोल न तो पार्टी पर है और न ही कार्यकर्ताओं पर। भाजपा में  हाईकमान का फैसला सर्वमान्य होता है और कोई उसके खिलाफ जाने की कोशिश नहीं करता। जबकि कांग्रेस छत्तीसगढ़, राजस्थान और अब पंजाब के संकट से जूझ रही है।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं यह दोनों पार्टी के बीच का सबसे बड़ा फर्क है कि एक पार्टी में नेतृत्व की बात पत्थर की लकीर है जबकि कांग्रेस में नेता उस लकीर को छोटा-बड़ा करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का नेतृत्व उलझन में रहता है। वह सोचने में बहुत वक्त लेता है। जबकि भाजपा नेतृत्व की बात इसलिए पार्टी में सर्वमान्य होता है कि भाजपा नेतृत्व में चुनाव को जीतने की कुव्वत है। 
 

भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा - फोटो : Twitter
राजनीति के जानकार बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में यह संस्कृति नहीं थी। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के जमाने में यही होता था कि कांग्रेस आलाकमान का पूरा कंट्रोल राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रदेश कांग्रेस पर होता था। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष रहने तक भी यही सिलसिला जारी रहा, लेकिन 2014 के चुनाव के बाद जब केंद्र में मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हारती चली गई तो कांग्रेस नेतृत्व का मुख्यमंत्रियों से लेकर राज्यों की गतिविधियों पर पकड़ ढीली पड़ती गई। पंजाब और हाल के छत्तीसगढ़ में हुए घटनाक्रम से इसे आसानी से समझा जा सकता है।
 
2. भाजपा के पास पूर्णकालिक अध्यक्ष, कांग्रेस नहीं ढूंढ पाई अध्यक्ष 
2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। उसके बाद से पार्टी अभी तक कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं ढूंढ पाई है। ढाई साल हो गए कांग्रेस अभी तक फुल टाइम लीडरशीप नहीं दे पाई है। पार्टी कई बार राहुल गांधी को मना चुकी है,  क्योंकि पार्टी के ज्यादातर नेता गांधी परिवार के हाथ में ही कमान रखना चाहते हैं। लेकिन अध्यक्ष पद का चुनाव बार-बार टलता रहा है। कोरोना महामारी को वजह बताकर सालभर में तीन बार चुनाव टाले जा चुके हैं। फिलहाल सोनिया ने कमान अपने हाथों में ली हुई है लेकिन वे स्वास्थ्य कारणों से पार्टी को ज्यादा समय नहीं पाती हैं। यह कांग्रेस की बड़ी कमजोरियों में एक है। यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व को उनकी ही पार्टी का समर्थन हासिल नहीं हो रहा। 

3-भाजपा में चुनाव जीताने वाला चेहरा मोदी, राहुल सर्वमान्य नहीं 
भाजपा लोकसभा ही नहीं बल्कि विधासभा का हर चुनाव भी नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ती है। मोदी पार्टी का एक ‘ब्रांड’ माने जाते हैं जिनके नाम पर भाजपा भर-भर कर वोट बटोर कर लाती है। नीरजा चौधरी कहती हैं भाजपा में प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी एक निर्विवाद पसंद हैं। कांग्रेस में ऐसा कोई चेहरा नहीं है। राहुल गांधी कुछ ही सहयोगी दलों की पसंद है और वे कई वजहों से अपनी पार्टी को चुनाव जीताने में सक्षम नहीं माने जाते हैं। 

2018 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस को मिली जीत का श्रेय राहुल गांधी को नहीं दिया जा सकता, यह जीत राज्य नेतृत्व के कारण मिली।  यही वजह है कि पार्टी को मिल रही लगातार हार के कारण कई नेता कांग्रेस छोड़कर पाला बदल चुके हैं। चौधरी कहती हैं कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व के लगातार कमजोर प्रदर्शन के चलते पार्टी के कार्यकर्ता दूसरे दलों में जगह तलाशने पहुंच रहे हैं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2021 के दौरान कुल 222 उम्मीदवार कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो चुके हैं। इस दौरान 177 सांसदों और विधायकों ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया।
 

राहुल गांधी
राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
भाजपा में कार्यकर्ता से अध्यक्ष बनाए जाते हैं लेकिन कांग्रेस में वंश परंपरा के अध्यक्ष हैं। 1998 से अभी तक केवल गांधी परिवार ही कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। वहीं भाजपा में अब तक 10 अध्यक्ष बन चुके हैं। 1998 से अब तक कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, जनाकृष्णमूर्ति, वैंकया नायडू, लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और अब 2020 से जे पी नड्डा अध्यक्ष हैं। 

4-एक चुनाव जीतते ही भाजपा दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, कांग्रेस टीम तक नहीं बना पाती
भाजपा की खासियत यही है कि वह एक चुनाव जीतते ही दूसरे चुनाव की तैयारी में लग जाती है। जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी पदाधिकारी तक नहीं तय कर पाती। गुजरात का ही उदाहरण लीजिए, गुजरात निकाय चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद से प्रदेश संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन पार्टी ने अभी तक इस पर कोई फैसला ही नहीं लिया। वहीं, गुजरात कांग्रेस प्रभारी एवं सांसद राजीव सातव के कोरोना से निधन के बाद न तो किसी और को कमान दी गई और कोई प्रभारी बनाया गया।

कांग्रेस पार्टी को गहराई से समझने वाले विश्लेषक और लेखक रशीद किदवई की राय में यह सारे फैसले लेना लीडरशीप पर निर्भर करता है। जब तक भाजपा चुनाव से पहले ही मतदाताओं पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर लेती है कांग्रेस राज्यों में संगठन भी दुरुस्त नहीं कर पाती। चुनाव जीतने के लिए मजबूत नेतृत्व के साथ मजबूत संगठन अनिवार्य शर्त है, मौजूदा हालात में कांग्रेस दोनों शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही है। कई बार कांग्रेस के पास चुनाव करीब आने तक कोई रणनीति ही नहीं होती।

5- भाजपा सख्त संदेश देती है, कांग्रेस रूठों को मना नहीं पाती
भाजपा को करीब से समझने वाले एक राजनीतिक पर्यवेक्षक बताते हैं कांग्रेस में जहां आलाकमान के प्रति वफादारी के आधार पर नेतृत्व परिवर्तन होते हैं, वहीं भाजपा चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाती है। आगामी चुनाव की जरूरतों और सत्ता विरोधी लहर को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन होता है। वह एक जगह नेतृत्व परिवर्तन करके दूसरे राज्यों को सख्त संदेश देती है।

गुजरात और कर्नाटक में हुआ नेतृत्व परिवर्तन इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है। लेकिन भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल का तमगा लिए फिर रहे कांग्रेस में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच चुकी है। राहुल गांधी के खिलाफ कांग्रेस के ही दिग्गज नेताओं ने जी-23 के रूप में मोर्चा खोला हुआ है। बार-बार छत्तीसगढ़, राज्स्थान और पंजाब में कुर्सी का झगड़ा राहुल दरबार में पहुंचता रहा है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed