{"_id":"5dc011108ebc3e93aa1945f1","slug":"bjp-shivsena-row-marathi-publication-compares-sanjay-raut-with-betal","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र गतिरोध: मराठी प्रकाशन ने शिवसेना नेता संजय राउत को बताया 'बेताल'","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
महाराष्ट्र गतिरोध: मराठी प्रकाशन ने शिवसेना नेता संजय राउत को बताया 'बेताल'
Mon, 04 Nov 2019 06:49 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,मुंबई
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,मुंबई
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 04 Nov 2019 06:49 PM IST
विज्ञापन
संजय राउत (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराष्ट्र में सरकार बनाने के गतिरोध के बीच आरएसएस की और झुके एक मराठी दैनिक अखबार ने शिवसेना विधायक दल के नेता संजय राउत की तुलना 'बेताल' से की है। बेताल राजा विक्रमादित्य से अपनी मजाकिया पहेलियों के लिए जाना जाता था।
विज्ञापन
आरएसएस से नजदीकी संबंध एवं भाजपा में राजनितिक पहुंच रखने वाले नागपुर के अखबार 'तरुण भारत' ने राउत पर बरसते हुए कहा,'महाराष्ट्र में सत्ता में आने के लिए वह भाजपा-शिवसेना गठबंधन की संभावनाओं पर चोट कर रहे हैं।'
विज्ञापन
राउत का नाम लिए बिना अखबार ने उन्हें 'जोकर' की संज्ञा दी और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भाजपा में अलग-थलग होने की तस्वीर पेश करने की उनकी कोशिश शुद्ध मनोरंजन के अलावा कुछ नहीं है।
विज्ञापन
शिवसेना से राज्यसभा सदस्य और उसके मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक राउत महाराष्ट्र की अगली सरकार में शक्तियों के समान वितरण और मुख्यमंत्री पद को साझा करने की अपनी पार्टी की मांग को उठाने में सबसे आगे रहे हैं।
संजय राउत ने भाजपा की टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ा। आर्थिक मंदी के दौरान बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म "शोले" के लोकप्रिय संवाद "इतना सन्नाटा क्यों है भाई ..." का उपयोग करते हुए, सवाल पूछकर उन्होंने कई मौकों पर भाजपा का मजाक उड़ाया।
तरुण भारत ने सोमवार को 'उद्धव और बेताल' शीर्षक से एक संपादकीय प्रकाशित किया। 'बेताल' शब्द का प्रयोग मराठी में भी किया जाता है, जहां इसका अर्थ बेकार की बातों में लिप्त व्यक्ति होता है।
तरुण भारत ने अपने संपादकीय में लिखा कि दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी से सत्ता हासिल करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। मगर यह बेताल उनके सपनों को चकनाचूर करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
महाभारत का जिक्र करते हुए संपादकीय में लिखा गया है कि शिवसेना नेता का पहला नाम 'संजय' भी महाकाव्य के एक पात्र का नाम था, जिसने पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध का सजीव व्याख्यान अंधे राजा धृतराष्ट्र के समक्ष किया था।
सम्पादकीय में व्यंग के साथ एक टिप्पणी की गई है कि संजय का काम मूलयवान इनपुट प्रदान करना है लेकिन वह खुद अंधी नजर लेकर घूम रहा है। इसलिए शिवसेना के भविष्य के बारे में चिंता करने की जरूरत है। चुटकी लेते हुए लिखा गया है कि शिवसेना को पता होना चाहिए कि पेड़ की उस शाखा को काटने वाला व्यक्ति जो उसी शाखा पर बैठा हो, वह 'शेख चिल्ली' होता है।
भाजपा इस बार चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आयी है और सरकार बनाने की पेशकश कर सकती है। उसे विश्वास मत प्राप्त करने के लिए दोनों सदनों के अगले सत्र तक का समय मिल जायेगा। आगे लिखा गया है कि महाराष्ट्र का जनादेश भाजपा-शिवसेना के गठबंधन 'महायुति' के लिए है। दोनों पार्टियों को मिली सीटों की संख्या के माध्यम से जनता ने यह बता दिया है कि दोनों पार्टियों में से बड़ा भाई कौन है।