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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बनाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, जनता के दरबार में होगा फैसला

Tue, 01 May 2018 10:35 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Tue, 01 May 2018 10:35 AM IST
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bjp president amit shah verses congress president rahul gandhi
अमित शाह और राहुल गांधी दो सबसे बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष हैं और इनका मुकदमा जनता की अदालत में चल रहा है। पिछले चार साल में दोनों की दलील में बड़ा फर्क आया है। आक्रामक राजनीति के धुर खिलाड़ी अमित शाह के आरोपों का पैनापन जहां घटा है, वहीं राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के कुछ समय पहले से लगातार हमलावर हैं। अमित शाह जहां राहुल गांधी को राहुल बाबा कहकर बुलाने की आदत से पीछे हटते दिख रहे हैं, वहीं राहुल गांधी के निशाने पर अमित शाह बमुश्किल आते हैं। राहुल के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार रहती है। 
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अमित शाह

भाजपा की कमान संभालने के बाद से अमित शाह काफी आक्रामक आरोप लगाते रहे हैं। कभी  इटली का चश्मा, कुछ लोगों की उम्र बढ़ जाती है, बुद्धि नहीं बढ़ती, पाइनएप्पल के जूस को नारियल के जूस का नाम देकर, आलू की फैक्ट्री लगाने का उदाहरण देकर राहुल गांधी को अव्यवहारिक, नासमझ राजनीतिज्ञ साबित करना और उन्हें वंशवाद में सबकुछ मिला है। भाजपा अध्यक्ष अपने इसी तरह के आरोपों से राहुल गांधी को घेरते रहे हैं। 
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इसका भाजपा को अच्छा फायदा भी हुआ। सबकुछ सोची समझी रणनीति के तहत राहुल गांधी पर पप्पू की संज्ञा को फिट करने जैसा। लेकिन अब अमित शाह के पास आरोप घट गए हैं। वह राहुल गांधी पर ओछे किस्म का आरोप नहीं लगा रहे हैं। राहुल बाबा के तकिया कलाम का भी कम इस्तेमाल कर रहे हैं। राहुल की बुद्धि और समझ पर कम सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी के इटली के चश्मे, नानी के घर जाने का आक्रमण भी घटा है।
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अब अमित शाह खास तौर पर दो आरोपों से राहुल गांधी पर खूब हमलावर रहते हैं। पहला वंशवाद, परिवारवाद या एक परिवार की पार्टी का है तो दूसरा राहुल गांधी से चार पीढियों का हिसाब मांगना। पहले भाजपा कांग्रेस पर 70 साल से देश को बर्बाद करने का आरोप लगा रही थी। लेकिन अब इसमें एक तकनीकी सुधार किया है। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगभग हर जनसभा में यह कहते हैं सुने जाते हैं कि राहुल बाबा आप हमसे (केन्द्र सरकार से) चार साल का हिसाब मांग रहे हो लेकिन देश की जनता आपसे चार पीढ़ियों का हिसाब मांग रही है। अमित शाह ने ताजा आरोप राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई जन आक्रोश रैली को परिवार आक्रोश रैली का नाम दिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष के आरोप में अमित शाह नदारद रहते हैं

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राहुल गांधी के आरोप में अमित शाह नदारद

कांग्रेस अध्यक्ष के आरोप में अमित शाह नदारद रहते हैं। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केन्द्र में रखकर आरोप लगाते हैं। राहुल गांधी के आरोपों की धार लगातार तेज हो रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रचार से उन्होंने इसे काफी आक्रामकता दे दी है। आरोपों का दायरा भी  लगातार बढ़ाता जा रहा है। राहुल गांधी अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसने की बजाय सीधे आरोप लगाने लगे हैं। वह केन्द्र की जनता द्वारा चुनी संवैधानिक सरकार पर अब खुलकर झूठ बोलने, जनता में भ्रम फैलाने, झूठा वादा करने  जैसा गंभीर आरोप लगाने लगे हैं।

जज लोया की मृत्यु का मामला हो या दलितों के अधिकार राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों को कठघरे में खड़ा करने से नहीं चूक रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी पर उनका भी हमला जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष अपने आरोपों में नई कड़ी हर बार जोड़ रहे हैं। सरकार के बजट भाषण की प्रतिक्रिया में काले को गोरा बनाने की टिप्पणी हो या फिर मोदी सरकार के लिए सूटबूट की सरकार का तंज। राहुल गांधी के कभी ये बड़े हथियार थे। वह केन्द्र की मोदी सरकार और भाजपा की नीति को समाज को बांटने, भाई चारा बिगाड़ने सांप्रदायिक  सौहार्द को बिगाड़ने जैसे आरोपों में घेरते रहे।

राहुल गांधी आज  भी अपने इस तरह के आरोपों पर टिके हुए हैं। वह केन्द्र सरकार पर भ्रष्टचार को बढ़ावा देने का खुला हमला बोल रहे हैं। नीरव मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या, जय शाह के बहाने केन्द्र सरकार को घेरते हैं। यहां तक कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी के तीखे आरोप पर केन्द्र सरकार को कई बार बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।  नई कड़ी जोड़ते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने अब इसमें जन सरोकारों से जुड़े मुद्दे को शामिल कर लिया है। राहुल गांधी पहले भी इस पर सरकार को घेरते थे, लेकिन इधर वह बेरोजगारी, मंहगाई, पिट्रोल डीजल के दाम, किसानों के मुद्दे पर कुछ ज्यादा आक्रामक हैं।

 

दोनों का दलित प्रेम

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मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। तब केन्द्र में यूपीए की सरकार थी। उ.प्र. में मायावती मुख्यमंत्री थी। उस दौर में राहुल गांधी का दलित प्रेम खासा चर्चा का केन्द्र बना था। किसी भी दलित के घर पहुंच जाना। उसके यहां भोजन करना, कुछ समय बिताना। संसद में कलावती पर बोलना। भट्ठा पारसोल में किसानों की जमीन पर बिल्डरों के प्रोजेक्ट को लेकर आंदोलन खड़ा कर देना और अपनी सरकार के खिलाफ अध्यादेश फाड़कर नाराजगी जताना। यह राहुल गांधी का एंग्री यंगमैन रूप था। किसानों की जमीन सरकार द्वारा अधिगृहीत होने पांच गुणा मुआवजा की आवाज उठाना।
राहुल गांधी के दलित प्रेम के सामानांतर अमित शाह भी ऐसा प्रेम रखते हैं। दलितों के घर जाते हैं। भोजन करते हैं। पार्टी के कमजोर वर्ग के कार्यकर्ताओं के घर पर भी जाते हैं और खाना खाते हैं।

पार्टी में दोनों का योगदान

अमित शाह कड़ी मेहनत करते हैं। होमवर्क उनकी सफलता का मुख्य आधार है। रेल मंत्री पीयुष गोयल भी अमित शाह की इस क्षमता की तारीफ करते नहीं थकते। प्रकाश जावड़ेकर के करीबियों का भी मानना है कि अमित शाह के पार्टी को लेकर सोचने का तरीका काफी अलग और हर बार नया होता है। वह अधिक व्यवहारिक होकर सोचते हैं। इतना ही नहीं हर राज्य विधानसभा चुनाव को नाक का सवाल बना लेते हैं। इसका नतीजा है कि देश के 19 राज्यों में भाजपा की सरकार है।


राहुल गांधी ने पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले एनएसयूआई और युवक कांग्रेस को संगठनात्मक तरीके से सुदृढ़ बनाया। पिछले दस साल से अधिक समय से कांग्रेस में युवा नेताओं का महत्व और उनकी जिम्मेदारी बढ़ाने में लगे हैं। संतुलित तरीके से कांग्रेस की परंपरागत राजनीतिक शैली के  अनुरुप लगातार संगठनात्मक मजबूती को धार दे रहे हैं। राहुल गांधी कभी भी कुछ अमित शाह की तरह चौंकाने वाला नहीं करते। वह लगातार होने वाले बदलाव में यकीन करते हैं।
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