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टिकट बंटवारे में नेताओं से बहुत पंगा लेने के मूड में नहीं हैं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

Thu, 14 Mar 2019 04:21 AM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Thu, 14 Mar 2019 04:21 AM IST
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BJP president Amit Shah is not get a lot of trouble in the ticket distribution
अमित शाह

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम पार्टी और अपने अंदरूनी संगठन से बहुत पंगा लेने के मूड में नहीं हैं। बड़े कद और चेहरे वाले नेताओं से तो कदापि नहीं। पार्टी के रणनीतिकारों में शामिल सूत्र ने संकेत करते हुए जानकारी दी लक्ष्य-2019 में सफलता पाने का है। बताते हैं भाजपा की संसदीय बोर्ड की बौठक का रुख भी काफी हद तक समझौतावादी था। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के सबसे ताकतवर फोरम के सदस्य मौजूद थे।

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सांसदों के टिकट कटेंगे, लेकिन कम

16 मार्च को पार्टी की पहली सूची आने के संकेत हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के प्रत्याशी भी होंगे। अमित शाह की पुरानी रणनीति है कि जिस संसदीय या विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति चुनाव जीतने की न हो, वहां चेहरा बदल दिया जाए। लेकिन बताते हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में यह रणनीति बहुत सफल नहीं रही। दूसरे पार्टी के नेता ही भितरघात को हवा दे देते हैं। इसलिए वर्तमान सांसदों के टिकट को लेकर भाजपा बहुत फूंक, फूंककर कदम रख रही है। 
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सूत्र बताते हैं कि 2019 के आम चुनाव में वर्तमान सांसदों के टिकट कटेंगे, लेकिन यह संख्या मीडिया में आ रही खबरों से कम होगी। सूत्र का कहना है कि उन्हीं सांसदों के टिकट कटने की संभावना है जहां स्थिति बहुत खराब है या हमारे पास मौजूदा सांसद से बहुत अच्छा चेहरा है अथवा हमारे मौजूदा सांसद ने क्षेत्र को बहुत ही कम समय दिया है। बताते हैं टिकट देने के लिए पार्टी ने काफी जमीनी काम किया है और उचित कारण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
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जूताबाज शरद त्रिपाठी का कट सकता है टिकट?

संतकबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट कटने के पूरे आसार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें त्रिपाठी का यह कृत्य रास नहीं आया। समझा जा रहा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसके पक्ष में है। जल्द ही इस पर निर्णय आने की उम्मीद की जा रही है। 13 मार्च 2019 को शरद त्रिपाठी केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा से भी मिले हैं। वह केंद्रीय नेतृत्व तक लगातार अपनी बात पहुंचाने में लगे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कार्रवाई केवल शरद त्रिपाठी पर ही नहीं होगी, बल्कि विधायक राकेश सिंह बघेल भी इसके घेरे में हैं। बताते हैं पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने दोनों को फटकार लगाई है।

75 के पार केवल बड़े चेहरे चलेंगे

2019 के आम चुनाव में भाजपा 75 साल की पार उम्र के मामले में बहुत संभलकर चल सकती है। संकेत यही हैं कि केवल पार्टी के बड़े चेहरे के मामले में उदारता बरती जा सकती है। जैसे लाल कृष्ण आडवाणी, डा. मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र समेत अन्य नेताओं के मामले में रियायत बरती जा सकती है। दरअसल भाजपा के सामने 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ा बहुमत लाने का लक्ष्य है। इसके साथ-साथ पार्टी को युवा बनाए रखने का भी है। ऐसे में कम उम्र के नेताओं को पार्टी की मुख्य धारा में बनाने के लिए यह निर्णय अहम है। इसी को ध्यान में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में अधिक से अधिक युवा चेहरे को जगह दी थी। इसी आधार पर मेरठ से राजेन्द्र अग्रवाल, भदोही से राष्ट्रीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह मस्त जैसे कई नेताओं के टिकट कटने के संकेत हैं।

जिताऊ उम्मीदवार पहली पसंद

पार्टी के रुख जिताऊ नेताओं की तरफ है। माना जा रहा है कि बृज भूषण शरण सिंह समेत तमाम नेताओं का टिकट सुरक्षित रहेगा। उत्तर प्रदेश से कुछ बाहुबली भी भाजपा में टिकट के लिए अवसर देख रहे हैं। इस बार पार्टी के पास 2014 जैसी मोदी लहर नहीं है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन, बिहार में महागठबंधन के जनाधार से निबटने की भी चुनौती है। ऐसे में जातियों का समीकरण भी काफी अहम होगा। 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कुछ मंत्री भी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। हालांकि इस मामले में भी भाजपा बहुत संभलकर चलने के पक्ष में है। इस तरह से उत्तर प्रदेश में 2014 के चुनाव में उतरे 78 प्रत्याशियों में से 25-28 के ही बदले जाने के संकेत हैं। करीब आधा दर्जन नेताओं का संसदीय क्षेत्र भी बदल सकता है। इसमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, संस्कृति मंत्री महेश शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी समेत अन्य हो सकते हैं।
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