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Hindi News ›   India News ›   BJP OBC Morcha national executive committee meeting in Kevadia Gujarat over Assembly Elections in Punjab UP Goa Manipur Uttarakhand

भाजपा की तैयारी: पांच राज्यों के चुनावों में कैसी होगी ओबीसी मोर्चे की भूमिका, गुजरात में बनेगी रणनीति

Fri, 03 Dec 2021 05:01 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 03 Dec 2021 05:01 PM IST
सार

अगले साल होने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए रणनीति बनाने पर भाजपा के ओबीसी मोर्चा की बैठक गुजरात के केवड़िया में हो रही है। यह बैठक तीन दिन चलेगी और इसमें दिसंबर 2022 में संभावित गुजरात विधानसभा को लेकर भी चर्चा की जाएगी।

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BJP OBC Morcha national executive committee meeting in Kevadia Gujarat over Assembly Elections in Punjab UP Goa Manipur Uttarakhand
भाजपा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में भूमिका और रणनीति पर मंथन करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति गुजरात के केवड़िया में तीन दिन दिवसीय बैठक की शुरुआत गुरुवार को हो गई। इस दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति बनाने के साथ ओबीसी मोर्चा 2022 के अंत में संभावित गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अपने कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श करेगा।

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ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण ने गांधीनगर में कहा कि हमारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक नर्मदा जिले के केवड़िया में तीन, चार और पांच दिसंबर को आयोजित होगी। आगामी चुनावों के लिए मोर्चा की भूमिका और रणनीति पर विस्तार से चर्चा करने के साथ इस दौरान एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ओबीसी मोर्चा पिछड़ी जातियों को भाजपा से जोड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आउटरीच कार्यक्रम भी चलाएगा।
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मोदी सरकार की योजनाओं पर जागरूकता के लिए कार्यक्रम
तेलंगाना भाजपा के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान अति गरीब और अति पिछड़े वर्ग के लिए मोदी सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने दावा किया, 'सपा (समाजवादी पार्टी), राजद (राष्ट्रीय जनता दल) जैसी पार्टियां और लेफ्ट समझते हैं कि वो पिछड़े वर्गों के ठेकेदार हैं। लेकिन, यह केंद्र की भाजपा सरकार थी जिसने केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए कुल 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया।'
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'सपा-राजद जैसे दल खुद को पिछड़े वर्ग का ठेकेदार समझते हैं'
लक्ष्मण ने कहा कि ऐसा आजादी के 75 साल बाद देश में पहली बार हुआ। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी को लगता है कि ओबीसी वर्ग के ऐसे लोग जो पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहतर हो चुके हैं और 'क्रीमी लेयर' में शामिल किए जाते हैं, उन्हें आरक्षण के लाभ नहीं दिए जाने चाहिए। हमारी सरकार मानती है कि आरक्षण का फायदा केवल उन लोगों को मिलना चाहिए जो गरीब हैं और पिछड़े हैं। इसका लाभ उन्हें ही मिलना चाहिए जिन्हें असल में इसकी आवश्यकता है।

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