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मजदूरों की वापसी, बैंकों की हेराफेरी ने बढ़ाई बीजेपी सांसदों की चिंता

Fri, 16 Dec 2016 01:16 AM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, दिल्ली
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 16 Dec 2016 01:16 AM IST
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BJP MPs frustated due to no cash boards in Banks and ATMs
- फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा

कभी नोटबंदी के फैसले से उत्साहित भाजपा सांसदों की चिंता अचानक से बढ़ गई है। चिंता का कारण बनी है बड़ी संख्या में मजदूरों का महानगरों से अपने घर की ओर पलायन, छंटनी और बैंकों की ओर से नई करेंसी की व्यापक पैमाने पर हो रही हेराफेरी। पार्टी सांसद छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में करेंसी की किल्लत नोटबंदी की घोषणा के एक महीने बाद भी दूर न होने से लोगों की नाराजगी झेल रहे हैं।

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निजी बातचीत में ये सांसद बताते हैं कि नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद उनके पास ज्यादातर लोग करेंसी की कमी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। सांसदों ने स्वीकार किया कि किल्लत दूर न होने और बड़ी संख्या में मजदूरों के महानगरों से वापस अपने घरों की ओर लौटने से नाराजगी बढ़ रही है।
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इन सांसदों में विभिन्न माध्यमों से अपनी चिंताओं से पार्टी नेतृत्व के साथ साथ सरकार को भी आगाह किया है। बुधवार को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांसदों की गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई बैठक में इसी मुद्दे पर सबसे अधिक चर्चा हुई है।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश के भोजपूरी भाषी क्षेत्र के एक सांसद ने कहा कि पहले हफ्ते तक तो सबकुछ ठीक ठाक था, मगर करेंसी की कमी दूर न होने से लोगों की नाराजगी बढ़ रही है। माहौल तब और खराब हुआ जब पंजाब सहित कई राज्यों में काम करने वाले मजदूर वापस अपने अपने घर लौट आए। इससे निराशा और नाराजगी का वातावरण तैयार हुआ है। उक्त सांसद ने बताया कि बुधवार की बैठक में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी है।

बैंकों में कम कैश आने से बढ़ रही नाराजगी

BJP MPs frustated due to no cash boards in Banks and ATMs

पूर्वी उत्तर प्रदेश के ही दूसरे सांसद का कहना था कि व्यापक पैमाने पर नई करेंसी की बैंकों द्वारा हेराफेरी की खबरों से नाराजगी बढ़ी है। गांव और छोटे शहरों के बैंकों में लगातार करेंसी नहीं आ रही। आती भी है तो इतनी सीमित मात्रा में कि बमुश्किल सौ लोगों का काम हो पाता है।

चूंकि गांव में एक बैंक से कई दर्जन गांव जुड़े होते हैं, ऐसे में इन्हें लगता है कि सारी करेंसी हेराफेरी करने वालों के पास जा रही है। जाहिर तौर पर इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। लघु और मझोले उद्योग के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले संसदीय क्षेत्र के सांसद का कहना था के करेंसी की किल्लत से इस क्षेत्र में व्यापक असर पड़ा है। छोटे उद्योगपति करेंसी उपलब्ध न होने के कारण मजदूरों को वापस भेज रहे हैं।

उक्त सांसद ने कहा कि उनके पास आए इन उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि प्रतिदिन मजदूरी हासिल करने वालों के पास बैंक खाते नहीं हैं। हफ्ते में महज 24 हजार रुपये की निकासी के कारण रोज मजदूरी देना संभव नहीं है। हकीकत यह है कि बैंक 24 हजार रुपये भी नहीं दे पा रहे। 

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