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केंद्र और राज्य संगठन का चेहरा तय करने में अगड़ा-पिछड़ा में उलझी भाजपा

Tue, 04 Jun 2019 05:12 AM IST
Avdhesh Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 04 Jun 2019 05:12 AM IST
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BJP in front of backwardness in deciding the face of state organization and central
राजनाथ सिंह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह - फोटो : एएनआई
केंद्रीय और राज्य संगठनों में अगड़ा को चेहरा बनाया जाए या पिछड़ा को? लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद भाजपा में इसको लेकर गहन मंथन हो रहा है। नतीजे ने खासतौर से पिछड़ों की जाति विशेष की राजनीति करने वाले कई दलों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में पार्टी में इस बात पर मंथन हो रहा है कि क्या पिछड़ा दांव के सहारे क्षेत्रीय दलों के मूल आधार में सेंध लगाया जा सकता है?
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आम चुनाव में बिहार में लालू यादव की पार्टी राजद खाता नहीं खोल पाई तो यूपी में बसपा से गठबंधन कर सपा अपनी सेहत नहीं सुधार पाई। नतीजे के बाद राजद में जबरदस्त अंतर्विरोध की स्थिति है। सोमवार को बसपा ने सपा से किनारा करने का साफ संदेश दे दिया। महाराष्ट्र में भी चुनाव नतीजे ने एनसीपी के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे में भाजपा में इस बात पर मंथन हो रहा है कि क्या पिछड़ी जाति के नेता को चेहरा बनाकर इस स्थिति का लाभ उठाया जा सकता है। 
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अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का नाम सबसे आगे है। महासचिव भूपेंद्र यादव अब भी रेस में बने हुए हैं। पार्टी में अब तक ओबीसी से कोई अध्यक्ष नहीं बना है। राज्य संगठन की तरह केंद्रीय संगठन में शीर्ष पद को लेकर उसी तरह की उलझन है। पार्टी इसी हफ्ते कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा कर देगी।
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यूपी में मनोज सिन्हा आगे

जहां तक यूपी का सवाल है तो महेंद्र नाथ पांडे के मंत्री बनने के बाद नए अध्यक्ष पर प्रारंभिक चर्चा हुई है। रेस में पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा आगे हैं। अगर पिछड़ा वर्ग से अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी तो स्वतंत्र देव सिंह सहित कुछ दूसरे नाम सामने आ सकते हैं।

बिहार का जातीय समीकरण

प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बन गए हैं। पार्टी ने यादव बिरादरी के नित्यानंद को अध्यक्ष बनाकर राज्य में पिछड़ा दांव खेलने का प्रयोग किया था। पार्टी अगर अगड़ा दांव खेलती है कि तो राधामोहन सिंह या राजीव प्रताप रूड़ी प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं। दूसरी स्थिति में संगठन की कमान राजद प्रमुख लालू यादव के करीबी रहे रामकृपाल यादव को दी जा सकती है।

महाराष्ट्र में मराठा को तरजीह

पार्टी यहां मराठा को तरजीह देती रही है। इस हिसाब से राव साहब दानवे पाटिल की जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के करीबी पीडब्ल्यूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल या शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े की लॉटरी लग सकती है। इसके उलट स्थिति में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, सुधरी मुघंटीवार को जगह मिल सकती है।

राजस्थान में राठौर बन सकते हैं अध्यक्ष

लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में अध्यक्ष पद के लिए गजेंद्र सिंह शेखावत पार्टी नेतृत्व की पहली पसंद थे। तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के विरोध के कारण उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जा सका। गजेंद्र के मंत्री बनने के बाद राज्यवर्धन सिंह राठौर का अध्यक्ष बनाया जाना तय माना जा रहा है। राठौर पीएम और शाह दोनों की पसंद हैं। 
 
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