गैरहाजिर रहने वाले सांसदों को भाजपा ने संसदीय समितियों से किया बाहर
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भाजपा ने अपने 12 सांसदों को संसदीय समितियों की बैठक में गैरहाजिर रहने का दंड दिया है। संसदीय समितियों की बैठक से गैरहाजिर रहने वाले सांसदों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। पार्टी ने उन्हें अहम समितियों से बाहर कर दिया है।
संसद की तीन अहम समितियों से जिन 12 सांसदों को हटाया गया है। उसमें विनोद खन्ना, दर्शना जरदोह, संजय जायसवाल, कीर्ति आज़ाद, ओम बिड़ला और गणेश सिंह को एस्टिमेट समिति से हटाया गया है। एसएस अहलूवालिया, दुष्यंत सिंह और रमेश पोखरियाल निशंक को लोक लेखा समिति से हटाया गया है।
जबकि वरुण गांधी, नंद कुमार सिंह चौहान और पंकज चौधरी को कमेटी ऑन पब्लिक अंडरटेकिंग से हटाया गया है। हालांकि इन तमाम सांसदों ने समिति की बैठक में शामिल न होने के लिए पार्टी कार्यक्रमों और चुनाव को बहाना बनाया है।
सांसदों ने वेंकैया की हिदायत को भी अनसुना किया
सबसे ज्यादा मार एस्टिीमेट कमेटी पर पड़ी है। इसमें से छह सदस्यों को हटाया गया है। सांसदों की दलील है कि इन समितियों में मानसून और शीत सत्र के बीच गैरहाजिरी की बात कही गई है। यह वही समय है जब सांसद बिहार और तमाम स्थानीय निकाय के चुनावों में व्यस्त रहे।
हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से सांसदों को शुरू से ही संसद में उपस्थित रहने की नसीहत के साथ-साथ संसदीय कार्य में रुचि दिखाने का आग्रह किया जाता रहा है। संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू बीजेपी सांसदों को बार-बार इस बारे में हिदायत देते रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के तमाम नेता समय-समय पर अपने सांसदों को वक्त की पाबंदी की नसीहत देते रहे हैं। इससे पहले संसदीय दल की बैठक में देर से आने पर भी सांसदों को टोका जा चुका है। पार्टी ने यह कार्रवाई कड़ा संदेश देने के प्रयास में की है।