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भाजपा यूपी मिशन 2022 : जाति आधारित छोटे दलों से गठबंधन करेगी, सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी पार्टी
Mon, 14 Jun 2021 03:14 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 14 Jun 2021 03:14 AM IST
सार
- यूपी में सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी भाजपा
- 2017 और 2019 के चुनाव की तरह जाति आधारित छोटे दलों से गठबंधन करेगी पार्टी
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने फिर से सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने 2017 विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में विभिन्न जाति आधारित छोटे दलों के साथ गठबंधन कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। पार्टी उसी सफलता को फिर से दोहराना चाहती है।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के नेताओं से मुलाकात तथा कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल कराना सत्तारूढ़ दल का अपना आंकड़ा फिट करने की कोशिश माना जा रहा है। अपना दल (एस) और निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी रही हैं लेकिन सरकार में शामिल नहीं किए जाने को लेकर नाराज चल रही हैं।
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वहीं प्रसाद प्रदेश के ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उनका परिवार तीन पीढ़ियों से कांग्रेस में था। भाजपा का मानना है कि युवा नेता के पार्टी में आने से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार से नाराज ब्राह्मण समुदाय को साधने में मदद मिलेगी।
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पटेल ने नहीं खोले पत्ते
अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने शाह से अपनी मुलाकात को लेकर कुछ नहीं कहा है। वह पहली मोदी सरकार में मंत्री थीं लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी की कांग्रेस के साथ कथित बातचीत के चलते कुर्मी नेता को दूसरी मोदी सरकार में जगह नहीं मिली। हालांकि उनकी पार्टी ने भाजपा के साथ ही मिलकर चुनाव लड़ा था। कहा जा रहा है कि मोदी कैबिनेट में होने वाले फेरबदल में उन्हें जगह मिल सकती है।
निषाद पार्टी सरकार में चाहती है प्रतिनिधित्व
वहीं निषाद पार्टी के संजय निषाद ने साफ किया कि उनकी पार्टी वंचित तबकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार में प्रतिनिधित्व चाहती है। उन्होंने विभिन्न समुदायों से संबंधित मुद्दों के समाधान की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि राजनीतिक शक्ति भगवान की शक्ति से ज्यादा मजबूत होती है।
उन्होंने निषाद समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग की जगह अनुसूचित जाति के तहत लाभ दिए जाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि उनके समुदाय ने विगत में बसपा, सपा और कांग्रेस जैसे दलों का समर्थन किया लेकिन अपनी समस्याओं का समाधान न होने पर समुदाय ने इन दलों को वोट देना बंद कर दिया।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने का जिक्र कर कहा कि हमें लगता है कि मोदी सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर व्यस्त रही लेकिन अब हमें लगता है कि हमारी चिंताओं का समाधान होगा।
सपा के टिकट पर संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद की योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से जीत ने भाजपा को चौंका दिया था। इसके बाद उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने पाले में लाने की कोशिश की थी।
सुहेलदेव को फिर साथ लाने की कोशिश
भाजपा अपनी पूर्व सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी फिर से अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है लेकिन इसके नेता ओमप्रकाश राजभर ने ऐसी संभावना को खारिज किया है। भाजपा सूत्रों ने कहा कि उनकी पार्टी ने विभिन्न समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए काम किया है और वह छोटे दलों के साथ गठबंधन करने के विरोध में कभी नहीं रही है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि हमने यह विभिन्न राज्यों में किया है, चाहे यह बिहार, असम हो या उत्तर प्रदेश।
योगी सरकार के कोरोना के हालात से निपटने पर उठे सवाल
प्रदेश भाजपा के कुछ नेता योगी सरकार के कोविड-19 संकट से निपटने को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और उनमें से कई अपनी चिंता जताने के लिए पत्र लिखते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक और शासनात्मक चुनौतियों के समाधान के लिए कदम उठाए हैं। ऐसी अटकलें भी हैं कि योगी प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ शाह की बैठकों को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
अगले साल पांच राज्यों में हैं चुनाव
अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से पंजाब को छोड़कर अन्य चार राज्यों में भाजपा की सरकार है। ऐसे में इन चुनावों में उसका बहुत कुछ दांव पर लगा है। हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असम, पुडुचेरी को छोड़कर पार्टी अन्य राज्यों में सत्ता से महरूम रही। यहां तक केरल में उसका खाता तक नहीं खुला और पश्चिम बंगाल में भी उसे ममता से करारी हार झेलनी पड़ी।
योगी सरकार के कोरोना के हालात से निपटने पर उठे सवाल
प्रदेश भाजपा के कुछ नेता योगी सरकार के कोविड-19 संकट से निपटने को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और उनमें से कई अपनी चिंता जताने के लिए पत्र लिखते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक और शासनात्मक चुनौतियों के समाधान के लिए कदम उठाए हैं। ऐसी अटकलें भी हैं कि योगी प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ शाह की बैठकों को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
अगले साल पांच राज्यों में हैं चुनाव
अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से पंजाब को छोड़कर अन्य चार राज्यों में भाजपा की सरकार है। ऐसे में इन चुनावों में उसका बहुत कुछ दांव पर लगा है। हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असम, पुडुचेरी को छोड़कर पार्टी अन्य राज्यों में सत्ता से महरूम रही। यहां तक केरल में उसका खाता तक नहीं खुला और पश्चिम बंगाल में भी उसे ममता से करारी हार झेलनी पड़ी।