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Haryana: किरण की एंट्री से BJP हुई पूरी 'लाल', क्या हरियाणा में जाटों को साधने की चुनौती से निपट पाएगी पार्टी?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 19 Jun 2024 06:19 PM IST
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सार
Haryana: राजनीतिक जानकारों के मुताबिक भाजपा ने किरण को शामिल कर विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में एक माहौल बनाने की कोशिश की है। अब तीनों लाल परिवारों की भाजपा में एंट्री हो चुकी है। किरण चौधरी का भाजपा में प्रवेश के संकेत लोकसभा चुनाव के दौरान ही मिल गए थे।
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BJP becomes completely red with Kiran's entry, will party be able meet challenge appeasing Jats in Haryana?
किरण चौधरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

हरियाणा की राजनीति में किरण चौधरी के भाजपा में शामिल होने के बाद अब 'भाजपा' संपूर्ण 'लाल' हो गई है। यानी प्रदेश की सियासत में तीन लाल, चौ. देवीलाल, चौ. बंसीलाल और चौ. भजनलाल के परिवार से अब कोई न कोई सदस्य भाजपाई हो चुका है। हालांकि जब मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तो यह बात कही जाने लगी कि प्रदेश की सियासत में अब चौथे 'लाल' की एंट्री हो गई है। प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है, किरण चौधरी ने 'कमल' थाम लिया है, तो क्या इससे भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव में 'जाट' वोटरों को साधने की चुनौती कम हो जाएगी। इससे पहले चौ. बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह, भाजपा में दस साल रहने के बाद लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में वापसी कर गए थे। भाजपा को इन दोनों नेताओं से कुछ फायदा नहीं हुआ था। अब देखने वाली बात यह है कि तीन चार माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में क्या 'किरण चौधरी', भाजपा और जाटों की दूरी को घटाने में कामयाब हो सकेंगी या नहीं।



किरण बोली, मैं एक वफादार और दृढ़ सदस्य
बुधवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधू और कांग्रेस की विधायक किरण चौधरी ने भाजपा ज्वाइन कर ली है। किरण के साथ उनकी बेटी एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी भी भाजपा में शामिल हो गई हैं। इन नेताओं की जॉइनिंग के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई नेता मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा, मैं किरण चौधरी का भाजपा में स्वागत करता हूं। इनका शरीर कांग्रेस में रहा है, लेकिन मन भाजपा में रहा। इन्हें भाजपा में पूरा सम्मान मिलेगा। दूसरी तरफ किरण चौधरी ने अपने त्यागपत्र में लिखा था, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं। मैं पिछले चार दशकों से कांग्रेस पार्टी की एक वफादार और दृढ़ सदस्य रही हूं। इन्हीं वर्षों में मैंने अपना जीवन, पार्टी और उन लोगों के लिए समर्पित कर दिया है, जिनका मैं प्रतिनिधित्व करती हूं।




हर क्षेत्र तक अपनी बराबर पहुंच नहीं बना सकें
प्रदेश की राजनीति को करीब से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र कुमार सैनी बताते हैं, किरण चौधरी के जरिए भाजपा का प्रयास है कि नाराज जाट समुदाय को अपने पक्ष में किया जाए। हालांकि ये काम आसान नहीं है। मौजूदा समय में 'अतीत' वाले नेता नहीं हैं, जिनका प्रभाव समस्त हरियाणा में रहता था। चौ. देवीलाल, चौ. बंसीलाल और चौ. भजनलाल, मौजूदा समय में किसी नेता के लिए इनके सियासी कद तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। भले ही भूपेंद्र हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर, दस-दस वर्ष तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन वे हर क्षेत्र तक अपनी बराबर पहुंच नहीं बना सकें। भूपेंद्र हुड्डा ही ऐसे नेता हैं, जिनकी अधिकांश क्षेत्रों में पहुंच है। चौ. बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी, भिवानी के आसपास ही सिमटी हैं। चौ. भजनलाल परिवार भी आदमपुर व हिसार में थोड़ा बहुत प्रभाव रखता है। इसी तरह चौ. देवीलाल परिवार भी सिरसा में ही ज्यादा सक्रिय रहता है।

जाटों में एक संदेश देने की कोशिश की है
इस वक्त प्रदेश के सभी 'लाल' परिवारों से कोई न कोई सदस्य, भाजपा में आ चुका है। चौ. भजनलाल परिवार से कुलदीप बिश्नोई और चौ. देवीलाल परिवार से रणजीत चौटाला, भाजपा में हैं। अब किरण चौधरी की भाजपा में एंट्री हो गई है। कुछ लोग, किरण की एंट्री को चौ. बीरेंद्र सिंह की रिप्लेसमेंट मान रहे हैं। चौ. बीरेंद्र सिंह, भाजपा में एक बड़ा चेहरा थे, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले वे कांग्रेस में वापसी कर गए थे। भाजपा ने किरण को शामिल कर जाटों में एक संदेश देने की कोशिश की है कि वह इस समुदाय को साथ लेकर चलना चाहती है। लोकसभा चुनाव में दस में से पांच सीटें हारने के बाद भाजपा नेतृत्व के विश्लेषण में यह बात सामने आई थी कि पार्टी को जाट और एससी समुदाय से जुड़े वोटरों का समर्थन नहीं मिल सका। अब भाजपा ने जाट व एससी वोटरों पर फोकस किया है। किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के आंदोलन में भाजपा के प्रति नाराजगी दूर करने के लिए, चौ. बीरेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी। सूत्रों का कहना है कि ये दोनों ही टॉस्क, बीरेंद्र सिंह पूरा नहीं कर सके थे।

जाट नेताओं को खूब मान सम्मान मिलता रहा
बतौर रविंद्र कुमार, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं को खूब मान सम्मान मिलता रहा है। चौ. रणजीत चौटाला, निर्दलीय विधायक थे, इसके बाद भी उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की टिकट दी गई। चौ. बीरेंद्र सिंह, 2014 में जब भाजपा में शामिल हुए, तो उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया। बाद में उनके बेटे को हिसार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया गया। उन्होंने जीत भी दर्ज कराई। अब ऐसे  कयास लगाए जा रहे हैं कि किरण चौधरी या श्रुति चौधरी में से किसी एक को राज्यसभा में भेजा जा सकता है। इनमें से किसी एक को विधानसभा की टिकट दी जा सकती है। इस परिवार के सदस्य को केंद्र में मंत्री पद भी देने की बात चल रही है।  

प्रदेश में एक माहौल बनाने की कोशिश की
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा ने किरण को शामिल कर विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में एक माहौल बनाने की कोशिश की है। अब तीनों लाल परिवारों की भाजपा में एंट्री हो चुकी है। किरण चौधरी का भाजपा में प्रवेश, इस बात के संकेत लोकसभा चुनाव के दौरान लग गए थे। भिवानी सीट से श्रुति चौधरी को टिकट नहीं मिला। उसके बाद जब पीएम मोदी ने वहां चुनावी रैली की, तो उन्होंने चौ. बंसीलाल की तारीफ की थी। भाजपा, जाटों को लुभाने का प्रयास कर रही है। इससे पहले जाट समुदाय के नेता सुभाष बराला को राज्यसभा में भेजा गया था। भाजपा में किरण की एंट्री का असर, भले ही पूरे प्रदेश में न दिखाई पड़े, लेकिन भिवानी लोकसभा क्षेत्र में आज भी उनका प्रभाव माना जाता है। भूपेंद्र हुड्डा के गढ़ कहे जाने वाले रोहतक, सोनीपत और झज्जर में किरण का प्रभाव नहीं रहा है।

कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बढ़ेगा ही
ऐसा संभव है कि विधानसभा चुनाव की दहलीज पर कई दूसरे बड़े नेता भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इनमें करनाल से जुड़े एक बड़े नेता का नाम भी चल रहा है। फरीदाबाद के एक नेता भी कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। भाजपा का प्रयास है कि भूपेंद्र हुड्डा खेमे के नाराज नेताओं को अपने खेमे में शामिल किया जाए। इन नेताओं की ज्वाइनिंग से भले ही जाट समुदाय पर कोई असर पड़े या न पड़े, लेकिन भाजपा के कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बढ़ेगा ही। जब बीरेंद्र सिंह, भाजपा में आए थे तो उनके साथ जाट वोट बैंक नहीं आया था। उसके जरिए भाजपा ने जाटों में एक संदेश देने का प्रयास किया था कि वह सभी जातियों की पार्टी है। सभी जातियों के नेताओं को भाजपा में पूरा मान सम्मान मिलता है।

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