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जन्मदिन विशेषः पंजाब की राजनीति में सिद्धू बन गए बड़े खिलाड़ी?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 20 Oct 2016 07:18 AM IST
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नवजोत सिंह सिद्धू
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क्रिकेटर से कॉमेडियन और राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू का आज जन्मदिन है। आगामी पंजाब चुनाव को देखते हुए सिद्धू की चर्चा और भी तेज हो गई है। बीजेपी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सभी को चौंका देने वाले सिद्धू एक मझे हुए राजनेता की तरह अपनी चुनावी चाल चलने की कोशिश में हैं। आवाज-ए-पंजाब नाम से राजनीतिक फ्रंट बनाकर पंजाब विधानसभा के लिए चुनावी अभियान शुरू कर चुके सिद्धू की सूबे में राजनीतिक हैसियत क्या है? इसका जवाब आसान तो नहीं है। लेकिन जिस तरह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी व राज्य के अन्य दलों ने उन्हें अपने पाले में लाने की जी तोड़ कोशिश कोशिश की, उससे साफ है सिद्धू इन दिनों पंजाब की राजनीति का अहम किरदार हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर हम बता रहे हैं कि पंजाब में राजनीति में क्या है सिद्धू की अहमियत...
पंजाब में नवजोत सिद्धू होना
क्रिकेट के मैदान से नाम कमाकर, फिर टीवी से सहारे देश में पहचान बनाकर और अपने दमदार जुमलों का राजनितिक मंचों पर इस्तेमाल कर सिद्धू एक मजबूत राजनीतिक शख्सियत बने हैं। सिद्धू की छवि एक स्टार नेता की है जो अपनी राजनीतिक वाकटुपता से मंचों पर किसी को भी धराशायी करने का माद्दा रखता है। चुनावी रैलियों में भीड़ जमा करने में सिद्धू को कोई मुश्किल नहीं होती, बस यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी है। आधुनिक जमाने की भाषा हो, अंग्रेजी के कोट हों या हिंदी और पंजाबी के ठेट जुमले, इन्हें सिद्धू को अपनी जुबान पर लाने में जरा भी देर नहीं लगती। लिहाजा युवा जनसमूह हो या ठेठ देसी जमावड़ा सिद्धू आसानी से लोगों तक अपनी बात कह जाते हैं। सूट-बूट पहनने वाले सिद्धू जाट सिख है और जो पंजाब के चुनावी समीकरण में आसानी से फिट हो जाते हैं।
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पंजाब में नवजोत सिद्धू होना
क्रिकेट के मैदान से नाम कमाकर, फिर टीवी से सहारे देश में पहचान बनाकर और अपने दमदार जुमलों का राजनितिक मंचों पर इस्तेमाल कर सिद्धू एक मजबूत राजनीतिक शख्सियत बने हैं। सिद्धू की छवि एक स्टार नेता की है जो अपनी राजनीतिक वाकटुपता से मंचों पर किसी को भी धराशायी करने का माद्दा रखता है। चुनावी रैलियों में भीड़ जमा करने में सिद्धू को कोई मुश्किल नहीं होती, बस यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी है। आधुनिक जमाने की भाषा हो, अंग्रेजी के कोट हों या हिंदी और पंजाबी के ठेट जुमले, इन्हें सिद्धू को अपनी जुबान पर लाने में जरा भी देर नहीं लगती। लिहाजा युवा जनसमूह हो या ठेठ देसी जमावड़ा सिद्धू आसानी से लोगों तक अपनी बात कह जाते हैं। सूट-बूट पहनने वाले सिद्धू जाट सिख है और जो पंजाब के चुनावी समीकरण में आसानी से फिट हो जाते हैं।
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परंपरागत नेताओं से अलग छवि
नवजोत सिद्धू पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ
- फोटो : फाइल फोटो
सिद्धू की छवि परंपरागत नेताओं से बिल्कुल अलग है और उनकी अपील ज्यादा व्यापक है। सिद्धू अपनी जनसभाओं में नए दौर की नई राजनीति की बात करते हैं। सिद्धू 2004 में राजनीति में आए और छा गए। उन्होंने अमृतसर से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा थी और कांग्रेस के आर एल भाटिया को 90 हजार वोटों से मात दी थी। कांग्रेस के जिन सांसद को सिद्धू ने मात दी उनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद भी वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। ऐसे दिग्गज को हराया तो स्वभाविक था कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू का कद एकाएक ही बड़ा हो गया। 2009 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा जीते लेकिन 2014 में बीजेपी ने उनका टिकट तो काटा लेकिन राज्यसभा के रास्ते सिद्धू को संसद भेजना ही पड़ा। पूरे दस साल सिद्धू अमृतसर से सांसद रहे और अब स्थापित नेता हैं।
पंजाब की राजनीति में नया विकल्प
चंडीगढ़ में नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
- फोटो : ANI
पंजाब की राजनीति में अभी तक मुकाबला बीजेपी-अकाली गठबंधन और कांग्रेस के बीच ही रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी के पूरी ताकत से मैदान में उतरने और सिद्धू के आवाज-ए-पंजाब फ्रंट के मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर आम आदमी पार्टी और सिद्धू का राजनीतिक फ्रंट अच्छा प्रदर्शन करता है तो दोनों के लिए गठबंधन बेहद आसान हो सकता है और पंजाब में बीजेपी-अकाली गठबंधन और कांग्रेस के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
सिद्धू के पिता कांग्रेस के जिला पदाधिकारी रहे हैं। अब सिद्धू और उनकी पत्नी का अमृतसर क्षेत्र में खूब प्रभाव है, अगर अपनी लोकप्रियता को सिद्धू सीटों में तब्दील करने में कामयाब रहे तो पंजाब की राजनीति में एक बड़ा खिलाड़ी स्थापित हो जाएगा।
सिद्धू के पिता कांग्रेस के जिला पदाधिकारी रहे हैं। अब सिद्धू और उनकी पत्नी का अमृतसर क्षेत्र में खूब प्रभाव है, अगर अपनी लोकप्रियता को सिद्धू सीटों में तब्दील करने में कामयाब रहे तो पंजाब की राजनीति में एक बड़ा खिलाड़ी स्थापित हो जाएगा।