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जैविक युद्ध के लिए कितने तैयार हैं हम, आखिर क्यों चिंता बढ़ा रही चीन-पाक की सीक्रेट डील
Fri, 24 Jul 2020 03:04 PM IST
अमित कुमार
अमित कुमार, नई दिल्ली
अमित कुमार, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2020 03:04 PM IST
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Bio warfare
- फोटो : Social Media
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पाकिस्तान और चीन की एक खुफिया डील के खुलासे ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खुफिया डील के मुताबिक चीन की जिस वुहान लैब से कोरोना वायरस के निकलने का शक जताया जा रहा है, अब उसी में भारत के खिलाफ जैविक हथियार तैयार किए जा रहे हैं।
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चीन ने पाक को अपने साथ मिलाया है और दोनों मिलकर यह साजिश रच रहे हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि चीन ने पाक की जमीन का इस्तेमाल करते हुए इबोला जैसा एक खतरनाक वायरस बना भी लिया है, जो बड़े पैमाने पर जान ले सकता है। देश में पहले ही कोरोना से 30 हजार के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में जैविक युद्ध की यह आहट कितना खतरा पैदा कर सकती है? हम एक न दिखने वाले दुश्मन से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं? जानते हैं सब कुछ...।
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एक सदी से चली आ रही होड़
- जैविक हथियारों के इस्तेमाल की बात करें तो इसका इतिहास एक सदी से भी पुराना है। पहले और द्वितीय विश्व युद्ध में भी जैविक हथियारों का प्रयोग किया गया था।
- पहले विश्व युद्ध में मस्टर्ड गैस का प्रयोग किया गया तो दूसरे विश्व युद्ध में नाजी सेना और जापान ने भी जैविक हथियारों का इस्तेमाल किया।
- अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के दौरान जैविक हथियारों को तैयार करने की एक होड़ सी दिखने लगी थी।
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी करीब 10 जैविक हथियार तैयार करने में लगा हुआ था। इनमें सेरिन, एंथ्रेक्स जैसे खतरनाक वायरस भी थे।
- कनाडा, जापान, सोवियत संघ और अमेरिका भी इस होड़ में बिल्कुल पीछे नहीं रहे।
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क्या लैब में तैयार हुआ कोरोना वायरस!
wuhan lab
- फोटो : social media
- मौजूदा समय की बात करें तो इबोला, जीका जैसे वायरस को हमेशा संदेह से देखा जाता रहा है।
- कोरोना वायरस को लेकर चीन पर उंगलियां उठ रही हैं। कहा जा रहा है कि यह वायरस चीनी सेना के अंतर्गत आने वाली वुहान लैब से निकला है।
- अमेरिका ने साफ तौर पर चीन पर आरोप लगाए हैं। हालांकि अभी तक इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। मगर वुहान लैब पर शक गहराता जा रहा है कि कोरोना यहीं से निकला।
- कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर आ चुके हैं। देश में संक्रमितों की संख्या 11 लाख पार हो चुकी है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान के बीच हुई गुप्त डील हमारी चिंता बढ़ा सकती है।
- चीन और पाकिस्तान भारत के खिलाफ नापाक इरादे रखते हैं, यह जगजाहिर है। फिर दोनों ही देशों की सीमाएं हमसे जुड़ी हुई हैं। फिर चीन लद्दाख में एलएसी पर पीछे हटने के बाद बौखलाया भी हुआ है।
- चीन वायरस तैयार करने के लिए पाकिस्तानी धरती का प्रयोग कर रहा है। ऐसे में चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान में ऐसी लैब नहीं है, जहां से किसी वायरस के बाहर निकलने का खतरा न हो। यह हमारे लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
आतंकियों के हाथ लगे तो होगी भारी तबाही
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
- सबसे बड़ा डर यह है कि अगर ये जैविक हथियार आतंकियों के हाथ लग जाते हैं, तो बड़ी तबाही हो सकती है। हाल ही में एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अल कायदा अरब क्षेत्र में जैविक हथियार खरीदने की कोशिश में है।
- पाकिस्तान आतंकियों का गढ़ बन चुका है। उस पर पाक प्रधानमंत्री इमरान खान सेना के हाथों की कठपुतली हैं। ऐसे में किसी भी तरह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
- विशेषज्ञों के अनुसार जैविक या वायरस हथियार भारत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। आतंकी एंथ्रेक्स, प्लेग, इबोला, सार्स जैसे जैविक हथियारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकते हैं। ये ऐसे बम हैं, जिनमें धमाका भले न हो, लेकिन नुकसान बहुत पहुंचाते हैं।
- वायरस को पाउडर या स्प्रे में मिलाकर आसानी से फैलाया जा सकता है।
- इन्हें किसी भी चिट्ठी या लिफाफे में डालकर या किसी अखबार पर छिड़ककर किसी के पास पहुंचाया जा सकता है।
- पूरे के पूरे शहर के पानी और खाने में इसे मिलाना भी बहुत मुश्किल नहीं है।
- इसे किसी भी इमारत पर खड़े होकर या किसी वाहन से हवा में फैलाया जा सकता है। बहुत छोटे से समय और प्रयास से बड़ा नुकसान किया जा सकता है।
क्या अनजान दुश्मन का सामना करने को तैयार हैं हम
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
- भारत इस तरह के हमले से निपटने के लिए पिछले 22 साल से खुद को तैयार करने में लगा हुआ है।
- हालांकि 1972 के समझौते के मुताबिक हम जैविक हथियार विकसित नहीं करते हैं, लेकिन इससे सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण व तकनीक जरूर विकसित किए जा रहे हैं।
- अगर भारत पर ऐसा हमला होता है, तो उससे निपटने के लिए फसलों पर छिड़काव करने वाले उपकरण से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल तक तैयार हैं।
- देश की कई लैब में इस तरह के हमले से निपटने को तैयार रहने के लिए काम चल रहा है।
- भारत में वायरस को लेकर शोध करने के लिए लेवल-3 और लेवल-4 की कई लैब हैं। पुणे स्थित लैब भी इन्हीं में से एक है।
डीआरडीओ की खास तैयारी
DRDO
- डीआरडीओ ने भी ऐसे कई उपकरण, ड्रेस और हथियार बनाए हैं, जिनके इस्तेमाल से इस न दिखने वाले दुश्मन से निपटा जा सकता है।
- मध्यप्रदेश के ग्वालियर में डीआरडीओ की लैब में खासतौर से जैविक हमले से निपटने को लेकर ही शोध चलता है।
- डीआरडीओ वायरस से निपटने के लिए एंटी बॉडीज तैयार करने में भी लगा हुआ है।
- डीआरडीओ का मुख्य फोकस एंथ्रेक्स, हैजा, ब्रूसेलोसिस, प्लेग, स्मॉलपॉक्स जैसे संक्रमण फैलाने वाले वायरस पर है।
- इसके अलावा केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों में न्यूक्लियर, बॉयोलॉजिकल एंड केमिकल (NBC) निदेशालय का गठन किया हुआ है।