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Bihar SIR: राहुल गांधी ने फिर लगाया वोट चोरी का आरोप, भाजपा ने कहा- मतदाताओं को भटकाने की कोशिश कर रहा विपक्ष
सार
राहुल-तेजस्वी के वोट चोरी के आरोपों के दिन ही चुनाव आयोग ने एक सूचना जारी कर कहा है कि अब तक एक भी राजनीतिक पार्टी ने किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या काटने के लिए संपर्क नहीं किया है। लेकिन एक वाम दल को छोड़ अभी किसी बड़े राजनीतिक दल ने मतदाता सूची में बड़े बदलाव के लिए आवेदन नहीं किया है।
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राहुल गांधी और तेजस्वी यादव
- फोटो : PTI
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विस्तार
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव 'वोट अधिकार यात्रा' के अंतर्गत 24 अगस्त को अररिया पहुंचे। यहां भी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग पर जनता का 'वोट चुराने' का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि वे महाराष्ट्र या हरियाणा की तरह बिहार में वोट चोरी नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार ऐसे लोग मिल रहे हैं जिन्हें मृत बताकर उनका वोट काट दिया गया है।
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हालांकि, राहुल-तेजस्वी के वोट चोरी के आरोपों के बीच उनकी ही पार्टियों ने अभी तक चुनाव आयोग के पास किसी मतदाता के नाम में संशोधन के लिए आवेदन नहीं किया है। चुनाव आयोग ने गलत आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने से छूटने या कटने पर उसके संशोधन के लिए एक महीने का समय दिया था। यह समय सीमा एक सप्ताह में समाप्त होने वाली है। लेकिन एक वाम दल को छोड़ अभी किसी बड़े राजनीतिक दल ने मतदाता सूची में बड़े बदलाव के लिए आवेदन नहीं किया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) ने दस नामों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। निजी तौर पर 1,21,143 लोगों ने चुनाव आयोग को आवेदन कर मतदाता सूची में संशोधन की मांग की है।
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इतने बीएलए, लेकिन मतदाता सूची पर कोई प्रश्न नहीं
इतने बीएलए, लेकिन मतदाता सूची पर कोई प्रश्न नहीं चुनाव आयोग के अनुसार, विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण में सबसे बड़े विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के 47,506 और कांग्रेस के 17,549 बीएलए काम कर रहे हैं। इसके अलावा वामदलों के 899 और 1496 बीएलए एसआईआर में सहयोग दे रहे हैं। (वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने बीएलए की संख्या पर भी सवाल खड़े किए हैं)। ये बीएलए किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे बिहार से हैं। लेकिन चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, एक वाम दल को छोड़ किसी बड़ी पार्टी ने मतदाताओं का नाम काटने या जोड़ने के लिए अब तक संपर्क नहीं किया है।
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विपक्ष ने कहा- नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया लंबीराहुल गांधी ने रविवार की प्रेस कांफ्रेंस में एक बार फिर कहा कि वे बिहार में हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तरह वोटों की चोरी नहीं होने देंगे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर उनके सवालों के जवाब अब तक नहीं दिए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर निरपेक्ष न होने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने कहा कि मतदाताओं का नाम जोड़ने या काटने का सिस्टम बहुत लंबा है जिसके कारण बीएलए के द्वारा नामों को जोड़ने या काटने का अनुरोध नहीं किया जा रहा है।
अपने ही बीएलए पर भरोसा क्यों नहीं कर रहा विपक्ष- भाजपा
भाजपा नेता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि पहले दिन से चुनाव आयोग स्पष्ट कह रहा है कि मतदाता सूची से केवल उन्हीं लोगों के नाम काटे या हटाए जा रहे हैं जो मतदाता मृत हो चुके हैं, या वे कहीं अन्य स्थान पर चले गए हैं। इसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। लेकिन इसके बाद भी विपक्ष बार-बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष भी यह जानता है कि वोट चोरी का आरोप केवल चुनाव में मतदाताओं को भ्रमित कर वोट हासिल करने के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा कि इसी से साबित होता है कि विपक्ष का पूरा चुनावी अभियान झूठ के प्रचार पर आधारित है।
सर्वोच्च अदालत ने स्वीकार किया हमारा तर्क- राजद
राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. नवल किशोर ने कहा कि सबसे पहले चुनाव आयोग ने आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अब सर्वोच्च अदालत ने भी साफ कर दिया है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार को स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिनका नाम सूची से काटा गया है, उनका नाम भी लोगों के बीच सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया है। अब जिनका नाम कटा होगा, वे आयोग से संपर्क कर अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए अपील कर रहे हैं। लेकिन चूंकि नाम काटने का काम चुनाव आयोग ने किया है, उसे ही यह बताना चाहिए कि किस मतदाता का नाम किस कारण से सूची से काटा गया है। सर्वोच्च अदालत ने भी चुनाव आयोग को यही आदेश दिया है।