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बिहार की बाजी: नीतीश ने किए एक तीर से कई वार, लोजपा को साधकर केंद्र और बिहार में हुए मजबूत
Wed, 16 Jun 2021 07:35 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/पटना
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/पटना
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 16 Jun 2021 07:35 AM IST
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पटना में चिराग समर्थकों ने बागी नेताओं की तस्वीर और पर पोती कालिख
- फोटो : social media
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लोक जनशक्ति पार्टी में हुए नेतृत्व परिवर्तन और बदली परिस्थितियों के बाद जदयू की स्थिति केंद्र बिहार में मजबूत हुई है और जदयू के साथ लोजपा के भी सांसद हैं नीतीश कुमार की नजर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर टिकी है।
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एक तीर से कई शिकार- विधानसभा चुनाव में हुए नुकसान का लिया बदला
नीतीश कुमार किसी भी सूरत पर चिराग पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने देना नहीं चाहते थे। पशुपति कुमार पारस के मंत्रिमंडल में शामिल होने से नीतीश कुमार को कोई दिक्कत नहीं होगी। नीतीश ने एक तीर से कई वार किए।
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नीतीश की सियासी चालें सफल रही तो, वह भाजपा के ही वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे लोक जनशक्ति पार्टी की नाराजगी की वजह से बीते विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को कम से कम 30 सीटों का नुकसान हुआ था।
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चिराग पासवान अगर एनडीए के साथ रहते और भाजपा जदयू के नेताओं के साथ मंच पर खड़े हुए। होते तो शायद बिहार में भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी होती और जदयू दूसरे नंबर की। मतलब साफ है कि लोजपा को साधकर नीतीश ने सिर्फ चिराग पासवान को कमजोर नहीं किया है बल्कि भाजपा के वोट बैंक में भी बड़ी सेंध लगाने की कोशिश की है।
अकेले पड़े चिराग पासवान
चिराग पासवान इस समय अकेले पड़ गए हैं अपने पिता की तरह सड़कों पर संघर्ष का उनका कोई अनुभव नहीं है दिवंगत रामविलास पासवान जिस तरह से दलित समाज के लोगों के बीच आसानी से घुल मिल जाया करते थे। ऐसा एक भी उदाहरण चिराग अभी तक पेश नहीं कर पाए हैं। न तो चिराग पासवान ने बिहार में दलितों के लिए कोई आंदोलन खड़ा किया और न ही उनके नेतृत्व में कोई बड़ी सफल रैली हो पाई है।
मतलब चिराग पिता की सियासी विरासत संभालने का माद्दा अभी तक नहीं दिखा पाए। नीतीश इस राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। वह बहुत ही आसानी से पशुपति कुमार पारस को रामविलास पासवान की जमीन पर उतार देंगे और उनका भरपूर सियासी इस्तेमाल भी कर लेंगे।