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बिहार कांस्टेबल भर्ती: पेपर की छपाई का टेंडर ब्लैक लिस्ट कंपनी को मिला, सीलबंद बक्सों से प्रश्नपत्र चुराए गए

Fri, 20 Jun 2025 03:31 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 20 Jun 2025 03:31 PM IST
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Bihar Constable Recruitment Tender for printing of paper was given to blacklisted company papers were stolen
ईडी की कार्रवाई - फोटो : ANI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पटना जोनल कार्यालय ने बिहार कांस्टेबल भर्ती घोटाला 2023 में पटना, नालंदा, रांची, लखनऊ और कोलकाता में 11 स्थानों पर गुरुवार को तलाशी अभियान चलाया है। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले हैं। इन्हें जब्त कर लिया गया है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि बिहार कांस्टेबल भर्ती के पेपर की छपाई का टेंडर ब्लैक लिस्ट कंपनी को मिला था। जब गोदाम से प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्र पर ले जाया जा रहा था तो रास्ते में सीलबंद बक्सों से प्रश्नपत्र निकाल लिए गए। आरोपियों ने उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से बेच कर नोट कमाए। 

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ईडी के अनुसार, इस तात्कालिक मामले में, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), पटना द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 16/2023 दिनांक 31.10.2023 और उसके बाद 22.08.2024 को जारी चार्जशीट के अनुसार, केंद्रीय कांस्टेबल चयन बोर्ड, जिसने बिहार कांस्टेबल भर्ती 2023 का आयोजन किया था, ने प्रश्नपत्र छपाई का ठेका मेसर्स कैलटेक्स मल्टीवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। इस कंपनी का गठन 2021 में हुआ था। उक्त कंपनी के पास कथित तौर पर इस तरह के काम का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। कंपनी के पास अपनी खुद की प्रिंटिंग प्रेस भी नहीं थी। 
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इस कंपनी का मेसर्स ब्लेसिंग सिक्योर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक अघोषित समझौता था, जिसके निदेशक कौशिक कुमार कर को पिछले पेपर लीक मामलों में शामिल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। कौशिक कुमार कर ने एक नई कंपनी मेसर्स कैलटेक्स मल्टीवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को उक्त मामले में शामिल करने में मदद की। अप्रत्यक्ष रूप से टेंडर हासिल करने के लिए कौशिक कुमार ने करीबी सहयोगियों का इस्तेमाल किया। कई पेपर लीक मामलों में शामिल आदतन अपराधी संजीव मुखिया और उसके गिरोह ने कथित तौर पर प्रिंटिंग प्रेस, गोदाम और परिवहन वाहनों के बारे में जानकारी जुटाई। 
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गोदाम से परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के दौरान सीलबंद बक्सों से प्रश्नपत्र निकाले गए। उन्हें सोशल मीडिया के जरिए बेचा गया। तलाशी के दौरान कई स्थानों पर आपत्तिजनक दस्तावेज पाए गए हैं, जैसे उम्मीदवारों की हस्तलिखित सूचियां, उनके उत्तर पुस्तिकाओं के ओएमआर नंबर, फर्जी डिग्री प्रमाण पत्र, कई उम्मीदवारों के दस्तावेज, उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए खाली चेक, उम्मीदवारों की सूची के साथ हस्तलिखित प्रश्न आदि। ईडी द्वारा मामले में आगे की जांच जारी है।

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