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Bihar: महागठबंधन के छोटे दलों में सुगबुगाहट, सरकारी आयोग-बोर्ड में शीर्ष पद देने की उठाई मांग
Wed, 19 Oct 2022 05:35 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 19 Oct 2022 05:35 PM IST
सार
बिहार सरकार के तहत कई निकाय हैं, जैसे मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, महिला और सार्वजनिक सेवा, जिनमें महागठबंधन के सहयोगियों के नेताओं को जिम्मेदार पद दिए जा सकते हैं।
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नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
- फोटो : Social Media
विस्तार
बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के छोटे घटक दल नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के तहत आयोगों, बोर्ड और अन्य संस्थाओं में शीर्ष पदों की मांग कर रहे हैं। भाकपा-माले (एल) विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सभी सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों का एक दल जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। उन्होंने कहा कि मैंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से मुलाकात की और मांग की कि सरकार के प्रभावी कामकाज के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों या गठबंधन सहयोगियों के नेताओं को विभिन्न आयोगों, बोर्ड और निगमों में जगह दी जानी चाहिए।
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महागठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं को जिम्मेदार पद देने की मांग
सीपीआईएमएल (एल) नेता ने कहा कि बिहार सरकार के तहत कई निकाय हैं, जैसे मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, महिला और सार्वजनिक सेवा, जिसमें महागठबंधन के सहयोगियों के नेताओं को जिम्मेदार पद दिए जा सकते हैं। सीपीआईएमएल (एल) गठबंधन का हिस्सा है लेकिन बाहर से सरकार का समर्थन कर रहा है। यदि प्रस्ताव लागू किया जाता है, तो सभी स्तरों पर सरकार के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित किया जाएगा। हम इन निकायों के सदस्यों या अध्यक्षों से जुड़े लाभों के लिए इन पदों की मांग नहीं कर रहे हैं। पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य आलम ने कहा कि इस संबंध में महागठबंधन के सभी सहयोगियों के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
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12 विधायकों के साथ भाकपा-माले (एल) महागठबंधन का चौथा सबसे बड़ा घटक है, जिसका गठन अगस्त में राज्य में भाजपा की सत्ता छीनने के बाद हुआ था। सिर्फ दो विधायकों के साथ महागठबंधन के मामूली सहयोगी भाकपा के वरिष्ठ नेता अतुल कुमार अंजन ने कहा कि बिहार में महागठबंधन के सभी सहयोगियों के बीच भागीदारी की भावना होनी चाहिए। कई महत्वपूर्ण निगम और आयोग हैं। इनमें से कुछ के पास अर्ध-न्यायिक शक्ति है। गठबंधन सहयोगियों के नेताओं को निर्णायक भूमिका दी जानी चाहिए।
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महागठबंधन की एक अन्य सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने कहा कि महागठबंधन सरकार के सभी हितधारकों को इसके कामकाज के सभी स्तरों में शामिल होना चाहिए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास नेकहा कि राज्य निकायों या एजेंसियों में सत्ताधारी सहयोगियों के नेताओं को लाने के प्रस्ताव को जल्द ही लागू किया जाएगा। कुछ कारणों से इसमें देरी हुई है। स्वस्थ राजनीतिक संवाद के लिए और महागठबंधन सरकार को मजबूत बनाने के लिए सभी स्तरों पर गठबंधन सहयोगियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।