जलवायु परिवर्तन: उत्तर भारत में 70 साल में बदले हालात, गर्म क्षेत्र का दायरा बढ़ा; दक्षिणी में नमी, बारिश बढ़ी
वैज्ञानिकों के मुताबिक विगत सात दशक में गर्म क्षेत्र का दायरा बढ़ा है। उत्तर भारत में 70 साल में हालात तेजी से बदले हैं। दक्षिणी भारत में नमी और बारिश बढ़ी है। मौसम विभाग ने मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण कर भारत का जलवायु मानचित्र नए सिरे से तैयार किया है। यूरोप में भी गर्मी से हजारों मौतें चिंताजनक तस्वीर का एक अन्य पहलू है।
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भारत की जलवायु में पिछले 70 वर्षों के दौरान चिंताजनक बदलाव देखने को मिला है। एक अध्ययन के अनुसार, उत्तर भारत के बड़े हिस्से गर्म और सूखे मौसम की ओर खिसक गए हैं। सूखा और शुष्क क्षेत्र, जो पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रहता था, अब राज्य के पूर्वी हिस्सों तक फैल चुका है। वहीं दूसरी ओर, इसी अवधि के दौरान प्रायद्वीपीय यानी दक्षिणी भारत में नमी और वर्षा की मात्रा में बढ़ोतरी देखी गई है।
मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की पत्रिका मौसम में शुक्रवार को प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगातार 30 वर्षों की दो मानक अवधियों- 1951–1980 और 1991–2020 के मौसम के आंकड़ों का विश्लेषण कर भारत का जलवायु मानचित्र नए सिरे से तैयार किया है।
करीब 7% भूभाग अब अधिक सूखे क्षेत्र में बदला
शोध के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक गर्मी और कम वर्षा वाले क्षेत्र का दायरा वर्ष 1951–1980 के दौरान के एक-चौथाई हिस्से से वर्ष 1991–2020 के दौरान बढ़कर एक-तिहाई हिस्से में फैल गया। करीब 7% भूभाग अब अधिक सूखे क्षेत्र में बदल गया है। वहीं, प्रायद्वीपीय भारत में गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र 30 प्रतिशत से घटकर 16% रह गया।
यूरोप के 30 देशों के 854 शहरों में गर्मी से मौतें
ब्रसेल्स। यूरोप में इस साल भीषण गर्मी से 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होने का अनुमान है। यह 26 साल में गर्मी से मौतों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वैज्ञानिकों के नए अध्ययन के मुताबिक, इनमें करीब 32,600 मौतें सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं। 32,600 जीवाश्म इंधन के इस्तेमाल मौतों की वजह सीधे जलवायु परिवर्तन से होने वाला प्रदूषण इस बदलाव की प्रमुख वजह है। नेचर हेल्थ जर्नल में प्रकाशित दो शोधपत्रों के अनुसार, जून से अगस्त के बीच यूरोप के 30 देशों के 854 शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों का आकलन किया गया।
इस साल गर्मी से 50 हजार से अधिक मौतें
शोधकर्ताओं ने इस साल के तापमान की तुलना उस तापमान से की, जो जलवायु परिवर्तन नहीं होने की स्थिति में रहने की संभावना थी। इसके बाद तापमान और रोजाना होने वाली मौतों के संबंध पर आधारित मॉडल से मौतों का अनुमान लगाया गया। अध्ययन में गर्मी से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा 50,391 रहा।
खेती पर मंडराया संकट
आईएमडी पुणे की वैज्ञानिक अनन्या कर्मकार ने कहा, 1951 से 2020 तक भारत के जलवायु मानचित्र की तुलना करने पर उत्तर में सबसे स्पष्ट बदलाव दिखा। गर्म, शुष्क क्षेत्र पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैल गया है। यह देश के महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में से एक है, इसलिए बोआई और कटाई के समय पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।