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Asaduddin Owaisi: 'अनुच्छेद 370 रद्द होने से डोगरा और बौद्धों को सबसे ज्यादा नुकसान', 'सुप्रीम' फैसले पर ओवैसी

Mon, 11 Dec 2023 05:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 11 Dec 2023 05:32 PM IST
सार

Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के केंद्र के फैसले को वैधता मिलने के बाद केंद्र सरकार को चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद या मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने से कोई नहीं रोक सकता।

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Biggest losers will be Dogras of Jammu, Buddhists of Ladakh, says Asaduddin Owaisi
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के केंद्र के फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू के डोगरा और लद्दाख के बौद्धों को होगा। उन्हें जनसांख्यिकीय बदलाव का सामना करना पड़ेगा। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के  अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को यह टिप्पणी की। 

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने यह बयान अनुच्छेद 370 निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दिया है। उन्होंने कहा, 'केंद्र के फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू के डोगरा और लद्दाख के बौद्धों को होगा, जिन्हें जनसांख्यिकीय बदलाव का सामना करना पड़ेगा।' उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई समयसीमा क्यों नहीं है।

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उन्होंने कहा, '2024 में लोकसभा चुनाव के साथ ही जम्मू-कश्मीर में दिल्ली के शासन को पांच साल हो जाएंगे।' एआईएमआईएम प्रमुख ने दावा किया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य भारत का अभिन्न अंग है। लेकिन अभिन्न अंग होने का मतलब यह नहीं है कि इसका संघ के साथ अलग संवैधानिक संबंध नहीं है।' उन्होंने कहा, 'कश्मीर की संविधान सभा के भंग होने के बाद इस संवैधानिक संबंध को स्थायी बना दिया गया।'

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उन्होंने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के केंद्र के फैसले को वैधता मिलने के बाद केंद्र सरकार को चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद या मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा, 'मैंने एक बार कहा है और मैं इसे फिर कहूंगा। एक बार इसे वैधता मिल जाने के बाद केंद्र सरकार को चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद या मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने से कोई नहीं रोक सकता।'

लद्दाख का उदाहरण देते हुए ओवैसी ने कहा कि वहां उपराज्यपाल का शासन है, जिसमें कोई लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 को कश्मीर में बिना किसी सार्वजनिक विचार-विमर्श के और निर्वाचित विधानसभा के बिना निरस्त किया गया।  ओवैसी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 2019 में एक संगोष्ठी में कहा था कि सार्वजनिक विचार-विमर्श हमेशा उन लोगों के लिए खतरा होगा जिन्होंने इसकी गैरमौजूदगी में सत्ता हासिल की है।

उन्होंने कहा, 'सवाल यह है कि क्या आप पूरे राज्य में कर्फ्यू लगाकर उसके विशेष दर्जे को रद्द कर सकते हैं। जबकि यह अनुच्छेद 356 का विषय है और एक निर्वाचित विधानसभा के बिना लिया गया फैसला है। कश्मीर में किसे पांच अगस्त पर चर्चा करने का अधिकार है? ओवैसी ने कहा, बोम्मई फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संघवाद संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

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