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Strike: इन अस्पतालों में होने जा रही बड़ी हड़ताल, आयुष्मान योजना के लाखों मरीजों की जान पर गहरा जाएगा संकट
Wed, 12 Feb 2025 05:36 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 12 Feb 2025 05:36 PM IST
सार
Nurses strike: पूरे देश में ईएसआईसी से जुड़े 59 बड़े अस्पताल और 105 बड़ी डिस्पेंसरी केंद्र सरकार के अंदर काम करती हैं। इनमें लगभग पांच हजार नर्सें काम करती हैं। इन अस्पतालों में रोजाना लाखों लोगों का इलाज होता है।
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सभी ईएसआईसी अस्पतालों की नर्सों ने 25 फरवरी से एक साथ हड़ताल पर जाने का निर्णय कर लिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अपनी आवश्यक मांगों को पूरा न होते देख देश के सभी ईएसआईसी अस्पतालों की नर्सों ने 25 फरवरी से एक साथ हड़ताल पर जाने का निर्णय कर लिया है। इससे इन अस्पतालों में रोजाना इलाज करा रहे लाखों मरीजों की जान पर संकट गहरा सकता है। ईएसआईसी अस्पतालों की नर्सों के संगठन ने स्वास्थ्य विभाग के अपने विभाग प्रमुख को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी वाजिब मांगों को पूरा करने के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तो इन अस्पतालों की लगभग 5000 नर्सें एक साथ काम करना बंद कर देंगी और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। चूंकि, अब आयुष्मान योजना के अंतर्गत भी इन अस्पतालों में इलाज होता है, ऐसे में यदि नर्सें हड़ताल पर जाती हैं तो इससे पूरे देश में आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले लाखों मरीजों को भी भारी नुकसान हो सकता है।
पूरे देश में ईएसआईसी से जुड़े 59 बड़े अस्पताल और 105 बड़ी डिस्पेंसरी केंद्र सरकार के अंदर काम करती हैं। इनमें लगभग पांच हजार नर्सें काम करती हैं। इन अस्पतालों में रोजाना लाखों लोगों का इलाज होता है। इन नर्सों ने 2020 से ही अपनी कई प्रमुख मांगों को लेकर विभाग और सरकार के सामने अपनी मांगों को रखने का काम किया है। कई दौर की बैठकों और बातचीत के बाद भी आज तक उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया है जिसके कारण अब नर्सेज फेडरेशन ने हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
ऑल इंडिया ईएसआईसी नर्सिंग ऑफिसर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल जोधराज बैरवा ने अमर उजाला को बताया कि 2020 से ही वे अपनी मांगों को विभाग-सरकार के सामने उठा रहे हैं, लेकिन कई दौर की बैठकों और बातचीत के बाद भी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यही कारण है कि अब उन्हें हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ रहा है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
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1. इंटर रीजन ट्रांसफर- इन नर्सों की सबसे बड़ी मांग ट्रांसफर नीति को सुसंगत बनाने की है। नर्सों की मांग है कि उन्हें उन अस्पतालों में आसानी से ट्रांसफर किया जाना चाहिए जहां नर्सों के पद रिक्त हैं। ऐसा करने से अपने घरों से बहुत दूर सेवा कर रही नर्सों को अपने घरों के आसपास या सुविधा के अनुसार काम करने की सुविधा मिल जाएगी। इससे मरीजों को भी बेहतर सेवा देने में सुविधा मिलेगी। नई नियुक्तियों की नर्सों को नए स्थानों पर नियुक्त किया जाए।
2. नर्सों का आरोप है कि 2020 से ही उनकी प्रमोशन रोक दी गई है। उनकी मांग है कि उन्हें केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार प्रमोशन दी जानी चाहिए।
3. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली/एनसीआर, झारखंड, ओडिशा, पंजाब और अन्य राज्यों में लंबित एमएसीपी तुरंत की जाए।
4. केंद्र सरकार के सभी विभागों में बोनस देने का एक सुसंगत नियम है, जबकि ईएसआईसी की नर्सों को यह सुविधा नहीं मिल रही है। उनकी मांग है कि उन्हें भी नियमानुसार बोनस दिया जाना चाहिए।
5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नर्सिंग संवर्ग के लिए जारी नई जॉब कार्ड को ईएसआईसी में लागू किया जाए।
6. सभी ईएसआईसी अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर्स की स्टाफ स्ट्रेंथ SIU नॉर्म्स के अनुसार लागू की जाए।
7. ईएसआईसी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए चिकित्सा उपस्थिति और उपचार पर CGHS जैसी एक यूनिफाइड पॉलिसी बनाई जाए।
8. टेक्निकल रेजिग्नेशन के बाद ईएसआईसी में ज्वॉइन हुए नर्सिंग अधिकारियों को पे प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाए।
9. 2018 के बाद ज्वाइन हुए नर्सिंग अधिकारियों की लंबित प्रोबेशन पीरियड की मंजूरी दी जाए।
10. नॉर्सेट के माध्यम से नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती में लिंग आधारित आरक्षण (80:20) के निर्णय की समीक्षा की जाए।
11. नर्सिंग स्टाफ को मिलने वाले क्वालीफिकेशन पे (जैसे पोस्ट बेसिक बीएससी. नर्सिंग/एम.एससी. नर्सिंग) के भुगतान पर स्पष्टीकरण दिया जाए।
12. दिल्ली स्थित मुख्यालय कार्यालय में नर्सिंग संवर्ग के मामलों से निपटने के लिए नर्सिंग ब्रांचेज को पूरी तरह से फंक्शनल किया जाए।
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पूरे देश में ईएसआईसी से जुड़े 59 बड़े अस्पताल और 105 बड़ी डिस्पेंसरी केंद्र सरकार के अंदर काम करती हैं। इनमें लगभग पांच हजार नर्सें काम करती हैं। इन अस्पतालों में रोजाना लाखों लोगों का इलाज होता है। इन नर्सों ने 2020 से ही अपनी कई प्रमुख मांगों को लेकर विभाग और सरकार के सामने अपनी मांगों को रखने का काम किया है। कई दौर की बैठकों और बातचीत के बाद भी आज तक उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया है जिसके कारण अब नर्सेज फेडरेशन ने हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है।
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क्या हैं प्रमुख मांगें?
ऑल इंडिया ईएसआईसी नर्सिंग ऑफिसर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल जोधराज बैरवा ने अमर उजाला को बताया कि 2020 से ही वे अपनी मांगों को विभाग-सरकार के सामने उठा रहे हैं, लेकिन कई दौर की बैठकों और बातचीत के बाद भी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यही कारण है कि अब उन्हें हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ रहा है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
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1. इंटर रीजन ट्रांसफर- इन नर्सों की सबसे बड़ी मांग ट्रांसफर नीति को सुसंगत बनाने की है। नर्सों की मांग है कि उन्हें उन अस्पतालों में आसानी से ट्रांसफर किया जाना चाहिए जहां नर्सों के पद रिक्त हैं। ऐसा करने से अपने घरों से बहुत दूर सेवा कर रही नर्सों को अपने घरों के आसपास या सुविधा के अनुसार काम करने की सुविधा मिल जाएगी। इससे मरीजों को भी बेहतर सेवा देने में सुविधा मिलेगी। नई नियुक्तियों की नर्सों को नए स्थानों पर नियुक्त किया जाए।
2. नर्सों का आरोप है कि 2020 से ही उनकी प्रमोशन रोक दी गई है। उनकी मांग है कि उन्हें केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार प्रमोशन दी जानी चाहिए।
3. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली/एनसीआर, झारखंड, ओडिशा, पंजाब और अन्य राज्यों में लंबित एमएसीपी तुरंत की जाए।
4. केंद्र सरकार के सभी विभागों में बोनस देने का एक सुसंगत नियम है, जबकि ईएसआईसी की नर्सों को यह सुविधा नहीं मिल रही है। उनकी मांग है कि उन्हें भी नियमानुसार बोनस दिया जाना चाहिए।
5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नर्सिंग संवर्ग के लिए जारी नई जॉब कार्ड को ईएसआईसी में लागू किया जाए।
6. सभी ईएसआईसी अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर्स की स्टाफ स्ट्रेंथ SIU नॉर्म्स के अनुसार लागू की जाए।
7. ईएसआईसी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए चिकित्सा उपस्थिति और उपचार पर CGHS जैसी एक यूनिफाइड पॉलिसी बनाई जाए।
8. टेक्निकल रेजिग्नेशन के बाद ईएसआईसी में ज्वॉइन हुए नर्सिंग अधिकारियों को पे प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाए।
9. 2018 के बाद ज्वाइन हुए नर्सिंग अधिकारियों की लंबित प्रोबेशन पीरियड की मंजूरी दी जाए।
10. नॉर्सेट के माध्यम से नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती में लिंग आधारित आरक्षण (80:20) के निर्णय की समीक्षा की जाए।
11. नर्सिंग स्टाफ को मिलने वाले क्वालीफिकेशन पे (जैसे पोस्ट बेसिक बीएससी. नर्सिंग/एम.एससी. नर्सिंग) के भुगतान पर स्पष्टीकरण दिया जाए।
12. दिल्ली स्थित मुख्यालय कार्यालय में नर्सिंग संवर्ग के मामलों से निपटने के लिए नर्सिंग ब्रांचेज को पूरी तरह से फंक्शनल किया जाए।