फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Big shock for pakistan after broke down the recruitment network of terrorists in kashmir

कश्मीर में आतंकियों का भर्ती नेटवर्क टूटते ही बौखला उठा पाकिस्तान, लॉकडाउन में तिलमिला रहे आतंकी

Mon, 11 May 2020 08:10 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 11 May 2020 08:10 PM IST
सार

  • लांच पैड पर मौजूद आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की तैयारी
  • भारतीय सुरक्षा बलों की सजगता के चलते घुशपैठ की कोशिशें हुई असफल
  • 4जी इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने का फायदा हुआ सुरक्षा बलों को

विज्ञापन
Big shock for pakistan after broke down the recruitment network of terrorists in kashmir
srinagar - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

विज्ञापन

कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन और बॉर्डर पर होने वाली घुसपैठ को रोकने में मिली कामयाबी से आतंकियों का भर्ती नेटवर्क टूट गया है। इससे कश्मीर घाटी में मौजूद आतंकी तिलमिला रहे हैं तो वहीं उनका हमदर्द पाकिस्तान बौखला उठा है।


सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और दूसरी सीक्रेट एजेंसियों को तकरीबन एक जैसे खुफिया इनपुट मिल रहे हैं। इनपुट के अनुसार, पाकिस्तानी आईएसआई ऐसे प्रयासों में जुटी है कि किसी भी तरह से लांच पैड पर मौजूद आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश करा दिया जाए।

विज्ञापन


लॉकडाउन और सोशल मीडिया पर लगे अंकुश ने आतंकियों को परेशान कर दिया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत कह चुके हैं कि आतंकी संगठनों के सभी आकाओं का खात्मा हमारी प्राथमिकता है। हम उन्हें इस तरह घेर कर मारते रहेंगे, ताकि दूसरे लोग आतंक का रास्ता न अपनाएं। निरंतर ऑपरेशनों से आतंकी संगठनों की भर्ती में कमी आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

बता दें कि पिछले साल कश्मीर में जब अनुच्छेद 370 हटाया गया तो फोन सेवाओं और इंटरनेट पर रोक लगाई गई थी। लॉकडाउन के दौरान सुरक्षा बलों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। एक तरफ आतंकियों को छिपने का ठिकाना तलाशने में दिक्कत हो रही थी तो दूसरी ओर सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ भी काफी हद तक कम हो चली थी।


तीसरा बड़ा कारण था, लोकल स्पोर्ट और भर्ती। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार, अब आतंकवादी छटपटा रहे हैं। पिछले साल 160 आतंकी मारे गए थे, जबकि इस साल 3 मई तक 64 आतंकियों को ढेर किया गया है।

आने वाले समय में आतंकियों का खात्मा तय है। पाकिस्तान, इन आतंकियों की खुली मदद कर रहा है। सीमा पार से घुसपैठ के दर्जनों प्रयास हो चुके हैं, मगर भारतीय सुरक्षा बलों की सजगता के चलते उन्हें असफल कर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। हालांकि सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने इन सेवाओं पर लगी रोक को हटाने से मना कर दिया है।
 

जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बल के एक अधिकारी का कहना है कि दिसंबर तक घाटी में अधिकांश आतंकियों का खात्मा कर दिया जाएगा। सीमा पार दो सौ से ज्यादा आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। ऐसा नहीं है कि वे प्रयास नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने बीते दो माह में कई बार यह हरकत की है, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसी वजह से पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी कर युद्ध विराम नीति का बार-बार उल्लंघन कर रहा है। कश्मीर में दो वर्ष से जिस तरह सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर शिकंजा कसा है, उससे आतंकियों की भर्ती प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ा है।

अब उन्हें नए लड़के नहीं मिल रहे। जो गुमराह होकर आते हैं, वे कुछ समय बाद सरेंडर कर देते हैं। 2018 में करीब 210 कश्मीरी युवा आतंकी संगठनों से जुड़े थे। पिछले साल 140 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे।

इनमें से कई युवा तो वापस लौट आए हैं, जबकि कुछ पकड़े गए। ये लोग हैंड ग्रेनेड फेंकना, आत्मघाती हमला या स्लीपर सेल बनकर आतंकियों को सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी देना, आदि काम करते थे।
 

गत सप्ताह कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज नायकू को मारा था। वह दो साल से मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। नायकू का मारा जाना सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी में शुमार रहा है।

सीडीएस बिपिन रावत ने रियाज नायकू के एनकाउंटर पर कहा था, ये लोग अपनी ऐसी छवि पेश करते हैं जैसे ये आम लोगों के लिए लड़ रहे हों। इसी का सहारा लेकर वे खुद का प्रचार करने लगते हैं। इनका मकसद होता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे जुड़ें।

हमारे सुरक्षा बल ऐसे लोगों की असल तस्वीर लोगों से छिपने नहीं देंगे। आज आतंकी संगठनों की भर्ती में कमी आई है। वे आतंकी किसी के हीरो नहीं हैं, सच तो यह है कि वे कोई भी नहीं हैं। 


जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी बताते हैं कि 4जी इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध सुरक्षा बलों को फायदा पहुंचा रहा है। इससे भी पाकिस्तान तिलमिला रहा है। वह अपने गुर्गों तक फर्जी वीडियो संदेश नहीं भेज पा रहा है। इससे पत्थरबाजी की घटनाओं में कभी आई है।


इस साल मारे गए 64 आतंकियों में से 22 आतंकी तो अकेले हिज्बुल से जुड़े थे। दस आतंकी लश्कर से और करीब 9 आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के साथ काम रहे थे। आतंकियों के टेलीग्राम चैनल को ब्लॉक किया गया।



इसी के जरिए घाटी के युवाओं को गुमराह कर आतंकी संगठनों में शामिल किया जाता था। पाकिस्तान ने पिछले साल अप्रैल में 234 बार सीज फायर तोड़ा था। इस बार वह संख्या 380 से ज्यादा है। पाकिस्तान की मंशा है कि सीज फायर का उल्लंघन कर आतंकियों को कश्मीर में घुसा दिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed