फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   big naxali attack in chhattisgarh sukma

आखिर क्यों हो जाते हैं सुकमा जैसे बड़े नक्सली हमले

Tue, 25 Apr 2017 09:05 AM IST
प्रकाश सिंह / पूर्व डीजी, CRPF
प्रकाश सिंह / पूर्व डीजी, CRPF Updated Tue, 25 Apr 2017 09:05 AM IST
विज्ञापन
big naxali attack in chhattisgarh sukma

छत्तीसगढ़ के सुकमा में जैसे हमले होने के कई कारण हो सकते हैं। दो-तीन बातें ध्यान देने की हैं। पहली बात तो ये कि भारत सरकार की तरफ से जो ये संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नक्सली समस्या लगभग खत्म होने की कगार पर है और पांच साल में इसका पूरा उन्मूलन हो जाएगा- ये गलत है।

विज्ञापन


जब इस तरह की बात सरकार के तरफ़ से की जाती है तो इसकी प्रतिक्रिया नक्सलियों में होती है और वो कुछ ऐसा करके दिखाने की कोशिश करते हैं कि वो अभी खत्म नहीं हुए हैं। वो ये जता देना चाहते हैं कि "हमारे में अभी भी शक्ति बची हुई है और हम आपके अर्धसैनिक बलों पर हमला कर सकते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।" ये उन्होंने संदेश देने की कोशिश की है।
विज्ञापन


दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि राज्य पुलिस के एक जवान के घायल होने की भी खबर नहीं है, मरने की बात तो दूर रही। हमारे ऑपरेशंस में एक बहुत बड़ी कमी ये है कि केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस में जो समन्वय होना चाहिए वो नहीं है। राज्य पुलिस को केंद्रीय बलों के साथ जितना मिल-जुलकर काम करना चाहिए वो भी वो नहीं कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

समन्वय की कमी

big naxali attack in chhattisgarh sukma

ऐसी लड़ाई में सफलता तभी मिलती है जब राज्य पुलिस लड़ाई में आगे रहे और उसे केंद्रीय बलों का समर्थन हासिल हो। लेकिन छत्तीसगढ़ में एकदम उल्टा हो रहा है। केंद्रीय बल मोर्चे में आगे हैं और राज्य पुलिस पीछे से थोड़ा-बहुत सहायता करती है। जैसी खबरें आ रही हैं कि 200-300 माओवादियों ने हमले को अंजाम दिया। तो मैं कहना चाहता हूं कि राज्य पुलिस के पास और केंद्रीय बलों के पास भी इंटेलिजेंस नेटवर्क है जहां से सूचनाएं आती हैं।

अगर राज्य पुलिस सीआरपीएफ़ को कवर दे रही होती तो हालत कुछ दूसरी हो सकती थी। राज्य पुलिस को थानों से खुफिया जानकारी मिलती रहती है। ऐसा तो है नहीं कि 200-300 लोग अचानक आसमान से टपक पड़ेंगे। ये लोग कहीं कैंप कर रहे होंगे, कहीं से कहीं गए होंगे, कहीं योजना बनाई होगी।

सबक नहीं ली जाती

big naxali attack in chhattisgarh sukma

केंद्रीय बल ऐसी जगहों पर काम जरूर कर रहे हैं, लेकिन लोकल पुलिस की पूरी मदद और इंटेलिजेंस सूचनाएं नहीं मिलने के कारण ये कहीं न कहीं कमजोर पड़ जाते हैं। सरकार भी ऐसे हमलों से सबक नहीं लेती। वो सेफ़ प्ले करना चाहती है।

वो सोचती है कि कौन इस लड़ाई में पड़े, केंद्रीय बल इसमें लगाए गए हैं, उन्हें लड़ने दिया जाए। सरकारी अफसर सोचते हैं कि डेवलपमेंट का पैसा आ रहा है और वो उसे खाने-पीने में लगे रहते हैं। 10 से 15 प्रतिशत अफसर अभी भी ऐसे हैं जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन एक बड़ी तादाद ऐसे अफसरों की है जिन पर सख़्ती करने की जरूरत है। ऐसे अफसर अपनी जान बचा लेते हैं और जवानों को मरवा देते हैं। ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक माओवादियों से निपटने की नीति को परिभाषित करने का कोई प्रयास नहीं हुआ।
 

अपनी डफली-अपना राग

big naxali attack in chhattisgarh sukma

मैंने ये बात मनमोहन सिंहजी के सामने उठाई थी। उन्होंने मेरे सामने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को कहा था कि माओवादियों से लड़ने की क्या नीति होनी चाहिए उसको कोडीफ़ाई कीजिए। और मैंने जब कोडीफ़ाई करने की पहल की तो मुझे कह दिया गया कि अभी कोई जरूरत नहीं है, जब जरूरत होगी तो आपको बताया जाएगा।

अभी हालात ये हैं कि अलग-अलग सरकारें हैं और सबकी अपनी डफली अपना राग वाली कहानी है। कोई ऐसी नीति नहीं है जिसे हम कह सकें कि यही नीति छत्तीसगढ़ की है और यही महाराष्ट्र सरकार की है। जिस राज्य सरकार का जैसा आकलन है उसी के हिसाब से वो पॉलिसी बनाती है। ममता बनर्जी की कुछ नीति है, रमन सिंह की कुछ है, बिहार की कुछ और झारखंड की कुछ है।

 केंद्र सरकार कहती है कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार के अंतर्गत आता है। हम तो केवल संसाधन दे सकते हैं, फोर्स दे सकते हैं और नीति संबंधी कुछ मशविरा दे सकते हैं।हालत बहुत चिंताजनक है। आज मुझे नहीं दिखता कि कोई ऐसी नीति हो जिसके आधार पर भारत भर में माओवादियों के खिलाफ कोई अभियान चल रहा हो। सबकुछ अपनी-अपनी डफली और अपना-अपना राग के सिद्धांत पर चल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed