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आईएस को अपने लिए चुनौती मान रहा है तालिबान
शशिधर पाठक/अमर उजाला
Updated Thu, 11 Aug 2016 08:33 PM IST
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बर्बर आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात आतंकी संगठन आईएस को तालिबान अपना प्रतिद्वंदी मानता है। अफगानिस्तान के भारत में राजदूत डा. शाहिद मोहम्मद अब्दाली ने कहा कि आईएस को तालिबान पसंद नहीं करता। दोनों आतंकी संगठनों में कुछ मामलों में संबंध हैं और कुछ में दोनों में संबंध हैं। अब्दाली ने कहा कि जहां तक प्रश्न तालिबान का है तो वह खुद को पुन: संगठित कर रहा है और उसे आईएस से अफगानिस्तान में अपने वर्चस्व को चुनौती देने का खतरा भी नजर आता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज में अपनी किताब अफगानिस्तान-पाकिस्तान-इंडिया : ए पैराडाइम शिफ्ट पर चर्चा के दौरान अब्दाली ने कहा कि आतंकवाद क्षेत्रीय स्थायित्व और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का आतंकी संगठन तालिबान उनके देश का पैदा किया नहीं है। यही नहीं अफगानिस्तान की मूल समस्याओं की जड़ भी देश के बाहर से है, लेकिन रणनीतिक रूप से काफी अहम अफगानिस्तान इससे देशों के साथ आपसी सहयोग, समन्वय के जरिए निबटने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए अब्दाली ने भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग अहमियत भी बताई।
राजदूत अब्दाली ने कहा कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग और उर्जा सुरक्षा के कदम, गैस पाइप लाइन, ईरान और भारत के साथ चाहबहार बंदरगाह परियोजना आदि के जरिए ही क्षेत्रीय परिस्थितियों को बदला जा सकता है। पाकिस्तान के बारे में पूछे गए एक सवाल पर अब्दाली ने कहा कि स्थायी और खुशहाल अफगानिस्तान को यदि वह बनने देना चाहता है तो पहले तालिबान के आतंकवाद को रोकने में मदद करे। शांति के प्रयासों में हमारी मदद करे।
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अफगानिस्तान कभी दो लाख 14 हजार से अधिक विदेशी फौज सुरक्षा में तैनात थी। अब वह हालत नहीं है। विदेशी फौज अफगानिस्तान की धरती से जा रही है और अब यह देश अपने सैनिकों, संस्थाओं, एजेंसियों के जरिए जी रहा है। हमारे पास न तो पर्याप्त रक्षा साजो-सामान हैं, न हीं संसाधन। इसके लिए हम भारत जैसे कुछ देशों के सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। अफगानिस्तान अपने पैरों पर खड़ा होने की भरसक कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के अखबारों में लिखा जा रहा है कि उसकी नीतियां उसी(पाकिस्तान) के लिए आत्मघाती हैं। अब्दाली ने कहा कि यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि आतंकवाद का इस्तेमाल करके तोड़-फोड़ की विचारधारा किसी के लिए फलदायी नहीं होती। यह कोई सुरक्षित नीति नहीं है। अब हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां बदलाव आया है और अब आर्थिक सहयोग, विकास, ट्रेड एंड ट्रांजिट, लोगों, देशों से जुड़ाव सबसे उपयुक्त जरिया है।
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इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज में अपनी किताब अफगानिस्तान-पाकिस्तान-इंडिया : ए पैराडाइम शिफ्ट पर चर्चा के दौरान अब्दाली ने कहा कि आतंकवाद क्षेत्रीय स्थायित्व और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का आतंकी संगठन तालिबान उनके देश का पैदा किया नहीं है। यही नहीं अफगानिस्तान की मूल समस्याओं की जड़ भी देश के बाहर से है, लेकिन रणनीतिक रूप से काफी अहम अफगानिस्तान इससे देशों के साथ आपसी सहयोग, समन्वय के जरिए निबटने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए अब्दाली ने भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग अहमियत भी बताई।
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राजदूत अब्दाली ने कहा कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग और उर्जा सुरक्षा के कदम, गैस पाइप लाइन, ईरान और भारत के साथ चाहबहार बंदरगाह परियोजना आदि के जरिए ही क्षेत्रीय परिस्थितियों को बदला जा सकता है। पाकिस्तान के बारे में पूछे गए एक सवाल पर अब्दाली ने कहा कि स्थायी और खुशहाल अफगानिस्तान को यदि वह बनने देना चाहता है तो पहले तालिबान के आतंकवाद को रोकने में मदद करे। शांति के प्रयासों में हमारी मदद करे।
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अफगानिस्तान कभी दो लाख 14 हजार से अधिक विदेशी फौज सुरक्षा में तैनात थी। अब वह हालत नहीं है। विदेशी फौज अफगानिस्तान की धरती से जा रही है और अब यह देश अपने सैनिकों, संस्थाओं, एजेंसियों के जरिए जी रहा है। हमारे पास न तो पर्याप्त रक्षा साजो-सामान हैं, न हीं संसाधन। इसके लिए हम भारत जैसे कुछ देशों के सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। अफगानिस्तान अपने पैरों पर खड़ा होने की भरसक कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के अखबारों में लिखा जा रहा है कि उसकी नीतियां उसी(पाकिस्तान) के लिए आत्मघाती हैं। अब्दाली ने कहा कि यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि आतंकवाद का इस्तेमाल करके तोड़-फोड़ की विचारधारा किसी के लिए फलदायी नहीं होती। यह कोई सुरक्षित नीति नहीं है। अब हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां बदलाव आया है और अब आर्थिक सहयोग, विकास, ट्रेड एंड ट्रांजिट, लोगों, देशों से जुड़ाव सबसे उपयुक्त जरिया है।